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झाबुआ का रिजल्ट देख कमलनाथ सरकार को तेवर दिखाने वाले विधायकों के सुर पड़े ढीले

Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 28, 2019, 4:32 PM IST
झाबुआ का रिजल्ट देख कमलनाथ सरकार को तेवर दिखाने वाले विधायकों के सुर पड़े ढीले
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ और निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) की स्थिरता को लेकर पसरा असमंजस समाप्त होने लगा है. झाबुआ उपचुनाव (Jhabua by-election result) का परिणाम कांग्रेस (Congress) के पक्ष में आने के बाद सरकार को समर्थन के नाम पर तेवर दिखाने वाले विधायकों (Independent MLAs) के सुर बदल गए हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार (Kamalnath Government) ने सत्ता में 10 महीनों से ज्यादा का समय भले पूरा कर लिया हो, लेकिन इस दौरान सरकार ने विपक्ष (Opposition) के साथ-साथ 'सरकार-समर्थक विधायकों' के तेवर भी कम नहीं झेले हैं. जिन निर्दलीय विधायकों (Independent MLAs) ने कमलनाथ सरकार को बाहर से समर्थन दिया है, उनके बागी तेवरों से कांग्रेस (Congress) पार्टी बुरी तरह परेशान रही है. लेकिन अब जबकि झाबुआ विधानसभा उपचुनाव का परिणाम (Jhabua by-election result) कांग्रेस के पक्ष में आ गया है और विधानसभा में संख्याबल के मामले में भी पार्टी 'मजबूत' हो गई है, इन तेवरदार विधायकों के सुर ढीले पड़ने लगे हैं. अब तक सरकार को निशाना बनाने वाले विधायकों ने सरकार के साथ खड़े होने का दावा करना शुरू कर दिया है.

कांग्रेस का रुख- अब तेवर बर्दाश्त नहीं
झाबुआ उपचुनाव का रिजल्ट आते ही कांग्रेस के खाते में आई एक सीट के बाद विधानसभा में पार्टी का संख्याबल अब 115 हो गया है. वहीं एक निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को मंत्री बनाकर कांग्रेस ने बहुमत के लिए जरूरी 116 का आंकड़ा भी हासिल कर लिया है. यही वजह है कि अब तक सरकार को बाहर से समर्थन देते हुए भी जब-तब 'तेवर' दिखाने वाले विधायकों के सुर बदल गए हैं. अब तक मंत्री बनाने को लेकर सरकार पर दबाव बनाने वाले निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा है कि कांग्रेस को जरूरत के समय सभी सपा, बसपा और निर्दलीयों ने साथ दिया है. अब जबकि सरकार ने बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया है, तो उसे इन विधायकों के योगदान को नहीं भूलना चाहिए. ठाकुर का यह बयान आने के बाद भी कांग्रेस पार्टी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. सूत्र बताते हैं कि इस मामले में कांग्रेस खुलकर बोलने से बच रही है, लेकिन संकेत साफ है कि अब सरकार में विधायकों के बागी तेवर बर्दाश्त नहीं होंगे.

मध्य प्रदेश के विधि मंत्री पीसी शर्मा और भाजपा नेता उमाशंकर गुप्ता.


अस्थिरता के सवालों पर छायी खामोशी
झाबुआ उपचुनाव का परिणाम आने के साथ ही कमलनाथ सरकार की अस्थिरता को लेकर उठ रहे सवाल भी फिलहाल खामोश हो गए हैं. हालांकि बीजेपी के नेता उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि सरकार ने संख्याबल में आंकड़ा भले ही हासिल कर लिया हो, लेकिन कांग्रेसियों में आपसी मतभेदों से अस्थिरता बढ़ गई है. वहीं, राज्य के विधि मंत्री पीसी शर्मा ने कहा है कि कांग्रेस के पास 116 विधायकों का स्पष्ट बहुमत है. बसपा-सपा और निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी सरकार को हासिल रहेगा, सरकार पूरे पांच साल चलेगी.

एमपी का सियासी गणित
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2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 114, बीजेपी ने 109, बसपा ने 2, सपा ने 1 और निर्दलीयों ने 4 सीटों पर कब्जा जमाया था. विधानसभा में सरकार के लिए जरूरी बहुमत से कांग्रेस पार्टी सिर्फ 2 सीट दूर रही थी. इसके बाद लोकसभा चुनाव में झाबुआ विधानसभा से बीजेपी विधायक के सांसद निर्वाचित होने के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल कर अपने संख्याबल में एक सीट का इजाफा कर लिया. वहीं, एक निर्दलीय विधायक को मंत्री पद देकर बहुमत के लिए जरूरी 116 विधायकों का संख्याबल भी पूरा हो गया. इससे कांग्रेस ने जहां एक तरफ सियासी समीकरण को साध लिया है, वहीं दूसरी ओर तेवर दिखाने वाले विधायक भी शांत पड़ने लगे हैं.

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First published: October 28, 2019, 4:32 PM IST
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