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हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर : इस पुलिस अफसर की समाज से अपील-बेटों को अच्छे संस्कार दें...

News18 Madhya Pradesh
Updated: November 30, 2019, 2:13 PM IST
हैदराबाद गैंगरेप और मर्डर : इस पुलिस अफसर की समाज से अपील-बेटों को अच्छे संस्कार दें...
महिला पुलिस अफसर की समाज से अपील

पल्लवी त्रिवेदी (pallavi trivedi) ने अपनी अपील (appeal) में लिखा,यह सब आज करना शुरू करेंगे तो रातों रात कुछ नहीं बदलेगा. लेकिन लगातार प्रयास से असर जरूर दिखेगा क्योंकि कोई परिवार नहीं जानता कि अगली बार किसके घर की स्त्री इस हादसे की शिकार होगी. प्लीज इसे बेहद बेहद गंभीरता से लें.

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भोपाल.हैदराबाद (hyderabad) में 26 साल की वेटनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप, मर्डर (gangrape n murder) और लाश जलाने की वारदात से पूरा देश दहला हुआ है. दिल्ली के निर्भया गैंगरेप कांड (nirbhaya gangrape case) के बाद ये दूसरा केस है जिस पर देशभर में व्यापक विरोध हो रहा है. मध्य प्रदेश की एक महिला पुलिस अफसर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भोपाल, पल्लवी त्रिवेदी (pallavi trivedi) भी इतनी व्यथित हुईं कि उन्होंने फेसबुक (facebook) पर समाज के नाम एक अपील जारी की.

अपने फेसबुक वॉल पर पल्लवी ने लिखा कल निर्भया थी, आज हैदराबाद की यंग वेटनरी डॉक्टर. इन दोनों कांड के बीच हजारों लड़कियां बलात्कार का शिकार हुईं. चुनिंदा केस ही चर्चा में आए बाकी दूर दराज के कस्बों के केस लोकल समाचार पत्रों की एक कॉलम की खबर बन कर रह गए. लोग व्यथित हुए, दो चार दिन जिक्र चला और फिर रोजमर्रा की जिंदगी शुरू हो गई.लेकिन हर घटना के बाद हमने पेरेंट के रूप में, वयस्क लड़की के रूप में, जिम्मेदार पड़ोसी और नागरिक होने के नाते क्या कदम उठाए जिससे, हमारे आसपास की लड़की के साथ यह जघन्य घटना न हो सके? यदि उठाए भी तो ये नाकाफी थे.

पल्लवी ने आगे लिखा-आज मैं एक लड़की, एक जिम्मेदार नागरिक और एक पुलिस अधिकारी होने के नाते कुछ प्रिवेंटिव एक्शन और जरूरी कदम सभी को सजेस्ट करना चाहती हूं, जो हर हालत में हर लड़की और उनके परिवार तक पहुंचें.

ये हैं पल्लवी के सुझाव

1- नाबालिग लड़कियों के केस में पेरेंट्स और स्कूल प्रबंधन की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी होती है. नासमझ बच्ची अपने साथ हुई घटना को न ठीक से समझ सकती है और न बता सकती है. इसलिए हर वक्त उसे सुरक्षित निगरानी में रखना बेहद जरूरी है. खासकर पुरुष स्टाफ जैसे ड्राइवर, नौकर, रिश्तेदार, ट्यूशन टीचर वगैरह के साथ अकेला न छोड़ें और न ही उनसे बच्ची के कपड़े बदलने या नहलाने जैसे कार्य कराएं. उसे तीन साल की उम्र से ही अच्छे और खराब स्पर्श की ट्रेनिंग दें.

2- आठ साल की उम्र में बच्ची को अश्लील हरकतों और रेप का अर्थ समझा दें. बार बार समझाएं जिससे उसे इसकी समझ पैदा हो जाए और अकेले असुरक्षित जाने के खतरों से लगातार आगाह करते रहें. उसे बताएं कि कोई पुरुष अगर अश्लील इशारे करे, पोर्न वीडियो भेजे या दिखाने की कोशिश करे, उसके सामने अपना लिंग छुए या दिखाए या मास्टरबेट करे तो फौरन आकर पेरेंट्स को बताएं. यही हरकतें उसके पोटेंशियल बलात्कारी होने का लक्षण हैं और वो आपसे ये सब शेयर कर सके इसके लिए उसके दोस्त बनिए. डांट डपट करके उसे ये बातें बताने से हतोत्साहित न करें.

3- किशोर लड़कियों को अकेले निकलने से न रोकें किंतु उसे जरूरी सेफ्टी मेजर्स के बारे में बताएं. उसके साथ रेप के केसेस डिस्कस करें और उसके मोबाइल में वन टच इमरजेंसी नंबर रखें जो आवश्यक रूप से पुलिस का ही हो. उसके बाद वो परिवार को कॉल कर सकती है. स्प्रे, चाकू, कैंची, सेफ्टी पिन, मिर्च पाउडर उसके बैग में अनिवार्य रूप से रहें. यह आदत जितनी जल्द विकसित कर दें, उतना बढ़िया. इसका डेमो देकर उसे ट्रेंड करवा दें. रिहर्सल आवश्यक है अन्यथा हथियार होते हुए भी घबराहट में उसका उपयोग नहीं हो पाता.
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4- इन हथियारों के साथ एक तेज आवाज़ वाली सीटी रखें. अपराध के वक्त तेज शोर से अक्सर अपराधी भाग जाते हैं. अगर कोई ऐसी डिवाइस हो या बन सकती हो जो एक बटन दबाते ही इतनी तेज विशेष आवाज का सायरन बजाए जो आसपास के सारे क्षेत्र में गूंज जाए और जिसकी आवाज को सिर्फ रेप होने की आशंका के रूप में यूनिवर्सल साउंड माना जाए तो कृपया इसकी जानकारी दें और अगर नहीं है और कोई व्यक्ति या कंपनी इसे बना सकती है तो इसे सभी नागरिकों की तरफ से मेरा आग्रह मानकर बना दें.

