Opinion: कमलनाथ ने राम मंदिर पर पार्टी से हटकर लाइन क्यों ली?
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Opinion:  कमलनाथ ने राम मंदिर पर पार्टी से हटकर लाइन क्यों ली?
इन दिनों सियासत के केंद्र में राम और हनुमान हैं. (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) का राजनीति करने का तरीका आक्रमक नहीं है. खासतौर पर वह धार्मिक और हिन्दु आस्था के प्रतीक राम मंदिर जैसे मुद्दों पर कभी विवादास्पद प्रतिक्रिया देने के लिए सामने भी नहीं आए.

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भोपाल. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी राम मंदिर मसले (Ram Temple Issue) पर कांग्रेस के रवैये में कोई बड़ा बदलाव  देखने को नहीं मिल रहा है. कतिपय कांग्रेस नेताओं के बयान में विरोध के स्वर सुनाई देते हैं. जबकि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) राम मंदिर शिलान्यास का बगैर किसी किंतु-परंतु के समर्थन कर सबसे आगे खड़े हो गए हैं. राज्य के दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) सीधे तौर पर मंदिर निर्माण का विरोध तो नहीं कर रहे हैं लेकिन भूमि पूजन के मुर्हूत को लेकर सवाल जरूर उठा रहे है. कमलनाथ को खुला समर्थन भी दिग्विजय सिंह के कारण ही करना पड़ा है. हालांकि दिग्विजय सिंह की राजनीतिक शैली के कारण मुर्हूत पर उनके सवाल को भी राम मंदिर विरोध के तौर पर ही लिया जा रहा है.

राम मंदिर विरोध से कांग्रेस का नुकसान जानते हैं कमलनाथ
कमलनाथ को गांधी परिवार के करीबी राजनेता के तौर पर देखा जाता है. संजय गांधी उनके मित्र थे. कांग्रेस को कमजोर होते उन्होंने बेहद करीब से देखा है. अर्जुन सिंह और इसके बाद दिग्विजय सिंह की राजनीति हिन्दुत्व के खिलाफ मानी जाती रही है. 6 दिसंबर 1992 को बाबरी ढांचा गिराए जाने के बाद मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों की सरकार बर्खास्त कराने में अर्जुन सिंह की भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी. मध्य प्रदेश में इसके बाद हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सरकार नहीं बना पई थी. भाजपा को सरकार बनाने के लिए एक दशक तक इंतजार करना पड़ा था. वर्ष 2003 में उमा भारती को चेहरा बनाकर भाजपा ने राज्य की राजनीति ही बदल दी थी. उमा भारती 6 दिसंबर 1992 की घटना में महत्वपूर्ण चेहरा थीं. व्यक्तिगत तौर पर अर्जुन सिंह को हिन्दुत्व  विरोधी राजनीति का नुकसान भी लोकसभा चुनाव में हार के रूप में उठाना पड़ा था. मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि वर्तमान में दिग्विजय सिंह हिन्दुत्व विरोधी राजनीति का कट्टर चेहरा हैं. उनकी और ओवेसी की भाषा में कोई फर्क नहीं है. उन्‍होंने कहा, 'यह संभव ही नहीं कि सोनिया गांधी की मर्जी के खिलाफ दिग्विजय सिंह बयान देते हो?'

राम और हनुमान ने पार लगाई थी कांग्रेस की नैया
कमलनाथ के राजनीति करने का तरीका आक्रमक नहीं है. खासतौर पर धार्मिक मुद्दों को लेकर और वे हिन्दु आस्था के प्रतीक राम मंदिर जैसे मुद्दों पर कभी विवादास्पद प्रतिक्रिया देने के लिए सामने भी नहीं आए. वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले कमलनाथ को मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था. राज्य में पंद्रह साल से भाजपा की सरकार थी. कमलनाथ इस सच को जानते थे कि अल्पसंख्यकों का समर्थन कर बहुसंख्यक वोटर को कांग्रेस की ओर आकर्षित नहीं किया जा सकता. पूरे चुनाव अभियान के दौरान कमलनाथ ने पार्टी के सभी नेताओं से साफ तौर पर कहा कि वे ऐसे बयान न दें,जिससे वोटों का धुर्वीकरण धर्म के आधार पर हो जाए.



कमलनाथ ने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में हनुमान जी के विशाल मंदिर का निर्माण भी कराया है. इसका लाभ भी उन्हें चुनाव अभियान में मिला. कमलनाथ ने अपने चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत भी दतिया के पीतांबरा पीठा से की थी. राम वनगमन पथ के निर्माण को कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनया था.114 सीटें जीत कर कांग्रेस सबसे बड़े राजनीतिक दल के तौर पर उभरी थी और पंद्रह साल बाद सत्ता में उसकी वापसी हुई.


