जूडा हड़ताल: हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी झुकने को तैयार नहीं हड़ताली डॉक्टर

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स अपनी मांगो पर अड़ गए हैं. वे किसी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं.

मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर्स अपनी मांगो पर अड़ गए हैं. वे किसी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं.

जूडा हड़ताल: हाई कोर्ट के आदेश के बाद डॉक्टरों ने इस्तीफे दे दिए थे. वे शुक्रवार को भी हड़ताल खत्म करने को तैयार नहीं हैं. प्रदेश में कोरोना और ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज इन लोगों ने बंद कर दिया है.

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भोपाल. जबलपुर हाई कोर्ट और मध्य प्रदेश सरकार के आदेश के बावजूद जूनियर डॉक्टर्स काम पर लौटने को तैयार नहीं हैं. हड़ताली डॉक्‍टरों ने शुक्रवार को भी सुबह प्रदेश में प्रदर्शन किया और अपनी मांगें दोहराईं. राजधानी भोपाल में जूडा मेंबर्स गांधी मेडिकल कॉलेज के बाहर निकले और सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए.

गौरतलब है गुरुवार को जबलपुर हाई कोर्ट ने जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को अवैध करार दिया था. जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी से जुड़े भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और रीवा के मेडिकल कॉलेजों के पीजी के फाइनल ईयर के 468 स्टूडेंट्स के नामांकन कैंसिल (बर्खास्त) कर दिए गए थे. इस कार्रवाई के विरोध में जूडा भड़क गया और तीन हजार मेडिकल स्टूडेंट्स ने इस्तीफे दे दिए. इधर, जूडा ने मेडिकल से जुड़े दूसरे संघ का समर्थन होने का भी दावा किया है. इनका दावा है कि दूसरे राज्यों के डॉक्टर भी समर्थन में हैं.

जबलपुर हाईकाेर्ट ने 24 घंटे में काम पर लौटने के आदेश दिये 


मध्य प्रदेश में अपनी 6 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 4 दिनों से हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टर्स को जबलपुर हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाई कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए जूनियर डॉक्टर्स की हड़ताल की निंदा करते हुए इसे असंवैधानिक बताया और तत्काल हड़ताल को वापस लेने के आदेश दिए हैं. जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पर पहले से लंबित एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया.


नाजुक मौके पर हड़ताल उचित नहीं : HC


हाईकोर्ट ने कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान जब डॉक्टरों की सबसे ज्यादा जरूरत है ऐसे नाजुक हालातों में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल को उचित नहीं ठहराया जा सकता. हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 24 घंटे के भीतर अगर जूनियर डॉक्टर अपने काम पर वापस नहीं लौटते हैं तो सरकार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में कहा गया कि जूनियर डॉक्टर की अधिकतम मांगों को सरकार ने मंजूर कर लिया है, उसके बावजूद भी डॉक्टर हड़ताल कर रहे हैं.


सरकार की भी दो टूक



सरकार ने डॉक्टरों को दो टूक कह दिया है कि हमने इनकी मांग मान ली है और स्टायपेंड 17 से बढ़ाकर 70 हजार कर दिया है. इसके बावजूद जिस समय मानवता को इनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, उस वक्त ये हड़ताल कर रहे हैं. ये ठीक नहीं.

जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल के चौथे दिन भी कोरोना के साथ ब्लैक फंगस, जनरल ओपीडी, इमरजेंसी सेवाओं को बंद कर रखा. इस हड़ताल पर सरकार और जूनियर डॉक्टर्स के बीच तकरार बनी हुई है. जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) अपनी मांगों का लिखित आदेश जारी करने की बात को लेकर अड़े हैं. जबकि सरकार ने कहा कि उनकी मांगों को मान लिया गया है.

हर साल 6 फीसदी की दर से बढ़ाया स्टायपेंड- मंत्री


चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने गुरुवार को दो टूक कहा कि जूडा की मांगों को मान लिया है. 17 हज़ार से 70 हज़ार तक स्टायपेंड कर दिया है. ट्रेनिंग में इतना पैसा दिया जा रहा है. यह उनकी सैलरी नहीं. जब पीड़ित मानवता को सबसे ज़्यादा ज़रूरत है उस समय हड़ताल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हर साल 6 प्रतिशत की दर से डॉक्टरों का स्टायपेंड बढ़ाया है. 6 में से 4 मांगे मांग ली है.

सरकार डॉक्टरों के खिलाफ नहीं- सारंग

मंत्री सारंग ने कहा कि हम जूडा पर कार्रवाई नहीं करना चाहते. हम कल्याण करना चाहते हैं. कानून में बहुत सारे प्रावधान हैं लेकिन सरकार कोई इस तरह का कदम उठाना नहीं चाहती. यह डॉक्टर्स देश दुनिया में काम करेंगे. मरीज़ों को अगर तकलीफ होगी तो फिर हम कार्रवाई करेंगे. ऐसे समय विपक्ष के नेता मरीज़ों के खिलाफ खड़े हो जाते हैं.

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