जूनियर डॉक्टर Vs एमपी सरकार : JUDA की मांगें कितनी जायज, सरकार का पक्ष कितना तार्किक

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर अब भी हड़ताल पर हैं. कल लगभग 3000 डॉक्टरों ने सामूहिक इस्तीफा सरकार को सौंप दिया था. आइए आपको बताते हैं कि जूनियर डॉक्टरों की मांगें क्या हैं और उन पर क्या है सरकार का पक्ष.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JUDA) और सरकार के बीच ठन गई है. एक तरफ जहां हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर पीछे हटने के मूड में नहीं हैं, तो वहीं सरकार ने भी साफ कर दिया है कि कोरोना महामारी के वक्त में जूनियर डॉक्टर का इस तरह काम बंद करना उचित नहीं है. आखिर जूनियर डॉक्टरों की क्या है मांग और उन मांगों पर सरकार का क्या है तर्क? क्या वाकई में जूनियर डॉक्टर की मांगें जायज हैं? आइए आपको बताते हैं कि क्या हैं जूनियर डॉक्टर की मांगें और उन पर क्या है सरकार का पक्ष.

कोर्ट ने कहा था : 24 घंटे के भीतर काम पर लौटे जूनियर डॉक्टर

इससे पहले आपको बताते चलें कि गुरुवार को इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी. हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल की निंदा की. कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया और तत्काल हड़ताल वापस लेने का आदेश दिया था. हाईकोर्ट ने कहा था कि कोरोना महामारी के दौरान जब डॉक्टरों की सबसे ज्यादा जरूरत है, ऐसे नाजुक हालात में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल उचित नहीं ठहराई जा सकती. हाईकोर्ट ने कहा कि 24 घंटे के भीतर अगर जूनियर डॉक्टर अपने काम पर नहीं लौटते हैं तो सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि जूनियर डॉक्टर की अधिकतम मांगें सरकार ने मंजूर कर ली हैं, बावजूद डॉक्टर हड़ताल पर हैं.

जूडा की पहली मांग : स्टाइपेंड में 24% बढ़ोत्तरी की जाए. सरकार का तर्क : सरकार द्वारा अन्य विभागों की तरह सीपीआई के अनुसार जूनियर डॉक्टर्स के स्टाइपेंड में 17% की वृद्धि मान्य की गई है. जूनियर डॉक्टर्स की 24% की स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग अनुचित है. कोविड ड्यूटी करने के कारण अतिरिक्त पारितोषिक व वजीफे की मांग युद्ध के समय युद्धरत सैनिकों द्वारा वित्तीय मांग किया जाने जैसा है.
जूडा की दूसरी मांग : हर साल वार्षिक 6% की बढ़ोत्तरी भी बेसिक स्टाइपेंड पर दी जाए. सरकार का तर्क : प्राइस इंडेक्स के तहत बढ़ोत्तरी दी जाएगी, जैसा शासन के अन्य विभाग के लिए होता है.
जूडा की तीसरी मांग : पीजी करने के बाद 1 साल के ग्रामीण बॉन्ड को कोविड ड्यूटी के बदले हटाने के लिए एक कमेटी बनाई जाए, जो इस पर विचार करके अपना फैसला जल्द से जल्द सुनाए. सरकार का तर्क : इस मांग पर यदि शासन सहमत होता है तो ग्रामीण अंचल के गरीब व्यक्तियों को बेहतर चिकित्सीय सेवा से वंचित होना होगा.
जूडा की चौथी मांग : कोविड ड्यूटी में काम कर रहे जूनियर डॉक्टर को 10 नंबर का एक गजटेड सर्टिफिकेट मिले जो आगे उनको सरकारी नौकरी में फायदा दे. सरकार का तर्क : भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार अल्पावधि के कोविड कार्य करने हेतु व्यक्तियों को आकर्षित करने के लिए दिशा निर्देश दिए गए थे. कोविड अथवा अन्य महामारी में सेवाएं दिया जाना किसी भी शासकीय चिकित्सक का मूल कर्त्तव्य है. जिसके लिए अतिरिक्त पारितोषिक और वजीफे की मांग किया जाना उचित नहीं होगा. अपने मूल कार्यों के एवज में यदि सभी विभाग अतिरिक्त सुविधा की मांग करें तो शासन कार्य कैसे कर पाएगा? अन्य विभाग जो कोविड में अतिआवश्यक सेवाओं में आते हैं, उनमें किसी भी कर्मचारी/अधिकारी को किसी भी प्रकार का लाभ नहीं दिया जा रहा है.
जूडा की पांचवीं मांग :कोविड में काम कर रहे सभी जूनियर डॉक्टर और उनके परिवार के लिए अस्पताल में अलग से एक एरिया और बेड रिजर्व किया जाए और उनके उपचार को प्राथमिकता दी जाए. उनका सारा इलाज फ्री ऑफ कॉस्ट कराया जाए. सरकार का तर्क : चिकित्सकों के लिए 10% कोविड बिस्तर आरक्षित किए जाने का पत्र जारी किया जा चुका है. लेकिम उनके परिजनों को आम नागरिकों की तरह सुविधा उपलब्ध है.
जूडा की छठी मांग : जितने जूनियर डॉक्टर कोविड ड्यूटी में कार्यरत हैं, उनका अधिक कार्यभार देखते हुए उन्हें उचित सुरक्षा मुहैया कराई जाए. सरकार का तर्क : सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के स्वशासी समिति के अध्यक्ष, संभागायुक्त होते हैं. जिनके तहत संभाग में सुरक्षा एवं कानून व्यवस्थाएं संचालित होती हैं. समस्त चिकित्सा महाविद्यालयों में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी स्थापित करने का निर्देश जारी किया जा चुका है.
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