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महज 720 रुपए के लिए बर्बाद हो गया दो छात्राओं का भविष्य

महज 720 रुपए के लिए बर्बाद हो गया दो छात्राओं का भविष्य

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामा के नाम से मशहूर हैं लेकिन मामा मुख्यमंत्री की दो भांजियों को राजधानी भोपाल के एक निजी स्कूल में महज़ दो महीने की फीस जमा नहीं होने पर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. इन बच्चियों का साल खराब हो गया है और अब ये बच्चियां अब ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं.

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामा के नाम से मशहूर हैं लेकिन मामा मुख्यमंत्री की दो भांजियों को राजधानी भोपाल के एक निजी स्कूल में महज़ दो महीने की फीस जमा नहीं होने पर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. इन बच्चियों का साल खराब हो गया है और अब ये बच्चियां अब ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं.

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामा के नाम से मशहूर हैं लेकिन मामा मुख्यमंत्री की दो भांजियों को राजधानी भोपाल के एक निजी स्कूल में महज़ दो महीने की फीस जमा नहीं होने पर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. इन बच्चियों का साल खराब हो गया है और अब ये बच्चियां अब ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं.

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प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मामा के नाम से मशहूर हैं लेकिन मामा मुख्यमंत्री की दो भांजियों को राजधानी भोपाल के एक निजी स्कूल में महज़ दो महीने की फीस जमा नहीं होने पर परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया. इन बच्चियों का साल खराब हो गया है और अब ये बच्चियां अब ज़िला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के चक्कर काट रही हैं.

मध्यप्रदेश सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने के तमाम प्रयास कर रही है. शिवराज सिंह चौहान इन बालिकाओं को स्कूल तक लाने के लिये साईकिल और यूनिफार्म दे रहे हैं लेकिन राजधानी भोपाल में महज़ 720 रुपए की फीस के लिये एक निजी स्कूल द्वारा दो छात्राओं का भविष्य खराब कर दिया गया.

इन बच्चियों के पिता की तबीयत खराब होने के कारण वो अपनी दो माह की फीस समय पर जमा नहीं कर पाईं. स्कूल प्रबंधन ने न सिर्फ इन बच्चियों को स्कूल से निकाल दिया, बल्कि इन्हें परीक्षा में बैठने भी नहीं दिया गया जिससे इनका साल बर्बाद हो गया.

छोला इलाके के विद्याभारती हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाली इन बच्चियों के संबंध में जब ज़िला शिक्षा अधिकारी से बात की तो उनका कहना है कि चूंकि 10वीं की परीक्षा समाप्त हो चुकी है इसलिये अब इस संबंध में कुछ नहीं किया जा सकता.

वहीं सातवीं कक्षा की बालिका को अगली कक्षा में प्रमोट करने के अलावा स्कूल प्रबंधक पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी दिये जा रहे हैं. स्कूल की मान्यता समाप्ति की कार्रवाई भी की जा सकती है.

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