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विधानसभा अध्यक्ष से मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष बोले- मैं लोधी को विधानसभा लेकर जाऊंगा

Jitendra Sharma | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 22, 2019, 5:35 PM IST
विधानसभा अध्यक्ष से मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष बोले- मैं लोधी को विधानसभा लेकर जाऊंगा
विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति से मिले नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव

विधानसभा अध्यक्ष (Assembly Speake) का कहना है, दि रिप्रेजेंटेशन ऑफ दि पीपुल एक्ट 1951 की धारा 8(3) में स्पष्ट है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे अधिक सजा हुई है तो वह अयोग्य हो जाएगा

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भोपाल. पवई विधानसभा सीट (pawai assembly seat) से चुनाव जीते बीजेपी (bjp) के प्रह्लाद लोधी (prahlad lodhi) की सदस्यता का मसला अभी भी सियासी गर्मी बनाए हुए है. आज नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव (gopal bhargav) ने भोपाल में विधान सभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति (assembly speaker n p prajapati) से मुलाक़ात की. मुलाक़ात के बाद भार्गव बोले-वो प्रह्लाद लोधी को लेकर विधानसभा जाएंगे. वहीं विधान सभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने कहा-हम न्याय संगत काम करेंगे.

विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मुलाक़ात
प्रह्लाद लोधी की सदस्यता शून्य घोषित करने के बाद विधान सभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति से मिलने शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव पहुंचे. दोनों के बीच तकरीबन 20 मिनट मुलाक़ात चली. बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने न्याय संगत काम करने की बात कही. वहीं नेता प्रतिपक्ष ने कहा- वो अगले महीने दिसंबर में हो रहे शीत सत्र में प्रह्लाद लोधी को लेकर विधानसभा जाएंगे.

विधानसभा अध्यक्ष का मत

विधानसभा अध्यक्ष का कहना है, दि रिप्रेजेंटेशन ऑफ दि पीपुल एक्ट 1951 की धारा 8(3) में स्पष्ट है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को दो साल या इससे अधिक सजा हुई है तो वह अयोग्य हो जाएगा. सिर्फ दो साल से कम सजा मिलने पर ही अपील, सुनवाई और फैसला होने तक सदस्यता बरकरार रहती है.इसका प्रावधान 8 (4) में है. इसमें 30 से लेकर 60 दिन का वक्त अपील के लिए मिलता है.

विपक्ष का आरोप
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा-राजनीतिक दुर्भावना के कारण यह फैसला लिया गया है. विधानसभा अध्यक्ष का यह निर्णय अलोकतांत्रिक और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है.
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जानिए पूरा मामला
2018 में पवई सीट से विधान सभा चुनाव जीते प्रह्लाद लोधी सहित 12 लोगों पर 2014 में अवैध रेत खनन रोकने गए रैपुरा तहसीलदार के साथ मारपीट का केस चल रहा था. भोपाल की विशेष अदालत ने उन्हें दोषी पाते हुए 2 साल की सज़ा सुनायी. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने लोधी की सदस्यता शून्य घोषित कर दी थी. इस बीच विशेष अदालत के फैसले के ख़िलाफ प्रह्लाद लोधी जबलपुर हाईकोर्ट गए. वहां अदालत ने उनकी सज़ा पर 7 जनवरी 2020 तक स्टे दे दिया. हाईकोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. बीजेपी ने भी कैवियट दायर की है.

राज्यपाल से मिले थे बीजेपी नेता
हाईकोर्ट का फैसला 2 नंवबर को आया था.उसके बाद 5 नवंबर को बीजेपी नेताओं ने राजभवन जाकर राजपाल को ज्ञापन सौंपा था. भाजपा ने कांग्रेस पर साजिश के तहत विधायक की सदस्यता रद्द करने का आरोप लगाया है. उनका कहना है,विधानसभा चुनाव में प्रह्लाद लोधी ने कांग्रेस के मुकेश नायक को 24 हजार वोट से हराया था इस लिए यह बदले की कार्रवाई है.उन्हें पहले से कोई नोटिस नहीं दिया गया बाद में कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है. कोर्ट ने लोधी को 12 दिसंबर तक हाईकोर्ट जाने का मौका दिया,उसके बाद भी उनकी सदस्यता रद्द कर दी गई.

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First published: November 22, 2019, 3:17 PM IST
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