संगठन से सत्ता और सत्ता से संगठन... ऐसा है शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक सफर

शिवराज सिंह चौहान लगातार 13 साल तक मध्य प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद 2018 दिसंबर में सत्ता से बाहर हुए. वो प्रदेश की राजनीति से निकलकर अब फिर संगठन के लिए काम करेंगे.

News18 Madhya Pradesh
Updated: June 13, 2019, 8:13 PM IST
संगठन से सत्ता और सत्ता से संगठन... ऐसा है शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक सफर
शिवराज का सियासी सफर
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Updated: June 13, 2019, 8:13 PM IST
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब बीजेपी सदस्यता अभियान समिति के प्रमुख हैं. गुरुवार को पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन्हें ये नई जिम्मेदारी सौंपी है. लगातार 13 साल तक प्रदेश की बागडोर संभालने के बाद 2018 दिसंबर में सत्ता से बाहर हुए शिवराज सिंह चौहान के लिए ये नयी पारी है. राज्य की राजनीति से निकलकर अब वो फिर संगठन के लिए काम करेंगे.

सियासी सफर



शिवराज सिंह चौहान के सियासी सफर पर नजर डालें तो उसमें सफलता का ग्राफ ऊपर ही जाता दिखता है. दिसंबर 2018 से पहले तक उसमें कहीं भी गिरावट नहीं है. शिवराज सिंह चौहान का पैतृक गांव सीहोर जिले का जैत है. 5 मार्च 1959 में जैत गांव में उनका जन्म हुआ था. शिवराज सिंह की स्कूली पढ़ाई-लिखाई भोपाल में हुआ. युवा होते-होते वो कॉलेज के दिनों में बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी से जुड़ गए. ये 1977-78 का दौर था. इस दौरान वो एबीवीपी की भोपाल इकाई के संगठन सचिव बने.

कारवां बढ़ता गया

1978 से 80 के बीच शिवराज संयुक्त सचिव बना दिए गए. उसके बाद उनका सफर और आगे बढ़ा और 1980-82 में एबीवीपी के प्रदेश मंत्री बने. शिवराज सिंह चौहान उसके बाद 1982-83 में एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नियुक्त हुए.

टर्निंग पॉइंट

1990 में उनके राजनीतिक जीवन का टर्निंग पॉइंट आया, जब विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें टिकट मिला और वो चुनाव जीत गए. लेकिन 23 नवंबर 1991 को उन्होंने विधानसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. दरअसल इस्तीफा देना उनके राजनीतिक करियर का एक और प्रमोशन था. उन्हें विदिशा लोकसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी बनाया जा रहा था. वो चुनाव मैदान में उतरे और जीते भी. ये 10वीं लोकसभा थी. 1992 में उन्हें संगठन के लिए फिर चुना गया और बीजेपी महासचिव बनाया गया.
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शिवराज सिंह 1994 तक बीजेपी के महासचिव बने रहे. 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए पार्टी ने फिर शिवराज पर भरोसा जताया और विदिशा से टिकट दिया. वो एक बार फिर यहां से चुनाव जीते. इसके बाद 1998 में शिवराज को लगातार तीसरी बार लोकसभा का टिकट दिया गया. वो 12वीं लोकसभा और उसके बाद 1999 में हुए लोकसभा चुनाव के लिए चौथी बार संसद सदस्य चुने गए.

संसद में दस्तक

अपना सियासी सफर संसद तक पहुंचा चुके शिवराज सिंह का इस दौरान भी संगठन के प्रति और संगठन का इनके प्रति भरोसा बना रहा. यही वजह थी कि 2002 में वो बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बनाए गए. इसके अगले साल 2003 में महासचिव और 2004 में 14वीं लोकसभा के सदस्य चुने गए.

वर्ष 2005 में शिवराज सिंह प्रदेश की राजनीति में लौटे और मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष बनाए गए. लेकिन सफलता का ग्राफ अभी और ऊपर जाना था. 29 नवंबर 2005 को वो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बनाए गए. तब से लेकर 12 दिसंबर 2018 तक वो इस पद पर काबिज रहे.

2013 में शिवराज सिंह चौहान बुदनी और विदिशा दो विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़े और दोनों जगहों से वो जीत गए. बाद में 19 दिसंबर 2013 को उन्होंने विदिशा सीट से इस्तीफा दे दिया था. 2018 विधानसभा चुनाव में पार्टी तो चुनाव हार गयी लेकिन शिवराज बुधनी से रिकॉर्ड मतों से जीत गए. शिवराज सिंह चौहान अब पार्टी के उपाध्यक्ष हैं और बीजेपी सदस्यता अभियान समिति के प्रमुख बनाए गए हैं.

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