लाइव टीवी
Elec-widget

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बदला Twitter स्टेटस, कांग्रेस नेता की जगह लिखा पब्लिक सर्वेंट

News18 Madhya Pradesh
Updated: November 25, 2019, 4:56 PM IST
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बदला Twitter स्टेटस, कांग्रेस नेता की जगह लिखा पब्लिक सर्वेंट
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने twitter पर अपना स्टेटस बदला(फाइल फोटो)

अगर देखा जाए तो वोट के लिहाज से 10 साल में ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आई है. 2009 से लेकर 2019 तक सिंधिया का ग्राफ तेज़ी से गिरा.

  • Share this:
भोपाल. कांग्रेस नेता (Congress leader) और पार्टी महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) आज फिर सुर्ख़ियों में हैं. उन्होंने Twitter पर अपना स्टेटस बदल लिया है. उन्होंने अपने स्टेटस में  public servant और cricket enthusiast लिखा है. जबकि पहले पूर्व सांसद गुना, पूर्व केंद्रीय मंत्री-ऊर्जा-वाणिज्य और उद्योग लिखा था.

कांग्रेस महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया ने Twitter पर अपना bio क्या बदला, यहां से वहां तक हलचल मच गयी. मध्य प्रदेश की राजनीति में महाराज के नाम से संबोधित किए जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अचानक अपने नाम के साथ public servant और cricket enthusiast लिखा है. सिंधिया से जुड़े बेहद करीबी सूत्रों के मुताबिक़ Twitter अकाउंट को सिंपल बनाने के लिए बदलाव किया गया है. पहले जो तमाम पुरानी जानकारी लिखी थी, वो गूगल से भी तलाश की जा सकती है. ज्योतिरादित्य सिंधिया क्रिकेट प्रेमी हैं और जनता के सेवक हैं. बस अब ये दो बातें अहम हैं जो Twitter अकाउंट के नए स्टेट्स में लिखी है. इसका मतलब कांग्रेस से किनारा करने से ना लगाया जाए.

ज्योतिरादित्या सिंधिया ने बदला ट्विटर स्टेटस
ज्योतिरादित्या सिंधिया ने बदला ट्विटर स्टेटस


क्या महाराज की छवि से बाहर आना चाहते हैं सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया पिछले डेढ़ साल से लगातार किसी ना किसी वजह से चर्चा और सुर्ख़ियों में हैं. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें पार्टी के चुनाव प्रचार का प्रभारी बनाया गया था. वो स्टार कैंपेनर थे. सिंधिया ने पूरे प्रदेश का दौरा कर पार्टी के लिए माहौल बनाया. उनकी साफ छवि, आक्रामक अंदाज औऱ युवा नेतृत्व को लोगों ने पसंद किया. पूरे कैंपेन के दौरान सिंधिया को समर्थन मिला. वो मुख्यमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार माने गए. लेकिन जब मध्य प्रदेश में पार्टी सत्ता में आ गई, तो सिंधिया के हाथ में सत्ता नहीं आई. समर्थकों की काफी लॉबिंग और सिंधिया की दावेदारी के बावजूद वो कमलनाथ-दिग्विजय की जोड़ी के आगे किनारे कर दिए गए. हां, उनके समर्थकों को ज़रूर कमलनाथ मंत्रिमंडल में काफी तवज्जो मिली.

लोकप्रियता में ग्राफ में गिरावट
अगर देखा जाए तो वोट के लिहाज से 10 साल में ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता में लगातार गिरावट आई है. वर्ष 2009 से लेकर 2019 तक सिंधिया का ग्राफ तेज़ी से गिरा. एमपी में कांग्रेस की सरकार होने के बाद भी हाल के लोकसभा चुनाव में सिंधिया को करारी हार मिली. कभी उन्हीं के ख़ासम-खास रहे केपी यादव ने पाला बदलकर बीजेपी का दामन थामा और गुना-शिवपुरी सीट पर ज्योतिरादित्य सिंधिया को हरा दिया.
Loading...

एक नज़र चुनावी सफर पर
2002 के लोकसभा उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी के देशराज यादव को 4 लाख 25 हजार वोट से हराया.
2004 लोकसभा-  सिंधिया ने बीजेपी के हरिवल्लभ शुक्ला को 86 हजार वोट से हराया
2009 लोकसभा चुनाव में सिंधिया ने बीजेपी के नरोत्तम मिश्रा को 2 लाख 50 हजार वोट से हराया
2014 लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया फिर चुनाव जीते लेकिन इस बार मार्जिन और कम हो गया.वो बीजेपी के जयभान सिंह पवैया को सिर्फ 1 लाख 20 हजार वोट से हरा पाए.
2018 विधानसभा चुनाव में सिंधिया के लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस के 8 विधायकों को बीजेपी के 8 विधायकों से 16000 वोट कम मिले.
कांग्रेस ने 2017 और 18 उप चुनाव में जीती गई अटेर - कोलारस सीट भी गंवा दी.
और आख़िर में 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया को बीजेपी के केपी यादव ने 1 लाख 25 हजार वोट से हरा दिया.

बयानों पर सवाल
ज्योतिरादित्य सिंधिया के बयानों के कारण ये भी चर्चा रही कि वो बीजेपी में जा रहे हैं. इस बीच उन्होंने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद लंबे समय तक नयी नियुक्ति ना होने पर सवाल उठाए. उसके बाद उनके समर्थकों ने पार्टी अध्यक्ष और मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बनाने के लिए खुले तौर पर मांग उठानी शुरू की. भोपाल में पीसीसी दफ़्तर के बाहर उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने का पोस्टर तक लगा दिया गया था. हालांकि मामले के तूल पकड़ते ही आनन-फानन में पोस्टर हटा दिया गया. लेकिन उनके समर्थक पीसीसी चीफ बनाने की मांग अब भी लगातार अलग-अलग मंचों से उठा रहे हैं.

धारा 370 हटाने का समर्थन
ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी ने तवज्जो तो दी, लेकिन उन्हें कहीं भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली. सिंधिया को लोकसभा चुनाव के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी गई. हाल ही में वो महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के प्रभारी बनाए गए. सिंधिया ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटाने के फैसले का स्वागत किया था. उसके बाद सुगबुगाहट शुरू हो गई थी कि पार्टी में अपनी स्थिति से असंतुष्ट चल रहे सिंधिया क्या बीजेपी में जाने वाले हैं. अब टि्वटर पर स्टेटस बदलने के बाद, प्रदेश में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.

(ग्वालियर से रिपोर्टर सुशील कौशिक के इनपुट के साथ)

ये भी पढ़ें-जानिए केंद्रीय मंत्री ने क्यों की कमलनाथ सरकार के मिनिस्टर की तारीफ

राजनीति के संत... कैलाश जोशी

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: November 25, 2019, 11:43 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...