उपचुनाव में भी राम का साथ नहीं छोड़ना चाहते कमलनाथ
राम मंदिर निर्माण के भूमि पूजन मुर्हूत को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह द्वारा लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं. शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को आमंत्रित न किए जाने पर दिग्विजय सिंह ने आपत्ति प्रकट की है. बहरहाल, राज्य में विधानसभा की 27 सीटों के लिए उपचुनाव होना है. मार्च में एक साथ 22 विधायकों के पार्टी से इस्तीफा दिए जाने के कारण कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार गिर गई थी. कांग्रेस के तीन विधायकों ने हाल ही में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा ज्वाइन की है. दो स्थानों पर उपचुनाव विधायकों के असमायिक निधन के कारण हो रहे हैं. कमलनाथ इन उपचुनावों के जरिए सत्ता में वापसी की एक और कोशिश कर रहे हैं, जिन स्थानों पर उपचुनाव होना है, उसमें मालवा-निमाड की कुछ सीटें ऐसी हैं जहां वोटों का धुर्वीकरण तेजी होता है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता भूपेन्द्र गुप्ता कहते हैं कि कमलनाथ के लिए धर्म राजनीति का मुद्दा नहीं है. वे हर वर्ग की धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान करते हैं. दिग्विजय सिंह के बयानों को जब राज्य में भाजपा ने मुद्दा बनाया तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को आगे आकर मंदिर शिलान्यास कार्यक्रम का समर्थन करना पड़ा. कमलनाथ ने कहा कि देशवासियों का इसकी बहुत दिनों अपेक्षा और आकांक्षा थी. सोशल मीडिया पर कांग्रेस राम वनगमन पथ के लिए कमलनाथ सरकार की कोशिशों को भी प्रचारित कर रही है. प्रदेश कांगे्रस कमेटी का ताजा ट्वीट है-रामराज लाये बिना हमें कहां विश्राम.

4 अगस्त को कांग्रेस कार्यकर्ता करेंगे हनुमान चालीसा का पाठ
कमलनाथ के बयान के बाद दिग्विजय सिंह का विरोध भी कुछ नरम पड़ा, लेकिन,भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस की राम भक्ति पर सवाल खड़े करने का मौका मिल ही गया है. भाजपा से जुड़े मोटिवेशनल स्पीकर पकंज चतुर्वेदी कहते हैं कि हिन्दु धर्म में आस्था रखने वालों ने राम को काफी काल्पिनक पात्र के तौर पर नहीं देखा. अदालत में कांग्रेस सरकारों के रूख के कारण ही राम मंदिर का मुद्दा अदालतों में टलता रहा. राम मंदिर के शिलान्यास के लिए कुछ घंटे ही शेष हैं. मध्य प्रदेश में कमलनाथ यह कोशिश जरूर कर रहे हैं कि कांग्रेस पर बहुसंख्यकों की भावनाओं को आहत करने का जो आरोप लगता है,वह किसी तरह खत्म हो जाए. कमलनाथ अपने व्यक्तिगत स्तर पर इसकी कोशिश भी कर रहे हैं.

4 अगस्त को कमलनाथ के भोपाल स्थित आवास पर हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन रखा गया है. मंगलवार का दिन है. कोरोना के कारण हनुमान चालीस पाठ के लिए सीमित लोगों को आमंत्रित किया गया है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता बताते हैं कि पार्टी स्तर पर कोई आयोजन नहीं रखा गया है. कांग्रेस कार्यकर्ताओं से भी यह अपेक्षा जरूर की गई है कि वे अपने-अपने घरों में इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें.


शिवराज सिंह चौहान ने ली राम राजा की शरण
कमलनाथ का रुख सामने आने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सक्रिय हुए. मुख्यमंत्री चौहान इन दिनों एक निजी अस्पताल में कोरोना वायरस का उपचार करा रहे हैं . शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि ओरछा के रामराजा मंदिर की विशेष सजावट और पूजा अर्चना 4 और 5 अगस्त को 2 दिन की जाएगी. रामराजा के इस मंदिर के कारण कमलनाथ की सरकार ने पहली बार ओरछा में महोत्सव आयोजित किया था. यद्यपि राजनीतिक घटनाक्रम के चलते कमलनाथ इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे.
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