कमलनाथ सरकार के मेडिकल बॉन्‍ड से छात्रों में आक्रोश, HC ने खारिज की याचिकाएं

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 29, 2019, 1:55 PM IST
कमलनाथ सरकार के मेडिकल बॉन्‍ड से छात्रों में आक्रोश, HC ने खारिज की याचिकाएं
मेडिकल स्टूडेंटस को ग्रामीण क्षेत्रों में देनी होगी सेवा.

मध्‍य प्रदेश के सरकारी मेडीकल कॉलेज या विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी, एमएस, किसी स्नातकोत्तर व पीजी डिप्लोमा कोर्स और सुपर स्पेशियलिटी के छात्रों को अनवार्य चिकित्सा सेवा के बॉन्‍ड का पालन करना होगा.

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एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी करने के बाद किसी शासकीय सेवक की तरह प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेज ( Government Medical College) के छात्रों को ग्रामीण क्षेत्र के अस्पतालों में अपनी सेवाएं देनी होगी. अगर उन्‍होंने ऐसा नहीं किया तो एक करोड़ तक का जुर्माना अदा करना पड़ सकता है. यह खबर आपके लिए चौंकाने वाली हो सकती है, लेकिन कमलनाथ सरकार के मेडिकल बॉन्‍ड (Medical Bond) के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) पहुंचे छात्रों को करारा झटका लगा है.

बहरहाल, मध्‍य प्रदेश के सरकारी मेडीकल कॉलेज या विश्वविद्यालयों में एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी, एमएस, किसी स्नातकोत्तर व पीजी डिप्लोमा कोर्स और सुपर स्पेशियलिटी के छात्रों को अनवार्य चिकित्सा सेवा के बॉन्‍ड का पालन करना होगा.

दरसअल, सरकार द्वारा मेडीकल छात्रों से भरवाए जा रहे बॉन्‍ड के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में छात्रोंं की ओर से 100 से अधिक याचिकाएं दायर की गई थी. याचिका में छात्रों ने सरकारी कानून को हटाने की मांग की थी. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने माना की ग्रामीण क्षेत्रों की चरमराई चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने के लिए सरकार का फैसला सही है. इस लिहाज से मेडिकल छात्रों का ग्रामीण इलाके के अस्पतालों में सेवा देना गलत नहीं होगा. हाईकोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद छात्रों की याचिकाओं को खारिज कर दिया.

क्या कहता है अनिवार्य चिकित्सा सेवा बांड ?

प्रदेश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय में एमबीबीएस, बीडीएस, एमडी व एमएस, किसी स्नातकोत्तर व पीजी डिप्लोमा कोर्स और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्रों से सरकार दो साल का बॉन्‍ड भरवाती है. इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि संबंधित कोर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद मेडिकल छात्र शासकीय सेवक की तरह दो साल तक ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवाएं देंगे. किसी कोर्स में प्रवेश लेने से पहले भरवाए जाने वाले दो साल केबॉन्‍ड  का उल्लंघन करने पर छात्रों से भारी हर्जाना वसूले जाने का भी प्रावधान है. बॉन्‍ड तोड़ने पर 20 लाख से 1 करोड़ तक हर्जाना भी छात्रों को भरना पड़ सकता है.

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First published: August 29, 2019, 1:50 PM IST
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