ANALYSIS: क्या सिंधिया अध्यक्ष पद की दावेदारी से बाहर हो गए हैं !

कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मजबूत दावेदारी में है, इसी बीच कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे पर उनका ट्वीट सुर्खियों में है.

Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 8, 2019, 1:58 PM IST
ANALYSIS: क्या सिंधिया अध्यक्ष पद की दावेदारी से बाहर हो गए हैं !
क्या सिंधिया अध्यक्ष पद की दावेदारी से बाहर हो गए हैं
Jayshree Pingle | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 8, 2019, 1:58 PM IST
कांग्रेस अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया मजबूत दावेदारी में है, इसी बीच कश्मीर में आर्टिकल 370 हटाने के मुद्दे पर उनका ट्वीट सुर्खियों में है. जिसमे वे पार्टी लाइन से अलग होते हुए अपना स्टेंड रख रहे हैं. उन्होंने इसे देश को एकजुट रखने वाला कदम बताते हुए मोदी सरकार का समर्थन कर दिया है. क्या यह किसी भविष्य की राजनीति का संकेत है?

असमंजस में कांग्रेस

राजनीतिक हलकों में इसके अलग अलग मायने खोजे जा रहे हैं. क्या इस तरह का ट्वीट कर सिंधिया कांग्रेस अध्यक्ष पद की दावेदारी से बाहर हो गए हैं ? कांग्रेस के अंदरूनी खेमे का मानना है गांधी परिवार के करीबी सिंधिया के खिलाफ यह बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है. कांग्रेस कश्मीर के मुद्दे पर असमंजस में घिरी रही. राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद का स्टेंड कांग्रेस का स्टेंड बन गया. जिस कारण देश की जनभावना और कांग्रेस अलग अलग दिखाई दी. सिंधिया ने माहौल को भांपा और खुद को देश के जनमानस के साथ जोड़ते हुए अपनी राय जाहिर की. यह उनकी दृढ़ नेतृत्व की क्षमता को भी बताता है.

कश्मीर के मुद्दे पर असमंजस में घिरी कांग्रेस (फाइल फोटो: गुलाम नबी आजाद)
कश्मीर के मुद्दे पर असमंजस में घिरी कांग्रेस (फाइल फोटो: गुलाम नबी आजाद)


व्यक्तिगत राजनीति

सिंधिया 2019 का चुनाव अपनी परंपरागत गुना-शिवपुरी सीट से हार चुके हैं. उनके लिए बड़ा राजनीतिक संकट अपने क्षेत्र की जनता का फिर से समर्थन हासिल करना है. इस वक्त उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा अपनी व्यक्तिगत राजनीति को मजबूती देना है. आर्टिकल 370 के मुद्दे पर वे कांग्रेस के ढुलमुल और दिशाहीन रवैये के साथ रहकर अपनी व्यक्तिगत राजनीति को नुकसान नहीं पहुंचा सकते.

सिंधिया की उपेक्षा
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राहुल गांधी के करीबी होने के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं बन पाए मुख्यमंत्री (फाइल फोटो)
राहुल गांधी के करीबी होने के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया नहीं बन पाए मुख्यमंत्री (फाइल फोटो)


सिंधिया के करीबी समर्थकों का यह भी मानना है कि कांग्रेस में उनकी हर बार उपेक्षा हुई है. मध्यप्रदेश के 2018 के चुनाव में वे पार्टी के स्टार केंपेनर रहे. उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कमलनाथ को मुख्यमंत्री बनाया गया. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उन्हें अपना मित्र बताते रहे लेकिन उन्हें सत्ता में काबिज नहीं करवा पाएं. भारी कशमकश चलती रही.  सत्ता का संतुलन बना रहे इसलिए लोकसभा चुनाव से पहले सिंधिया उत्तर प्रदेश के प्रभारी बना दिए गए.

मध्यप्रदेश के 2018 के चुनाव में पार्टी के स्टार केंपेनर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)
मध्यप्रदेश के 2018 के चुनाव में पार्टी के स्टार केंपेनर रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया (फाइल फोटो)


समर्थन में आवाजें 

अपने मजबूत गढ़ से 2019 का चुनाव हारना  सिंधिया की राजनीति को तगड़ा झटका है. अब वे मध्यप्रदेश में और जनता के बीच अपनी जमीन मजबूत करने में हैं. कमलनाथ सरकार में अपने समर्थक मंत्रियों उनका शक्ति प्रदर्शन दिखाई देने लगा है. कभी  उन्हें मुख्यमंत्री बनाने, कभी कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की आवाजें उठ रही हैं.

भाजपा की नजर

इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कांग्रेस में उपेक्षित सिंधिया पर भाजपा भी अपनी नजरें रखे हुए है. सिंधिया घराने के विजयराजे सिंधिया ने  प्रदेश  में जनसंघ और भाजपा के गढ़ को मजबूत किया है. भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि सिंधिया परिवार तो मूलत भाजपा से जुड़ा रहा है. सीनियर सिंधिया के कांग्रेस में जाने के बाद अलग राजनीतिक लाइन शुरू हुई है.

यह देश की मांग है

कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी सिंधिया के स्टेंड का समर्थन करते हैं. यह देश को एकजुट करने वाला फैसला है. वे सिंधिया की बात को ही आगे बढ़ाते हैं कि 70 वर्ष पहले यह देश काल और परिस्थिति की मांग थी. अब यह वैसा ही फैसला है जैसे हमारे सं‌विधान में समय समय पर कई संशोधन हुए हैं.

स्वच्छ छवि के नेता

भाजपा नेता के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री गोविंद मालू कहते हैं कि सिंधिया एक सुलझे हुए स्वच्छ छवि के नेता हैं. वे जनभावना और मोदी सरकार के जन हितैषी कार्यों को समझते हैं. इसलिए आर्टिकल 370 का समर्थन कर रहे हैं. इस पूरे मामले साबित कर दिया है कि सिंधिया जैसे नेताओं की कांग्रेस में कोई पूछ परख नहीं है.

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First published: August 8, 2019, 1:38 PM IST
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