सरकार गिरते ही इन विधायकों के बदल गए सुर : अब हाथ नहीं कमल का साथ पसंद है
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सरकार गिरते ही इन विधायकों के बदल गए सुर : अब हाथ नहीं कमल का साथ पसंद है
कमलनाथ सरकार गिरने के बाद निर्दलीय ने अपनी राय बदली

भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी के सुर बदले और फिर निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने कहा जनता से पूछकर फैसला करूंगा. इस्तीफे पर विवाद उठा तो भाजपा विधायक शरद कोल भी अब गोलमोल जवाब दे रहे हैं.

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भोपाल.मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में मु्ख्यमंत्री कमलनाथ (cm kamalnath) ने राज्यपाल को इस्तीफा क्या सौंपा.कांग्रेस सरकार (congress) का साथ देने वाले बीजेपी, सपा-बसपा और निर्दलीय भी  पाला बदलने लगे. कमलनाथ की प्रेस कांफ्रेस से कुछ देर पहले ही हवा का रुख बदलते देख निर्दलीय विधायक औऱ पूर्व मंत्री प्रदीप जयसवाल ने सबसे पहले पाला बदल लिया. उसके बाद भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी के सुर बदले और फिर निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने कहा जनता से पूछकर फैसला करूंगा. इस्तीफे पर विवाद उठा तो भाजपा विधायक शरद कोल भी अब गोलमोल जवाब दे रहे हैं.

सुर बदलने वाले विधायक प्रदीप जायसवाल
निर्दलीय विधायक प्रदीप जयसवाल ने कहा वो स्वतंत्र हैं.अब नई सरकार जो भी होगी उसके साथ रहूंगा.पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था.फिर निर्दलीय टिकट पर चुनाव लड़ा था. मैं जनता के विकास के लिए चुनकर आय़ा हूं. इसलिए जनता के विकास के लिए जो सरकार चुनकर आएगी उसके ही साथ रहूंगा. सियासी संकट के बीच ही प्रदीप जयसवाल ने अपने इरादे जता दिए थे.

उनका वो साथ देंगे
भाजपा के शरद कोल और नारायण त्रिपाठी वही विधायक हैं जिन्होंने जुलाई में कमलनाथ सरकार का साथ दिया था. दंड विधि संशोधन विधेयक पर इन दोनों ने पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर कांग्रेस के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी.नारायण त्रिपाठी लगातार भाजपा में रहते हुए कांग्रेस के संपर्क में थे.लेकिन जैसे ही कमलनाथ ने इस्तीफा दिया वैसे ही उन्होंने अपने सुर बदल लिए. नारायण त्रिपाठी ने कहा वो सिर्फ क्षेत्र के विकास के लिए ही मिलने जाते हैं और सबसे मिलते रहेंगे. उन्होंने कहा मैं भाजपा के साथ था, हूं और रहूंगा. शरद कोल विधायकी से इस्तीफा दे चुके हैं.स्पीकर ने उसे स्वीकार भी कर लिया. अब कोल कह रहे हैं कि उनसे दबाव में इस्तीफा लिखवाया गया है. वो अब भी भाजपा के साथ ही हैं.



निर्दलीय विधायक शेरा के बदले तेवर
बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा के तेवर भी बदल गए हैं. कांग्रेस से बगावत कर वो निर्दलीय चुनाव लड़े और जीते भी. कांग्रेस की सरकार बनी तो साथ दिया लेकिन नाक में दम किए रहे. अब वो किसका साथ देंगे, इसका संकेत उनका जवाब दे रहा है. शेरा कह रहे हैं कि उन्हें जनता ने चुनकर भेजा है. वो जो आदेश देगी वहीं मान्य होगा.शेरा मन तो भाजपा का साथ देने का बना चुके हैं,लेकिन सिर्फ जनता के बीच साख धूमिल ना हो इसीलिए गेंद जनता के पाले में डाल दी.

सपा-बसपा का झुकाव
बसपा विधायक रामबाई, संजीव शुक्ला और सपा विधायक बबलू शुक्ला के तेवर भी बदले हुए हैं.यानि सपा,बसपा औऱ निर्दलीय विधायकों का झुकाव कांग्रेस सरकार के जाते ही भाजपा की ओर दिख रहा है. लेकिन वो फिलहाल हवाला दे रहे हैं जनता और विकास कार्यो का.

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