एक प्राइवेट कंपनी का ड्राइवर है करोड़ों रुपए की ज़मीन का मालिक !!

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्तियों का जो ख़ुलासा किया उसमें जबलपुर का एक ड्राइवर 7.7 करोड़ की ज़मीन का मालिक निकला. जांच जारी है.
आयकर विभाग ने बेनामी संपत्तियों का जो ख़ुलासा किया उसमें जबलपुर का एक ड्राइवर 7.7 करोड़ की ज़मीन का मालिक निकला. जांच जारी है.

आयकर विभाग ने बेनामी संपत्तियों का जो ख़ुलासा किया उसमें जबलपुर का एक ड्राइवर 7.7 करोड़ की ज़मीन का मालिक निकला. जांच जारी है.

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मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में आयकर की बेनामी यूनिट ने 325 बेनामी संपत्ति का ख़ुलासा किया है. इनमें कई दिलचस्प मामले भी हैं. जबलपुर में एक ड्राइवर के नाम 7.7 करोड़ की ज़मीन निकली. इस लिस्ट में बाक़ी नाम आईएएस अफसरों,नेता और कारोबारियों के हैं.

इन रसूखदारों ने दूसरों के नाम पर करोड़ों रुपए मूल्य की संपत्ति खरीदी है. आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति का सबसे रोचक मामला जबलपुर में पकड़ा. यहां एक ड्राइवर 7.7 करोड़ की ज़मीन का मालिक निकला. हालांकि इस ज़मीन का असली मालिक ड्राइवर नहीं बल्कि एक सूचीबद्ध कंपनी थी जिसमें वो काम करता था.
अपने कालेधन को किसी दूसरे फर्ज़ी व्यक्ति के नाम पर निवेश करने वालों में आईएएस अफसर, कारोबारी और टेक्नोक्रेट भी हैं. पूर्व आईएएस अफसर अरविंद जोशी, एमए खान एवं सेवकराम भारती और टेक्नोक्रेट पीके सरैया भी इस लिस्ट में हैं. कारोबारियों में संतोष रमतानी (सुरभि ग्रुप), पवन अहलूवालिया, एमवाय चौधरी, धीरू गौड़ (काल्पनिक नाम), भाटिया एनर्जी (छग), अजय सोनी और नितिन अग्रवाल (छग), मनीष हेमलता सरावगी और सुशील वासवानी जैसे नाम प्रमुख हैं.

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले सवा साल की छानबीन में इन बेनामी संपत्ति का पता चला. टैक्स चोरी और नंबर दो की संपत्ति निवेश के अलावा आदिवासियों की ज़मीन फर्ज़ी लोगों के नाम पर खरीदने की बात भी सामने आई है. ये सम्पत्तियां भोपाल, कटनी, सतना, ग्वालियर, जबलपुर, पन्ना और सीजी के रायगढ़ सहित दूसरे शहरों में मिली हैं. मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान, मुंबई और गुजरात का नंबर है.
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