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ऐसा जुूनून कि ये 'काइटमैन' हर साल बनवाता है सोने की पतंग और चकरी

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 15, 2020, 6:49 PM IST
ऐसा जुूनून कि ये 'काइटमैन' हर साल बनवाता है सोने की पतंग और चकरी
भोपाल के काइटमैन लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल

लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल (Lakshminarayan Khandelwal) 70 साल के हो गए हैं.उनका कहना है पहले हर साल सिर्फ पतंगें (kite) बनवाता था.फिर धीरे-धीरे गोल्ड (gold) की पतंगें बनाकर पहनना शुरू किया तो ये परंपरा सी बन गयी

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भोपाल.मकर संक्रांति (Makar sankranti) पर पतंग (kite) उड़ाने की परंपरा है. लोगों को पतंग उड़ाने, पेंच लड़ाने और पतंग (kite) काटने का शौक होता है. लेकिन भोपाल (bhopal) में एक ऐसे शौकीन हैं जिन्हें पतंग पहनना भी पसंद है. उन्होंने नाखून से लेकर ज़ेवर तक सब पतंग,मांझा और चकरी से संवार रखा है. ये ज़ेवर भी सोने (gold) के हैं. जूनून को देखते हुए इनका नाम ही काइटमैन (kiteman) पड़ गया है.

50 साल पहले से शुरू शौक आज भी जारी
वैसे तो नाम है लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल लेकिन अब ये पहचाने जाते हैं काइटमैन के नाम से. भोपाल में रहते हैं लेकिन 50 साल से पतंग ही पहचान और पता है. काइटमैन बताते हैं कि वो 50 साल से पतंग उड़ाते आ रहे हैं. जब 10 के थे तब ऐसा शौक चढ़ा कि आज तक उतरा नहीं. संक्रांति तो एक दिन आती है और चली जाती है. उस दिन तो ये जी भरकर पतंग उड़ाते हैं. उसके बाद सालभर क्या करें. पतंग के प्रति अपनी दीवानगी को लक्ष्मीनारायण ने अपने रहन-सहन में उतार लिया है.

पतंग के ज़ेवर

लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल बताते हैं कि बचपन से उन्हें पतंग उड़ाने की बेसब्री रहती थी. हर साल मकर संक्रांति का इंतजार रहता था कि कब त्योहार आए और वो पतंग उड़ाएं.बड़ी-बड़ी पतंग खरीदकर लाते और उड़ाते थे. वो जब 10 साल के थे तब पतंग उड़ाना शुरू किया था. पतंगों से इतना ज्यादा लगाव होने के कारण उन्होंने सोचा क्यों ना पतंग को गहना बना कर पहना जाए. बस उस दिन से ऐसा सिलसिला शुरू हुआ जो समय के साथ बढ़ता ही गया. शुरुआत हुई थी एक गोल्ड काइट बनाने से जो कि आज भी चल रहा है. लक्ष्मीनारायण अब गले में सोने की चार- पांच चेन पहने हैं सबमें सोने की पतंग-चकरी और मांझा है.

काइट रिंग
लक्ष्मीनारायण अपने हाथ में सोने की अंगूठी भी पहने हैं. सभी में पतंग बनी हैं. नेल आर्ट भी पतंगों से किया है. वो सिर्फ शौकिया तौर पर ही पतंग नहीं उड़ाते बल्कि भोपाल और बाहर जहां भी पतंग उत्सव होता है वहां भाग लेने ज़रूर जाते हैं.संक्राति पर हर साल नयी काइट ज्वैलरी
लक्ष्मीनारायण खंडेलवाल 70 साल के हो गए हैं.उनका कहना है पहले हर साल सिर्फ पतंगें बनवाता था.फिर धीरे-धीरे गोल्ड की पतंगें बनाकर पहनना शुरू किया तो ये परंपरा सी बन गयी. संक्राति आने से पहले अब हर साल गोल्ड की छोटी या बड़ी पतंग या अंगूठी बनवाकर पहनता हूं.

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First published: January 15, 2020, 6:47 PM IST
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