करगिल विजय दिवस : 2 चौकियों पर तिरंगा फहरा कर आगे बढ़ रहे थे मेजर अजय प्रसाद और फिर...

मेजर शहीद अजय प्रसाद के पिता एल एन प्रसाद ने कहा देश की रक्षा सर्वोपरि है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वो फौज ज्वाइन करें.

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 26, 2019, 10:30 PM IST
Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: July 26, 2019, 10:30 PM IST
करगिल युद्ध हुए 20 साल बीत गए लेकिन जिन परिवारों के बेटों ने देश के लिए अपनी जान की कुर्बानी दी,उनके लिए तो ये वक़्त 200 साल से कम नहीं है. बेटों के जाने के बाद हुए एकाकी और खालीपन में बीतता एक-एक पल इनके लिए सदियों से कम नहीं. करगिल में शहीद हुए वीर सपूतों में एक नाम भोपाल के मेजर अजय प्रसाद का भी है. अजय अब नहीं हैं लेकिन माता-पिता की हर सांस और याद में वो बसे हुए हैं. बुज़ुर्ग माता पिता अब भोपाल में अकेले रह गए हैं. यादों का समंदर है और सागर सा गहरा सूनापन.

1986 में सेना में शामिल हुए
शहीद मेजर अजय प्रसाद के पिता आर एन प्रसाद और मां अब भोपाल में एकाकी जीवन जी रहे हैं. अपने शहीद बेटे की हर बात उन्हें कल की घटना की तरह याद है. पिता बताते हैं कि अजय '1986 में इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पास आउट होने के बाद मैकेनाइज्ड इंफेंट्री बटालियन में शामिल हुए थे.कमीशन मिलते ही वो श्रालंका चले गए.शांति सेना के साथ 1988 में एलटीटी के साथ मुठभेड़ में शामिल हुए और लिट्टे का डटकर मुकाबला किया.

शहीद मेजर अजय प्रसाद


हर मिशन में कामयाब
श्रीलंका से लौटते ही अजय प्रसाद को उल्फा उग्रवादियों से मिल रही चुनौतियों से निपटने के लिए मिजोरम भेजा गया. वहां भी उल्फा उग्रवादियों से मुठभेड़ हुई और भारतीय सेना ने उसे पस्त कर दिया. पिता याद करते हैं कि कमीशन मिलने के बाद अजय को एक दिन भी फुरसत नहीं मिली. वो हमेशा किसी ना किसी मिशन पर ही रहे.मिशन में भारत का झंडा बुलंद करने के साथ ही कभी कमांडो ट्रेनिंग तो कभी कमबैट ट्रेनिंग में रहे.यूनिट में जब आए तो कश्मीर जाना पड़ा.अजय को हर कदम पर अपने मिशन में सफलता ही मिली.

माता-पिता के लिए एक-एक पल सदियों सा हो गया है

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अजय ने बढ़ायी थी दाढ़ी
शहीद अजय के पिता बताते हैं उग्रवादियों से लड़ने के लिए अजय ने दाढ़ी बढ़ाई थी.कश्मीर में उग्रवादी को पकड़ा था लेकिन बाद में वो बच निकला. बाद में अजय ने कश्मीर में ही पेट्रोलिंग के दौरान हिजबुल मुजाहिदीन के तीन आंतिकियों को मार गिराया था. अजय कई बार आईईडी ब्लास्ट में बाल-बाल बचे. पिता गहरी सांस लेकर याद करते हैं कि आखिर एक आदमी कब तक बचेगा..एक दिन उसको ही जाना था...और वो चले गए.

मेजर हर मिशन में कामयाब रहे


मेजर अजय के आख़िरी शब्द

शहीद मेजर अजय प्रसाद के पिता आर एन प्रसाद ने बताया कि करगिल युद्ध में मेरे बेटे अजय को भी एक सैनिक टुकड़ी की कमान मिली थी. टुकड़ी ने अनंतनाग के सिरोहाम की दो चौकियों पर तिरंगा लहरा दिया था. वे तीसरी चौकी की ओर बढ़ रहे थे, उसी दौरान पाकिस्तानी सैनिकों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया और मेरा बेटा शहीद हो गया.मेरे बेटे के आखिरी शब्द थे कि हम केवल वायु सेना की मदद से सुरक्षित लौट सकते हैं
अजय होता तो हम अकेले ना होते
भावुक पिता कहते हैं बेटे को शहीद हो हुए 20 साल बीत गए,लेकिन उनकी यादें आज भी ताज़ा हैं. हर पल बस यही लगता है कि वो अभी हमारे साथ ही हैं.इतने साल से बेटे को याद करते-करते बस समय गुजरता जा रहा है.धीरे-धीरे हम जैसे-जैसे औऱ ज्यादा कमजोर होते जा रहे हैं..वैसे वैसे बेटे की याद बढ़ती ही जा रही है.
लाखों में एक थे अजय
मेजर अजय प्रसाद की मां का कहना है कि अजय जैसा बेटा होना मुश्किल है. वो अलग ही व्यक्ति थे.बचपन से ही कुशाग्र,मिलनसार औऱ खुशमिजाज. वो कभी किसी को दुखी नहीं देख सकते थे.अजय जब भी घर आते थे तो पूरा घर खुशियों औऱ हंसी ठिठौली से गूंज उठता था.अजय होते तो हम कभी उदास ही नहीं होते.
बचपन की यादें
अजय को याद करते-करते बुज़ुर्ग माता-पिता उनके बचपन में खो जाते हैं. स्कूल के किस्से, बचपन की शरारतें उनके ग़म से भरे चेहरे पर फीकी मुस्कान ला देती है. वो कहते हैं-हम तो कुछ भी नहीं थे. अजय की शहादत ने हमें जिस उंचाई पर पहुंचाया हम वहां तक कभी नहीं जा पाते. अजय अगर आज जिंदा होते तो हमें कभी अकेला नहीं छोड़ते.
शहीद के पिता की अपील
मेजर शहीद अजय प्रसाद के पिता एल एन प्रसाद ने कहा देश की रक्षा सर्वोपरि है. उन्होंने युवाओं से अपील की कि वो फौज ज्वाइन करें.

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First published: July 26, 2019, 6:05 PM IST
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