MP में Corona मरीजों की परेशानी और बढ़ी, जूनियर डॉक्टरों ने बंद किया काम

मध्य प्रदेश में मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. मंत्री ने इसे ब्लैकमेलिंग बताया.

मध्य प्रदेश में मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. मंत्री ने इसे ब्लैकमेलिंग बताया.

जूनियर डॉक्टरों की वजह से प्रदेश में कोरोना मरीजों की परेशानी बढ़ गई है. जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल के दौरान कोरोना का इलाज भी बंद कर दिया है. मंत्री विश्वास सारंग ने इस ब्लैकमेलिंग बताया है.

  • Last Updated: June 1, 2021, 4:15 PM IST
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भोपाल. मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टर की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी है. जूनियर डॉक्टरों ने मंगलवार को कोरोना का इलाज भी बंद कर दिया. सोमवार को जनरल ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को बंद कर दिया था. जूडा की इस हड़ताल को चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने ब्लैकमेल करना बताया है.

प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने जूडा की हड़ताल को गलत करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है और जल्द ही उनकी मांगों को मान भी लिया जाएगा. लेकिन, इसके बावजूद भी जूडा हड़ताल पर है. उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर्स का इस तरह से हड़ताल करना मरीजों को ब्लैकमेल करने जैसा है. हमने कई योजनाओं से जूडा को जोड़ा है.

यह ठीक नहीं - मंत्री सारंग

मंत्री ने कहा कि भविष्य में इन्हें ही मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को संभालना है. यह हठधर्मिता ठीक नहीं. प्रदेश के मेडिकल कॉलेज के करीबन 2500 जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं. सरकार ने उनकी कई मांगों को मान लिया है. लेकिन जूडा इस बात को लेकर अड़े हैं कि उनकी मांगों को लेकर लिखित में आदेश जारी किया जाए.
हठधर्मिता कर रहे जूनियर डॉक्टर

मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस समय समाज को सबसे ज्यादा डॉक्टरों की जरूरत है, उस समय जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर जा रहे हैं. सरकार ने उनकी मांगें मानी हैं. उन्हें प्रति माह 60 हजार रुपए से लेकर 70 हजार रुपए तक का स्टाइपेंड दिया जा रहा है. उनकी 6 मांगों में से 4 मांगों को मान भी लिया गया है.

सारंग ने कहा कि मैंने निवेदन किया है वह जल्द से जल्द काम पर वापस आएं और यदि नहीं आते हैं तो मजबूरन हमें निश्चित रूप से कार्रवाई करनी पड़ेगी. उन्होंने कहा मरीजों के साथ यदि नाइंसाफी होगी तो यह सहन करना मुश्किल होगा.



ये हैं जूडा की मांगें

-मानदेय में बढ़ोतरी कर इसे 55 हजार, 57 हजार, 59 हजार से बढ़ाकर 68200, 70680, और 73160 किया जाए.

-मानदेय में हर साल 6 फीसद की बढ़ोतरी की जाए.

-कोविड ड्यूटी को एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा मानकर बांड से मुक्त किया जाए.

-कोविड में काम करने वाले डॉक्टरों व उनके स्वजन के लिए अस्पताल में इलाज की अलग व्यवस्था हो.

-कोविड ड्यूटी में काम करने वाले डॉक्टरों को सरकारी नियुक्ति में 10 फीसद अतिरिक्त अंक दिए जाएं.

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