भोपाल में रेमडेसिविर चोरी केस: सेंट्रल ड्रग स्टोर प्रभारी और चार कर्मचारी हटाए गए

पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है.

पुलिस की क्राइम ब्रांच मामले की जांच कर रही है.

Remdesiveer Injection Theft: मध्य प्रदेश के भोपाल के हमीदिया अस्पताल में रेमडेसिवीर इंजेक्शन चोरी होने के मामले में क्राइम ब्रांच की पूछताछ के बाद अब अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के भोपाल के हमीदिया अस्पताल में रेमडेसिवीर इंजेक्शन (Remdesiveer Injection) चोरी होने के मामले में क्राइम ब्रांच (Crime Branch) की पूछताछ के बाद अब उन अधिकारियों पर गाज गिरना शुरू हो गई है, जो इस पूरे इंजेक्शन कांड में शामिल है. हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक चौरसिया को हटाए जाने के बाद अब सेंट्रल ड्रग स्टोर प्रभारी डॉ. संजीव जयंत को हटाया गया है.

जांच के दायरे में आए संजीव जयंत के साथ तीन कर्मचारी आरपी कैथल, तुलसीराम पाटनकर और अलकेंद्र दुबे को हटाया गया है. इन सभी लोगों को संदिग्ध भूमिका की वजह से अस्पताल प्रबंधन ने हटाने का काम किया है. इनकी जगह पर दूसरे अधिकारी कर्मचारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई है.

क्राइम ब्रांच इन सभी लोगों से पूछताछ कर चुकी है. इस मामले में अभी तक किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया है. पुलिस इसे चोरी का नहीं बल्कि धांधली और बंदरबांट का मामला बता रही है. सेंट्रल ड्रग स्टोर से 863 इंजेक्शन चोरी होने पर 17 अप्रैल को एफ आई आर दर्ज हुई थी.

अस्पताल में हुई बड़ी धांधली
कोविड सेंटर के रिकॉर्ड का मिलान सेंट्रल स्टोर के स्टाफ से नहीं हो रहा है. यहां पर इंजेक्शन को लेकर बड़ी धांधली और हेराफेरी सामने आई है. सेंट्रल ड्रग स्टोर से 10 अप्रैल से 16 अप्रैल तक कोविड सेंटर की डिमांड पर 548 इंजेक्शन भेजे, लेकिन कोविड सेंटर के स्टोर से इंचार्ज को मरीजों के लिए 458 इंजेक्शन ही मिले. जबकि नर्सिंग स्टाफ ने रिकॉर्ड में स्टोर से 850 इंजेक्शन भेजे जाने की बात कही है. ऐसे में हमीदिया अस्पताल के सेंटर ड्रग स्टोर और डी ब्लॉग के कोविड सेंटर के बीच रेमडेसीविर इंजेक्शन की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. चोरी के पीछे अस्पताल के स्टाफ पर पुलिस को शक है.
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