बड़ा सवाल: टाइगर स्टेट में कैबिनेट शिवराज की या फिर महाराज की?
Bhopal News in Hindi

बड़ा सवाल: टाइगर स्टेट में कैबिनेट शिवराज की या फिर महाराज की?
शिवराज कैबिनेट में 12 मंत्री सिंधिया के समर्थक हैं.(फाइल फोटो)

शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) की कैबिनेट में ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के 12 समर्थक मंत्री बनने में सफल रहे हैं. मजेदार बात ये है कि इनमें से कोई भी इस समय विधायक नहीं है.

  • Share this:
भोपाल. आज घोर सियासी बात की शुरुआत से पहले शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) का तब का बयान याद दिलाते हैं, जब वे सूबे की सत्ता से ताजे-ताजे हटे थे. भावुक भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था,' फिक्र मत करना, सिर्फ पद से ही हटा हूं, टाइगर अभी जिंदा है.' अब लगभग 15 महीने बाद उन्हीं शिवराज को सत्तारूढ़ कराने में सबसे अहम भूमिका अदा करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने भोपाल में जो कहा उसका भाव ये था कि कांग्रेसी बहुत दिनों से मेरे खिलाफ अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं. ध्यान रखें "टाइगर अभी जिंदा है". टाइगर स्टेट कहे जाने वाले सूबे में सियासी टाइगर बढ़ने के भी मायने कई हैं.

बहरहाल, शिवराज सिंह चौहान ने आज भारी मशक्कत के बाद अपने कुनबे का विस्तार आखिरकार कर ही लिया. कई लोग नवाज़े गए तो कई नाराज भी कर दिए गए. ये संभावित भी था क्‍योंकि सिंधिया के समर्थन से बनी सरकार में पहले ही तय हो गया था कि जिन 22 लोगों को वे अपने साथ लेकर आएं,उनमें से अधिकतम सीटें उनकी ही कन्फर्म होंगी.

बड़ा दिलचस्प दृश्य है इस वक़्त मध्य प्रदेश की सियासत का
12 ऐसे लोग पहली बार मंत्री बने हैं जो विधायक ही नहीं हैं.इस वक़्त मध्‍य प्रदेश में कोई प्रोटेम स्पीकर ही नहीं है क्‍योंकि जिस वरिष्ठ विधायक जगदीश देवड़ा को प्रोटेम स्पीकर बनाया गया था, वे आज मंत्री बना दिए गए. कई बड़े नाम मसलन: राजेन्द्र शुक्ला, अजय विश्नोई, पारस जैन, गौरीशंकर बिसेन किनारे कर दिए गए. पार्टी में भरी भरकम कद रखने वाले कैलाश विजयवर्गीय के करीबी रमेश मेंदोला भी किनारे कर दिए गए. अब विवाद सतह पर आने को कुलबुला रहे हैं. कई जगह आ भी गए, कई जगह सिर्फ खदबदाहट सुनाई दे रही है.
भाजपा में कभी फायर ब्रांड नेत्री कही जाने वाली उमा भारती ने फ़ौरन अपनी नाराजगी सार्वजनिक कर दी और कहा कि मैं लोधी समाज से आती हूं और मेरे समर्थकों का अपमान हुआ है. कैलाश विजयवर्गीय भी कमोबेश ऐसा ही महसूस कर रहे होंगे लेकिन उनके अभिव्यक्त करने का अंदाज़ अलहदा है, जो आने वाले दिनों में शायद सुनाई या दिखाई दे.




कई जगह विरोध की ख़बरें आईं और आती चली जा रही हैं. मुश्किल शिवराज के सामने इन्हें ही साधने की है. दूसरी बात ये है कि जैसे कमलनाथ के सामने मुश्किल थी बतौर मुख्यमंत्री, वैसी शिवराज जी के सामने नहीं रहेगी, इसकी क्या गारंटी है. उस वक़्त भी सिंधिया समर्थक मंत्रियों के रिमोट सिंधिया के पास ही थे और ज़ाहिर है कि अब भी होंगे. वो तो नेता उन्हीं को तब भी मानते थे और अब भी मानेंगे ही और तब शिवराज संतुलन कैसे बनायेंगे. दूसरा, कई ऐसी लोग इस वक़्त शिवराज कैबिनेट में हैं, जिनको उनका समर्थक नहीं माना जाता.

क्या आने वाले दिनों में सरकार में भी सिंधिया की ही चलेगी?
चूंकि सूची दिल्ली से तय हुई है,लिहाज़ा वे नाम काटे भी नहीं जा सकते थे. अब बतौर मुखिया शिवराज अपना इक़बाल कैसे बुलंद करेंगे,ये देखने वाली बात होगी. ये मैसेज दिल्ली से लेकर मध्‍य प्रदेश के हर छोटे शहर तक बहुत तेज़ी से फैल चुका है कि इस बार के विस्तार में सिंधिया की ही चली है. क्या आने वाले दिनों में सरकार में भी सिंधिया की ही चलेगी? ये सवाल भाजपा के कई बड़े नेताओं ख़ास तौर पर ग्वालियर-चंबल में उन नेताओं को ज़रूर परेशान आकर रहा होगा,जिनकी पृष्ठभूमि संघ से है. नरेंद्र सिंह तोमर, प्रभात झा, जयभान सिंह पवैया इनकी तो पूरी सियासत ही "महल" को कोसते बीती है. अब महल का जयकारा क्या उनके बूते की बात होगी? कुल मिलाकर आने वाला दौर शिवराज सिंह चौहान के लिए भी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए चुनौतियों वाला होगा. शिवराज की तुलना में सिंधिया की चुनौती ज्यादा बड़ी  होंगी क्‍योंकि भाजपा ने अपने एक दौर के चुनावी नारे को अमल में लाकर दिखा दिया कि "वादा जो करेगी,वो निभाएगी भाजपा" यानी जो वादा सिंधिया से उस वक़्त किया गया था वो आज उनके समर्थकों को मंत्री बनाकर पूरा कर दिया.अब इन 22 लोगों को उपचुनाव में जिताने की ज़िम्मेदारी सिंधिया की है, जो बहुत आसान नहीं होगा.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading