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अजब-गजब: एक रोटी भरती है पूरे परिवार का पेट, 'मांडा' बनी बुरहानपुर की शान

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 8, 2019, 6:17 PM IST
अजब-गजब: एक रोटी भरती है पूरे परिवार का पेट, 'मांडा' बनी बुरहानपुर की शान
बहुत पुराना है मांडी रोटी का इतिहास.

रुमाली रोटी (Rumali Roti) जैसी दिखने वाली 'मांडा रोटी' (Manda Roti) ने अब एक अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है. सच कहा जाए तो यह अब मध्‍य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर (Burhanpur) की शान बन गई है.

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बुरहानपुर. मध्‍य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर बुरहानपुर (Burhanpur) की रुमाली रोटी (Rumali Roti) जैसी दिखने वाली 'मांडा रोटी' (Manda Roti) ने अब एक अलग पहचान बनानी शुरू कर दी है. मांडा रोटी के स्‍थानीय लोग तो फैन हैं ही, बल्कि यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक भी इस रोटी को देख कर कायल हो जाते हैं. यही नहीं, इस रोटी का इतिहास भी काफी पुराना है.

बहुत पुराना है मांडी रोटी का इतिहास
बुरहानपुर का इतिहास जितना पुराना है उतना ही पुरानी है यहां बनने वाली रुमाली रोटी के आकार से भी बड़ी मांडा रोटी. मुगलकाल से शुरू हई इस मांडा रोटी के शहर में 60 से अधिक परिवार हैं, जिनके लगभग 500 सदस्य इससे ही अपना जीवन यापन करते है. इतिहासकारों के अनुसार 1601 में मुगलशासन आया तब मुगल शासकों ने बुरहानपुर को फौजी छावनी बनाई. मुगल शासन के भारत वर्ष में सैनिक बुरहानपुर फौजी छावनी में आाया करते थे, लिहाजा ऐसे में कम समय में अधिक मात्रा में भोजना तैयार करने का संकट खडा हो गया था. इसी बीच स्थानीय कारीगरों ने मुगल शासकों को कम समय में अधिक मात्रा में भोजना तैयार करने के लिए स्थानीय बावरचियों ने बड़े आकार की रोटी यानी मांडा बनाने का सुझाव दिया. इकसे बाद बड़े स्‍तर पर मांडा रोटी तैयार करने का फऱमान जारी हुआ.

आधा किलो आटे से तैयार होती है रोटी

इतिहासकारों के अनुसार मुगलशासन काल में एक रोटी करीब 500 ग्राम गेंहूं के आटे से तैयार की जाती थी. जबकि वर्तमान में मांडा रोटी का आकार घटने के बाद यह देश में सबसे बड़े आकार रोटी है. यह रोटी अन्य रोटियों की तुलना में काफी स्वादिष्ट और किफायती है. खास बात यह है कि बुरहानपुर के हर वर्ग के लोग इस मांडा रोटी बड़े चाव खाते हैं. फिलहाल यह रोटी एक किलो गेंहु के आटे में 4 पीस बनकर तैयार होती है. जबकि यह अब बुरहानपुर की शान बन गई है.

madhya pradesh, मध्‍य प्रदेश
बुरहानपुर के पुराने बस स्टैंड के सामने मांडा रोटी बनाने वालों की दुकान हैं.


कई पीढ़ियों से कर रहे हैं कामबुरहानपुर के पुराने बस स्टैंड के सामने मांडा रोटी बनाने वालों की दुकान हैं और यह लोग कई पीढ़ियों से इस काम को करते चले आ रहे हैं. वैसे इस काम में काफी मेहनत होने के चलते मांडा बनाने वाले कारीगरों की नई पीढ़ियां इस पेशे से तौबा कर रही हैं. हालांकि अब आटे को मिक्स करने के लिए मिक्सर जैसे संसाधन आ चुके हैं. मांडा बनाने वाले कारीगरों के अनुसार उनके ही कारीगर मांडा रोटी बनाने अरब देशों के साथ श्रीलंका और नेपाल आदि देशों में जाते है. जबकि महाराष्ट्र और गुजरात के कई शहरों में मांडा रोटी बनाने का कारोबार करने के लिए यहां लोग शिफ्ट हो गए हैं.

गंगा-जमुना संस्कृति का प्रतीक है रोटी
नियमित रूप से मांडा रोटी के ग्राहक इस रोटी की तारिफ करते नहीं थकते हैं. स्‍थानीय ग्राहक चंद्र कुमार छापडिया का कहना है कि छोटे से लेकर बड़े आयोजन तक में मांडा रोटी की काफी मांग होती है. जबकि मांडा रोटी ना सिर्फ बुरहानपुर शहर की धरोहर है बल्कि ये लेकिन हिंदू-मुस्लिम एकता और गंगा-जमुना संस्कृति का भी एक प्रतिक है.

होटल उद्योग का खास झुकाव
होटल उद्योग से जुड़े पर्यटन के जानकारों के अनुसार जब भी देशी-विदेशी पर्यटक बुरहानपुर आता है तो उसे हम मांडा रोटी कैसे बनती है इसे दिखाने के लिए ले जाना नहीं भूलते. छोटे आकार की मांडा रोटी खाने वाले सैलानी इसके देख कर बरबस दीवाने हो जाते हैं. जबकि वह इसका भरपूर लुत्‍फ उठाते हैं.

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First published: October 8, 2019, 5:58 PM IST
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