5- पुलिस कंट्रोल रूम और किसी भी पुलिस अधिकारी का नंबर हमेशा अपने पास रखें और सबसे पहले उन्हें डायल करें. पुलिस की छवि आपके मन में जो भी हो पर याद रखें कि महिलाओं के अपराधों में पुलिस बेहद तत्परता से काम करती है. आपके सबसे निकट का पुलिस वाहन शीघ्र आपके पास पहुंच जाएगा. पुलिस एप अपने मोबाइल में रखें और अपनी लोकेशन भेजें. अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन जाकर स्टाफ और अधिकारियों से परिचय करें. पुलिस वाकई आपकी दोस्त है. यह आप महसूस करेंगी.

6- मैं चाहती हूं कि लड़कियों के लिए यह देश और दुनिया इतना सुरक्षित हो कि वे आधी रात को भी बेखटके सड़कों पर घूम सकें लेकिन यथार्थ इतना सुंदर नहीं है. इसलिए अकेले देर रात सूनी सड़कों पर आवश्यकता होने पर ही निकलें. पुलिस हर कदम पर आपके साथ तैनात नहीं हो सकती और अपराधी और दरिंदे लड़कों को रातों रात सुधारा नहीं जा सकता. इसलिए क्लब या पार्टी से देर रात लौटें तो अपनी सुरक्षा का ध्यान पहले रहे. कैब या टैक्सी करने पर तुरंत लाइव लोकेशन घरवालों को दें और उसका फोटो भी भेजें. यह बात उस ड्राइवर को भी मालूम हो.

7- एक महत्वपूर्ण बात यह कि अगर अपराधी अकेला है तो उसे हैंडल किया जा सकता है. अगर वह दुष्कर्म करने की कोशिश करता है तो बिना घबराए उसके टेस्टिकल्स हाथों से पकड़कर जितनी मजबूती से हो सके, दबा दें. इससे वह कुछ मिनिटों के लिए अशक्त हो जाएगा और लड़की को बच निकलने का या उस पर आक्रमण करने का वक्त मिल जाएगा. गैंगरेप की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में लड़की जरूर बेबस हो सकती है मगर ऐसे में पुलिस को त्वरित सूचना मदद करेगी.

8- मार्शल आर्ट या अन्य कोई सुरक्षात्मक आक्रमण कला सिखाना अपनी बच्चियों के लिए टू डू लिस्ट में अनिवार्यतः शामिल कर लें।

9- बच्चों की सही काउंसलिंग और अपराधों से बचाव के उपाय आप न जानते हों तो बेझिझक पुलिस थाने या किसी एनजीओ की मदद लें. आपके स्कूल, क्लास, कोचिंग, मोहल्ले में आकर आपके लिए काउंसलिंग सेशन आयोजित हो जाएगा.

10- सबसे महत्वपूर्ण बात सबसे अंत में ये कि समाज को स्त्रियों के लिए सुरक्षित बनाएं और इसके लिए अपने घर, मोहल्ले और समाज के लड़कों को बचपन से ही शिक्षित करें. उनकी विकृत मानसिकता न हो इसके लिए अपने लड़कों की गतिविधियों पर दस बारह साल की उम्र से नजर रखें. उसके मोबाइल, दोस्तों, उसकी आदतों पर लगातार नजर रखें और उससे लगातार बात करें. हर रेप घटना पर उससे चर्चा करें. उसे संवेदनशील बनाएं और स्त्रियों के प्रति सम्मान करना सिखाएं.

लड़कों के लिए सेशन
यह शिक्षा अमीरी, गरीबी, धर्म, जाति, क्षेत्र के भेद से परे हर मां बाप को अपने लड़कों को देनी होगी. अगर पेरेंट्स खुद अनपढ़ और जागरुक नहीं हैं तो जिम्मेदार नागरिक अपने आसपास के क्षेत्रों में, स्कूलों में लड़कों के लिए समय समय पर ऐसे सेशन आयोजित कर सकते हैं. इसके साथ ही लड़कों में अपराध के दंड के विषय में भी भय जागृत करें.

सायकायट्रिस्ट को दिखाएं
अगर कोई लड़का आपके परिवार अथवा आस पड़ोस में सेक्समेनियक है तो उसे सायकायट्रिस्ट को दिखाएं. उसे वयस्क होने के बाद म्युचुअल कंसेंट से सेक्स के बारे में समझाए. यदि कोई आवारा, शराबी लड़के आपकी नजरों में हों तो जरूर पुलिस को खबर करें.

आज पहल करें कल सुधरेगा
पल्लवी त्रिवेदी ने अपनी अपील में लिखा,यह सब आज करना शुरू करेंगे तो रातों रात कुछ नहीं बदलेगा. लेकिन लगातार प्रयास से असर जरूर दिखेगा क्योंकि कोई परिवार नहीं जानता कि अगली बार किसके घर की स्त्री इस हादसे की शिकार होगी. प्लीज इसे बेहद बेहद गंभीरता से लें.

(पल्लवी त्रिवेदी-अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, भोपाल की फेसबुक वॉल से)

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First published: November 30, 2019, 2:05 PM IST
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