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MCU में इस तरह चला नियुक्तियों का दौर, अब सब जांच के दायरे में

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 3, 2019, 8:07 PM IST
MCU में इस तरह चला नियुक्तियों का दौर, अब सब जांच के दायरे में
माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी

मामले की जांच तेज़ होने के साथ आरोपियों के दिल की धड़कनें भी तेज़ हो गई हैं.शासन की रिपोर्ट में आने वाले तथ्य सही साबित हुए, तो आरोपियों की मुश्किल बढ़ना तय माना जा रहा है

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भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता और संचार विश्वविद्यालय में हुए काम अब जांच के दायरे में हैं. इनमें सबसे बड़ा मामला नियुक्तियों में गड़बड़ी का है. विश्व विद्यालय में हुई दर्जन भर नियुक्तियां जांच के दायरे में हैं. आरोप लगा है तत्कालीन कुलपति बृजकिशोर कुठियाला पर.

ये हैं आरोप...
बृजकिशोर कुठियाला-19 जनवरी 2010 को निुयुक्ति. 8 साल 3 महीने के कार्यकाल में संघ से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाने का आरोप.विश्वविद्यालय के खर्च पर पत्नी सहित लंदन की यात्रा की.इस राशि को 5 महीने बाद एडजस्ट किया गया.विवि के खर्च पर 13 ऐसे टूर पर गए जिसमें प्रशासनिक और वित्तीय नियमों का सीधे तौर पर उल्लंघन किया गया.गॉलब्लेडर सर्जरी के लिए 58,150 रुपए, आंख के ऑपरेशन के लिए 1,69,467 रुपए का भुगतान भी विवि से लिया.विवि में अनाधिकृत तौर पर लैपटॉप, आई-फोन खरीदे गए.विवि के पैसे से महंगी शराब खरीदने का आरोप भी लगा.
-डॉ अनुराग सीठा- विवि के कम्प्यूटर विभाग में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ हैं.नौकरी के दौरान एमसीए का नियमित कोर्स किया. फर्जी तरीके से नियुक्ति पाने का आरोप.

-डॉ पी शशिकला- न्यू मीडिया विभाग में प्रोफेसर.कुठियाला के समय 3 प्रमोशन मिले.
-डॉ पवित्र श्रीवास्तव-वर्तमान में जनसंपर्क और प्रबंधन विभाग के विभागाध्यक्ष. कुठियाला के कार्यकाल में प्रोफेसर बनाया गया.
-डॉ अविनाश वाजपेयी - प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर और प्लेसमेंट अधिकारी थे.पर्यावरण में पीएचडी और प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष बना दिए गए.
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-डॉ अरुण कुमार भगत- संघ से जुड़े हुए थे.इन्हें अभी हाल में भोपाल कैंपस लाया गया था, लेकिन ये यहां नहीं रह सके.र दो साल के लिए दिल्ली चले गए.
-प्रो संजय द्विवेदी- जनसंचार विभाग में प्रोफेसर,रजिस्ट्रार और अध्यक्ष पद से हटाया गया. बिना पीएचडी किए प्रोफेसर बने.
-डॉ मोनिका वर्मा- नोएडा कैम्पस भेज दिया गया.कम एक्सपीरियंस के बावजूद रीडर बनाया...इसके बाद प्रोफेसर बना दिया गया.
-डॉ कंचन भाटिया- वर्तमान में प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर हैं.इनकी एपीआई कम्पलीट नहीं है.कुठियाला के राज में धांधली कर नियुक्ति की.
-डॉ मनोज कुमार पचारिया- वर्तमान में कम्प्यूटर विभाग में प्रोफेसर.इनकी एपीआई कम्पलीट नहीं है.धांधली कर नियुक्ति की.
-डॉ आरती सारंग- भाजपा विधायक विश्वास सारंग की बहन हैं.विवि में लाइब्रेरियन.आरोप है एपीआई कम्पलीट ना होने के बावजूद इन्हें प्रोफेसर का रैंक दे दिया गया है.
डॉ रंजन सिंह- अभी पत्रकारिता विभाग में हैं.इनकी नियुक्ति आरक्षण के तहत की गई थी, जबकि मप्र से बाहर वालों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. इनके खिलाफ कोर्ट में केस है.

ये भी पढ़ें-माखनलाल यूनिवर्सिटी घोटाले की जांच तेज़, EOW ने मांगे सबूत

-सुरेन्द्र पाल- तबादला नोएडा कैंपस में कर दिया गया है. प्रोफेसर मोनिका वर्मा के पति हैं. इन पर भी आरक्षण का लाभ लेकर फर्जी तरीके से नियुक्ति लेने का आरोप है.मप्र के बाहर के हैं.
डॉ सौरभ मालवीय- पत्रकारिता विभाग में सहायक प्राध्यापक.कुठियाला के करीबी.कुठियाला ने इन्हें तीन बार नियुक्ति दी.इनकी नियुक्ति सबसे विवादित रही.
-सूर्य प्रकाश- की नियुक्ति में आरक्षण का लाभ दिया गया है, जबकि ये मप्र के बाहर के निवासी हैं.फिलहाल नोएडा कैम्पस में नियुक्त.
-प्रदीप कुमार डेहरिया- जनसंचार विभाग में सहायक प्राध्यापक.कंप्यूटर ऑपरेटर से शिक्षक के पद पर 2014 में नियुक्ति.विवि में काम करते हुए पत्रकारिता की नियमित डिग्री ली.
-सतेन्द्र कुमार डहरिया- पत्रकारिता विभाग में सहायक प्राध्यापक.बिना स्टडी लीव लिए विवि में लैब इंस्ट्रक्टर रहते हुए 2005 से 2007 के बीच जगत पाठक इंस्ट्टियूट से पत्रकारिता की डिग्री ली.
-गजेन्द्र सिंह अवश्या- जनसंपर्क विभाग में सहायक प्राध्यापक.डिग्री नौकरी के दौरान ली गई.2013 में प्रोड्यूसर के पद पर नियुक्ति, 2014 में सहायक प्राध्यापक बन गए.
डॉ कपिल राज चंदोरिया- वर्तमान में प्रबंधन विभाग में सहायक प्राध्यापक.डिग्री पर विवाद उठने के बाद कोर्ट में केस.
रजनी नागपाल- नोएडा परिसर में रीडर हैं.पत्रकारिता की डिग्री न होते हुए भी इन्हें नियुक्ति दी गई.
मामले की जांच तेज़ होने के साथ आरोपियों के दिल की धड़कनें भी तेज़ हो गई हैं.शासन की रिपोर्ट में आने वाले तथ्य सही साबित हुए, तो आरोपियों की मुश्किल बढ़ना तय माना जा रहा है.

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First published: May 3, 2019, 8:07 PM IST
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