एमपी में बढ़ा जाम छलकाने का चलन, इस साल शराब की खपत में हुई 27 फीसदी बढ़ोतरी

मध्य प्रदेश में शराब की बिक्री में एक वर्ष में 27 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. प्रदेश सरकार को 2018 में शराब से राजस्व प्राप्ति 8233 करोड़ की हुई थी जबकि इस साल 9600 करोड़ खजाने में आए हैं.

Sonia Rana | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 2, 2019, 12:46 PM IST
एमपी में बढ़ा जाम छलकाने का चलन, इस साल शराब की खपत में हुई 27 फीसदी बढ़ोतरी
प्रदेश में देसी शराब की बिक्री भी बहुत बढ़ी है
Sonia Rana
Sonia Rana | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 2, 2019, 12:46 PM IST
मध्य प्रदेश में एक समय नशाबंदी की बात जोरों पर चल रही थी. शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्ववाली प्रदेश की पिछली सरकार ने नर्मदा किनारे और हाइवे के किनारे से शराब की दुकानों को हटाने का नियम भी बनाया था लेकिन पिछले एक साल में एमपी में जाम छलकाने का चलन बढ़ गया है. एक साल में  शराब की खपत में 27 फीसदी इजाफा हुआ है.आबकारी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि नशाबंदी अभियान का असर एमपी में नहीं दिखाई नहीं रहा है. आंकड़े बताते हैं एमपी में शराब प्रेम लोगों में इस कदर बढ़ा है कि 1 साल में प्रदेश में 27 फीसदी शराब की बिक्री बढ़ गई. दूसरी बात यह है कि इससे सरकार का खाली खजाना भर रहा हैं. शराब बिक्री में हुई बढ़ोतरी से सरकार के राजस्व में 1 हजार करोड़ का इजाफा हुआ है.

स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होने के बावजूद अंग्रेजी शराब की बिक्री में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.


डालते हैं आंकड़ों पर एक नजर

- 2018-19 में 1109 लाख प्रूफ लीटर से बढ़कर 1164 लाख प्रूफ लीटर बिकी देसी मदिरा

- 2018 के मुकाबले 2019 में विदेशी शराब की बिक्री में हुआ 20 प्रतिशत इजाफा
- बीयर की खपत में भी हुई 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी

-1020 लाख प्रूफ लीटर से बढ़कर इस साल 1044 लाख प्रूफ लीटर बिकी बीयर
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- इस साल शराब बिक्री से राजस्व में भी हुई बढ़ोतरी
- 2018 में 8233 करोड़ था शराब से मिला राजस्व इस साल 9600 करोड़ हुई शराब से राजस्व प्राप्ति

बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

लोगों में बढ़ते इस शराब प्रेम पर बीजेपी- कांग्रेस आमने- सामने हैं. कांग्रेस का आरोप है कि शिवराज सरकार के कामों से जनता परेशान थी जिससे शराब प्रेमियों में बढ़ोतरी हुई तो वहीं बीजेपी सरकार पर राजस्व के नाम लोगों की जान से खिलवाड़ के आरोप लगा रही है. शराब की ब्रिकी के बढ़ते आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं. उस अभियान पर जो शराबबंदी के लिए चलाया गया और उऩ सियासी बयानों पर जहां नेता लोगों से नशाबंदी की अपील तो करते हैं लेकिन उसके लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाते.

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First published: August 2, 2019, 12:46 PM IST
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