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अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर भोपाल के इस इंसान को किया गया सम्मानित

अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर भोपाल के इस इंसान को किया गया सम्मानित

कहते हैं हौसला बुलंद हो तो इंसान की इच्छाएं कभी ना कभी जरूर पूरी हो ही जाती है। भोपाल के डॉ. रोहित त्रिवेदी एक ऐसे ही इंसान हैं जो देख तो नहीं सकते मगर जिंदगी से एक बड़ी जंग जीत कर आज वो नेत्रहीनों के अंग्रेजी के एक सफल प्रोफेसर।

कहते हैं हौसला बुलंद हो तो इंसान की इच्छाएं कभी ना कभी जरूर पूरी हो ही जाती है। भोपाल के डॉ. रोहित त्रिवेदी एक ऐसे ही इंसान हैं जो देख तो नहीं सकते मगर जिंदगी से एक बड़ी जंग जीत कर आज वो नेत्रहीनों के अंग्रेजी के एक सफल प्रोफेसर।

कहते हैं हौसला बुलंद हो तो इंसान की इच्छाएं कभी ना कभी जरूर पूरी हो ही जाती है। भोपाल के डॉ. रोहित त्रिवेदी एक ऐसे ही इंसान हैं जो देख तो नहीं सकते मगर जिंदगी से एक बड़ी जंग जीत कर आज वो नेत्रहीनों के अंग्रेजी के एक सफल प्रोफेसर।

  • News18
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    कहते हैं हौसला बुलंद हो तो इंसान की इच्छाएं कभी ना कभी जरूर पूरी हो ही जाती है। भोपाल के डॉ. रोहित त्रिवेदी एक ऐसे ही इंसान हैं जो देख तो नहीं सकते मगर जिंदगी से एक बड़ी जंग जीत कर आज वो नेत्रहीनों के अंग्रेजी के एक सफल प्रोफेसर।

    अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस के अवसर पर डॉ. त्रिवेदी को विकलांग व्यक्तियों की श्रेणी में रोल मॉडल के रूप में सम्मानित किया गया है। गौरतलब है कि डॉ. त्रिवेदी को यह सम्मान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिया गया है।

    त्रिवेदी ने अपनी पढ़ाई 970-1980 के उस दौर में पूरी की जब शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए वर्तमान जैसी व्यवस्था नहीं हुआ करती थी। त्रिवेदी भोपाल के एक एनजीओ आरोषि के लिए सरोजिनी नायडू गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज (नूतन) में ऐसे विद्याथिर्यों को शिक्षा देते हैं जो शारीरिक रूप से विकलांग हैं।

    त्रिवेदी बताते हैं, उन्होंने कभी भी पढ़ाई के सात समझौता नहीं दिया। उनके परिवार वालों ने भी उनका पूरा सहयोग दिया। यहां तक कि त्रिवेदी के लिए उनके घरवालों एक टेप-रिकॉर्डर ला कर दिया, जो त्रिवेदी के लिए काफी लाभदायक बना।

    उन्होंने बताया कि उस दौर में रिकॉर्डिंग के लिए 50-60 रुपए की कैसेट को खरिदना एक मध्य वर्गीय परिवार के लिए काफी मुश्किल वाली बात थी, इसलिए वो एक ही कैसेट से काम चलाया करते थे। जिस रिकॉर्डिंग का काम पूरा हो जाता था वो उस रिकॉर्डिंग को कैसेट से डिलीट करते और फिर नया रिकॉर्डिंग करते थें।

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