ममता बनर्जी को उनके 'घर' में पटखनी देने वाले कौन हैं कैलाश विजयवर्गीय

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 28, 2019, 7:05 PM IST
ममता बनर्जी को उनके 'घर' में पटखनी देने वाले कौन हैं कैलाश विजयवर्गीय
कैलाश विजयवर्गीय

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लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों ने मोदी-शाह के बाद जिस नेता के क़द में सबसे ज़्यादा राजनीतिक इज़ाफा किया वो शायद कैलाश विजयवर्गीय का ही है. पार्टी महासचिव और पश्चिम बंगाल के प्रभारी ने बीजेपी को दीदी के राज्य में 18 लोकसभा सीट दिलवाकर अपनी रणनीतिक कामयाबी का झंडा बुलंद कर दिया. विजयवर्गीय का अभियान यहीं नहीं रुका. चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में सेंध लगाकर उसके 54 पार्षदों को बीजेपी में शामिल करना उनकी अगली रणनीति का संकेत भर है.

जन्म और कर्मभूमि

कैलाश विजयवर्गीय पूरी तरह इंदौरी हैं. उनका जन्म 13 मई 1956 को इंदौर में हुआ. इंदौर ही उनकी जन्मभूमि रहा और अपने इसी शहर को उन्होंने कर्मभूमि भी बनाया. यहीं उनका घर है और यहीं से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. आशा विजयवर्गीय उनकी जीवन संगिनी हैं और बेटा आकाश विजयवर्गीय उनके पद चिन्हों पर चलते हुए अब महू से विधायक है.

राजनीतिक सफर

कैलाश विजयवर्गीय ने 1975 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. लगातार सक्रिय रहे और उनका राजनीतिक ग्राफ लगातार बढ़ता गया. वो अभाविप, भारतीय जनता युवा मोर्चा और बीजेपी में विभिन्न पदों पर रहे. इंदौर के महापौर रहे और लगातार 6 बार विधायक चुने गए. मध्य प्रदेश में 2003 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद वो उमा भारती, बाबूलाल गौर और फिर शिवराज सिंह सरकार में लगातार कैबिनेट मंत्री रहे. महत्वपूर्ण विभाग उनके पास रहे.

जुझारूपन कुछ ऐसा है

कैलाश विजयवर्गीय की पार्टी में पहचान उनके जुझारूपन के लिए है. यही वजह है कि 2014 में उन्हें हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी प्रभारी बनाया गया. ये विजयवर्गीय की मेहनत का भी नतीजा था कि बीजेपी वहां सत्ता में आयी. उसके बाद उनका कद और बढ़ा और जून 2015 में टीम अमित शाह में वो पार्टी महासचिव बनाए गए. हरियाणा में कैलाश विजयवर्गीय के शानदार परफॉर्मेंस के बाद सबसे चैलेंजिग ज़िम्मेदारी पश्चिम बंगाल की दी गयी.
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विजयवर्गीय मध्य प्रदेश की राजनीति से एक तरह से विदा हो गए, हालांकि वो महू से विधायक बने रहे. लेकिन पश्चिम बंगाल में पार्टी के झंडे गाड़ने के लिए उनका होमवर्क जारी रहा. मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 में उन्होंने अपनी सीट अपने बेटे आकाश विजयवर्गीय के लिए छोड़ दी. अटकलें लगीं कि विजयवर्गीय किसी और सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. वो पूरी तरह से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे. सुमित्रा महाजन का टिकट कटने के बाद इंदौर लोकसभा सीट से उनके चुनाव लड़ने की चर्चा रही. लेकिन वो सिर्फ चर्चा ही बनी रही. भारी विवाद और हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में भी लोकसभा चुनाव हुए और अब वाम दलों और दीदी को मात देकर 18 सीटों के ऊंची छलांग के साथ कैलाश विजयवर्गीय सफलता की दौड़ में बीजेपी में सबसे आगे खड़े दिखायी दे रहे हैं.

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First published: May 28, 2019, 7:05 PM IST
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