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MP: पत्रकार ने RTI के जरिए पूछा एक सवाल, बदले में मिले 360 जवाब

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 13, 2019, 5:35 PM IST
MP: पत्रकार ने RTI के जरिए पूछा एक सवाल, बदले में मिले 360 जवाब
प्रतीकात्मक तस्वीर.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता ने सूचना का अधिकार (Right to Information) कानून के तहत डाक विभाग (Postal Department) में ऑनलाइन आवेदन देकर मांगी थी जानकारी. आवेदन के 5 दिन बाद से ही उन्हें हर रोज डाक के जरिए भेजा जाने लगा जवाब.

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भोपाल. सूचना का अधिकार (Right to Information) कानून का इस्तेमाल करना मध्य प्रदेश के एक सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार के लिए जी का जंजाल बन गया. जितेंद्र सुराना नाम के पत्रकार ने ऑनलाइन आरटीआई (RTI) आवेदन देकर डाक विभाग से उसके परिसर और हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के बारे में जानकारी मांगी थी. 7 अगस्त 2019 को भेजे गए इस एक सवाल के जवाब में सुराना को अब तक 360 से ज्यादा जवाब मिल चुके हैं. विभाग द्वारा भेजे गए जवाब का अंबार लगने पर सुराना ने विरोध जताया है. उन्होंने इसे विभाग का गैरजिम्मेदाराना रुख बताते हुए कहा है कि जब ऑनलाइन जानकारी मांगी गई, तो फिर डाक के जरिए ये जवाब क्यों दिए जा रहे हैं.

अचल संपत्ति की जानकारी मांगी
जितेंद्र सुराना ने डाक विभाग को जो RTI आवेदन दिया था, उसमें उन्होंने विभाग की अचल संपत्तियों का मार्केट रेट और आधिकारिक कीमत की जानकारी मांगी थी. उन्होंने बताया कि विभाग ने इस संबंध में चीफ पोस्टमास्टर और प्रदेश के सभी पोस्टमास्टर जनरल से इस संबंध में जानकारी मांगी. आवेदन करने के 3-4 दिन के बाद से ही सुराना को जवाब भेजे जाने लगे. उन्होंने बताया कि 13 अगस्त को पहला जवाब आया, जिसके बाद हर दिन पत्र आने शुरू हो गए. सुराना ने बताया कि हर दिन औसतन 10 पत्र उन्हें मिले हैं. किसी दिन 5 पत्र तो किसी-किसी दिन यह संख्या 22 तक भी पहुंच गई. उन्होंने कहा कि अब तक इन जवाबों की संख्या 360 तक पहुंच चुकी है.

लापरवाह रुख का विरोध

सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सुराना ने डाक विभाग द्वारा हर दिन उनके सवाल का जवाब भेजे जाने को लेकर विरोध जताया है. सुराना ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि डाक विभाग के सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे मांगी गई जानकारी का जवाब अपने वरिष्ठ पदाधिकारियों को दें. उसके बाद विभाग समेकित जवाब आवेदक को उपलब्ध कराए. अलग-अलग अधिकारियों द्वारा सभी जवाब मुझे भेजना गलत है. डाक विभाग से लगातार भेजे जा रहे पत्र मेरे लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं. इसके अलावा अगर जानकारी ऑनलाइन मांगी गई है, तो इसका जवाब भी ऑनलाइन ही आना चाहिए, न कि पत्रों द्वारा.

जवाब पर भी उठाए सवाल
जितेंद्र सुराना को डाक विभाग के विभिन्न कार्यालयों से जो जवाब भेजे गए हैं, उन्होंने उस पर भी सवाल उठाया है. सुराना ने बताया कि अभी तक प्रदेश के सिर्फ 25 से 30 जिलों के डिविजनल कार्यालयों से ही डाक विभाग की अचल संपत्ति की जानकारी दी गई है. इसमें भी आधी-अधूरी जानकारी ही है. उदाहरण के तौर पर प्रदेश के दक्षिणी इलाके के एक डिविजनल पोस्टऑफिस ने वर्ष 1870 की आधिकारिक कीमत का विवरण भेजा है, जबकि सुराना ने वर्तमान दर से जुड़ी जानकारी मांगी थी. उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार कानून का जो मकसद है, कई सरकारी विभाग अभी तक उसे समझ नहीं पाए हैं. इसलिए ऐसी गलतियां हो रही हैं, जिसका खामियाजा सूचना मांगने वाले व्यक्ति को उठाना पड़ता है.
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First published: October 13, 2019, 5:35 PM IST
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