पिता-पुत्र बना रहे हैं एक रिकॉर्ड, जीत गए तो एक भोपाल और दूसरा दिल्ली जाएगा
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पिता-पुत्र बना रहे हैं एक रिकॉर्ड, जीत गए तो एक भोपाल और दूसरा दिल्ली जाएगा
फाइल फोटो (File Photo)

मध्य प्रदेश में ये पहला राजनीतिक संयोग है,जहां एक ही जगह से पिता-पुत्र चुनाव रण में साथ हैं. बस फर्क लोकसभा और विधानसभा सीट का है.

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लोकसभा चुनाव में इस बार मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में एक इतिहास रचा जा रहा है. यहां सीएम कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ के साथ इतिहास रच रहे हैं. ये इतिहास पिता-पुत्र के एक साथ, एक ही शहर में चुनाव लड़ने का है. फर्क बस इतना है कि पिता सीएम कमलनाथ विधानसभा और बेटा नकुलनाथ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में ये पहला मौका होगा, जब पिता-पुत्र एक साथ, एक ही पार्टी से चुनाव मैदान में हैं. सीएम कमलनाथ अपनी परंपरागत छिंदवाड़ा लोकसभा सीट अपने बेटे नकुलनाथ के लिए छोड़कर विधानसभा के लिए मैदान में उतर रहे हैं. दिलचस्प ये है कि कमलनाथ पहली बार विधानसभा चुनाव और नकुलनाथ पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं.

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कांग्रेस के कब्जे वाली छिंदवाड़ा लोकसभा सीट उनके सीएम बनने के बाद खाली हो गई है. कमलनाथ ने इस सीट की कमान बेटे को सौंपने के लिए नकुलनाथ को उतरवाया है. सीएम बनने के बाद कमलनाथ का विधायक बनना जरूरी है. उनके लिए पार्टी विधायक दीपक सक्सेना ने छिंदवाड़ा विधानसभा सीट छोड़ दी है. उनके इस्तीफे के बाद सीट खाली हुई तो कांग्रेस ने कमलनाथ को यहां से उतार दिया.
आज पिता-पुत्र दोनों ने छिंदवाड़ा की इन दो सीटों के लिए अपने-अपने नामांकन पत्र एक साथ कलेक्ट्रेट पहुंचकर दाख़िल किए. दोनों अब एक-दूसरे के लिए प्रचार भी करेंगे. कमलनाथ ने विधानसभा उपचुनाव की कमान भी संभाल ली है. मध्यप्रदेश में यह पहला मौका है, जब कोई पिता-पुत्र एक पार्टी के बैनर तले एक ही जगह से चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस का दावा है कि पिता और पुत्र दोनों भारी मतों से जीतेंगे, बाकी की जमानत जब्त हो जाएगी.

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छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर सीएम कमलनाथ का एकछत्र राज है. वो 9 बार सांसद रहे. इस सीट पर सिर्फ एक बार सन 1997 में कमलनाथ को बीजेपी के दिग्गज नेता सुंदरलाल पटवा ने हराया था.कमलनाथ ने उस समय उपचुनाव लड़ा था.

छिंदवाड़ा लोकसभा सीट हो या फिर विधानसभा, दोनों ही सीट कांग्रेस का गढ़ रही हैं.इस सीट पर बीजेपी ने भी अपने प्रत्याशियों को उतारा है.बीजेपी का कहना है लोकसभा की विरासत आदिवासियों को सौंपना था, लेकिन उन्होंने अपने परिवार को अपनी विरासत सौंप दी.

मध्यप्रदेश में ये पहला राजनीतिक संयोग है, जहां एक ही जगह पिता-पुत्र चुनाव रण में साथ हैं.बस फर्क लोकसभा और विधानसभा सीट का है. जीत गए तो पिता भोपाल जाएंगे और बेटा देश की राजधानी दिल्ली.

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