मंत्रिमंडल विस्तार के 5 दिन बाद भी नहीं हो सका विभागों का बंटवारा, सिंधिया और शिवराज में फंसा पेंच!
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मंत्रिमंडल विस्तार के 5 दिन बाद भी नहीं हो सका विभागों का बंटवारा, सिंधिया और शिवराज में फंसा पेंच!
शिवराज मंत्रिमंडल में 28 नए मंत्री बनाए जाने से पहले 5 मंत्री शामिल थे. (फाइल फोटो)

मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) तीन दिन के दिल्‍ली दौरे के बाद भोपाल पहुंच चुके हैं, लेकिन तीन महीने बाद हुए कैबिनेट विस्‍तार (Cabinet Expansion) के बाद भी मंत्रियों के विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया है. हालांकि चर्चा ये भी कि सिंधिया अपने लोगों को अच्‍छे मंत्रालय दिलवाना चाहते हैं.

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भोपाल. शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार के 5 दिन बीत जाने के बाद भी मंत्रियों को विभागों के बंटवारे नहीं हो सके हैं.जबकि 3 दिन के दिल्ली दौरे के बाद भोपाल पहुंचे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Chief Minister Shivraj Singh Chauhan) ने यह कहकर सस्पेंस और बढ़ा दिया है कि अभी विभागों को लेकर वह और वर्कआउट करेंगे. मुख्यमंत्री के इस बयान के साथ ही यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि क्या विभागों को लेकर बीजेपी (BJP) में अभी भी खींचतान मची हुई है? दसअसल, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 3 दिन से दिल्ली दौरे पर थे. वहां उनकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री, बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और केंद्रीय गृहमंत्री से भी मुलाकात हुई थी. यह माना जा रहा था कि इन सभी नेताओं से मुख्यमंत्री ने विभागों के बंटवारे में सिलसिले में चर्चा की और भोपाल लौटने के तुरंत बाद वह विभागों का बंटवारा कर देंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब यह कयास लग रहे हैं कि विभागों को लेकर ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia)और शिवराज के बीच अभी भी पेच फंसा हुआ है.

क्या है वजह ?
दरअसल, 2 जुलाई को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल में 28 मंत्रियों ने शपथ ली थी. इनमें से 9 मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया खेमे के तो बाकी भाजपा के थे. 28 में से 20 मंत्री कैबिनेट स्तर के हैं तो आठ को राज्यमंत्री बनाया गया है. यह माना जा रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया यह चाहते हैं कि पब्लिक से जुड़े हुए डिपार्टमेंट उनके समर्थक मंत्रियों को दिए जाएं. जबकि शिवराज सिंह चौहान यह डिपार्टमेंट अपने खेमे के मंत्रियों को देना चाहते हैं. यही वजह है कि फैसला दिल्ली पर छोड़ा गया है.

मौजूद मंत्रियों के विभागों पर भी खतरा ?
शिवराज मंत्रिमंडल में 28 मंत्री बनाए जाने से पहले 5 मंत्री शामिल थे. इनमें से सिंधिया खेमे के दो मंत्री हैं. अब यह माना जा रहा है कि नए सिरे से जब सभी 33 मंत्रियों में विभागों का बंटवारा किया जाएगा तो फिर हो सकता है कि पहले से शामिल मंत्रियों के विभागों में भी कुछ फेरबदल किया जाए. सूत्रों की मानें तो विभागों के बंटवारे में देरी की एक वजह यह भी है क्योंकि पहले के मंत्री अपने विभागों को नहीं छोड़ना चाहते हैं.
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