संकट में कमलनाथ सरकार, मायावती ने सोनिया से मिलने से किया इनकार!

मध्‍य प्रदेश में राजनीतिक उठापटक के बीच बसपा ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात करने की खबरों का खंडन किया है.

News18 Uttarakhand
Updated: May 20, 2019, 5:52 PM IST
संकट में कमलनाथ सरकार, मायावती ने सोनिया से मिलने से किया इनकार!
मायावती ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें
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Updated: May 20, 2019, 5:52 PM IST
एग्जिट पोल के नतीजे आते ही देश की सियासत में भूचाल आ गया है. इसका सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश की राजनीति में देखने को मिल रहा है. प्रदेश में एग्जिट पोल के नतीजे से उत्साहित बीजेपी ने प्रदेश सरकार को फ्लोर टेस्ट (विधानसभा में बहुमत साबित करना) की चुनौती दी है. बीजेपी का मानना है कि मौजूदा सरकार अल्पमत में है, क्योंकि कांग्रेस के पास कुल 114 विधायक हैं और बहुमत के लिए 116 का आंकड़ा चाहिए. इसे पूरा करने के लिए कांग्रेस ने दो बसपा विधायकों से समर्थन लिया है.

कांग्रेस की मुसीबत अब मायावती ने भी बढ़ा दी है. दरअसल, मायावती और सोनिया गांधी के बीच मुलाकात के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन बसपा ने स्‍पष्‍ट किया है कि पार्टी सुप्रीमो राहुल गांधी और सोनिया गांधी से नहीं मिल रही हैं. इससे पहले खबरें आ रही थीं कि मायावती कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात कर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगी. अब बसपा नेता सतीश चंद्र मिश्रा ने मीडिया से साफ कहा है कि मायावती जी सोनिया गांधी और राहुल गांधी से नहीं मिलने वाली हैं. वह आज (20 मई) लखनऊ में ही रहेंगी.



यह है नाराजगी की वजह?
मायावती की नाराजगी का एक कारण यह भी है कि कांग्रेस ने गुना से बसपा के लोकसभा उम्मीदवार को अपनी पार्टी में शामिल कर लिया था. बसपा सुप्रीमो ने इस पर बेहद तल्‍ख टिप्‍पणी की थी. वैसे पूरे लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान मायावती ने सीधे तौर पर कभी गांधी परिवार पर हमला नहीं किया, लेकिन उन्होंने कांग्रेस को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा.

दरअसल, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस ने सपा और बसपा के समर्थन से सरकार बना ली थी. कांग्रेस को कुल 114, बसपा को दो और सपा को एक सीट मिली थी. समर्थन की सरकार बनने के बाद भी कमलनाथ ने सपा-बसपा और किसी भी निर्दलीय विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया था, जबकि इस बात के लिए कमलनाथ सरकार पर बार-बार समर्थन वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा था.

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अब कमलनाथ सपा और बसपा के विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल कर सकते हैं. कहा यह भी जा रहा है कि एक दो निर्दलीय विधायकों को भी मंत्री पद मिल सकता है. एक तथ्य यह भी है कि लोकसभा चुनाव से पहले ही कमलनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार की बातें चल रही थीं. अब यह तय माना जा रहा है कि कमलनाथ जल्द ही कांग्रेस विधायकों के साथ ही सपा-बसपा और निर्दलीय विधायकों की मीटिंग कर मंत्रिमंडल विस्तार की घोषणा कर सकते हैं.
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