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Lockdown Effect: पति को लकवा, बेटा बेरोज़गार, पेट पालने के लिए मां ने बेच दिया मंगलसूत्र

Lockdown Effect : परिवार के गुजारे के लिए कौशल्या को बेचना पड़ा मंगलसूत्र

Lockdown Effect : परिवार के गुजारे के लिए कौशल्या को बेचना पड़ा मंगलसूत्र

रुंधे गले से कौशल्या कहती हैं कि उनके पास अब इतना राशन भी नहीं है कि बेटी (Daughter) की बारात घर पर बुलाकर उन्हें भोजन करा सकें.

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भोपाल. लॉकडाउन (lockdown) के कारण काम धंधे बंद हैं और हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए हैं. सबके सामने रोजी-रोटी का संकट है. परिवार भुखमरी के कगार पर हैं. इन्हीं में से एक हैं भोपाल में रहने वाली कौशल्या बाई और उनका परिवार. पति को लकवा है. बेटे का काम बंद हो गया. कौशल्या की फूल की दुकान भी बंद पड़ी है और बेटी की 4 दिन बाद शादी है. ऐसे हालात में कौशल्या पाटिल को अपना मंगलसूत्र बेचना पड़ा. यह सुहाग की निशानी थी, लेकिन परिवार का पेट पालने के लिए और कोई रास्ता उनके सामने नहीं बचा था. बेटी की शादी (Marriage) के साथ अब परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है. पूरा परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है.

कौशल्या बाई भोपाल में मंत्रालय और विधानसभा भवन से चंद कदमों की दूरी पर ओम नगर में रहती हैं. वह बिरला मंदिर के बाहर प्रसाद और फूल की दुकान लगाती हैं. मंदिर बंद होने के कारण रोजी-रोटी पूरी तरह से बंद पड़ी है. सरकार की मदद भी उनके लिए नाकाफी साबित हुई. कौशल्या पाटिल ने बताया कि प्रशासन की तरफ से जो अनाज मिला था वह खत्म हो गया है. परिवार में वह अकेली कमाने वाली है. पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन पर है. इसलिए उनके सामने मंगलसूत्र बेचने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.



कुछ दिनों तक ही चला सरकारी अनाज
कौशल्या के परिवार में उनके पति, एक बेटी और बेटा बहू और दो पोती हैं. ओम नगर की बस्ती में पूरा परिवार साथ रहता है. पति को लकवा मार गया था, इसलिए वो लंबे समय से बिस्तर पर हैं. लॉकडाउन की वजह से उनके बेटे की मजदूरी बंद हो गयी और वो भी बेरोजगार हो गया है. इतने दिन तक परिवार ने जैसे तैसे गुजारा किया. सरकार की ओर से दिया गया अनाज कुछ ही दिन तक चल पाया.अब उनके सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं था, इसलिए पेट पालने के लिए उन्होंने अपना मंगलसूत्र छह हजार रुपए में बेच दिया. बेटे को रोजगार नहीं मिल रहा है. इधर बिरला मंदिर के पास छोटी सी प्रसाद फूल की दुकान भी बंद पड़ी है.

14 जून को बेटी की शादी
14 जून को बेटी की शादी है. कौशल्या ने सोचा था कि 6000 रुपए में कुछ पैसे वो शादी के लिए बचा लेंगी, लेकिन सारा पैसा राशन पर ही खर्च हो गया. राशन भी अब खत्म होने को है. आगे क्या होगा कुछ पता नहीं. उनके सामने अपनी और सबकी ज़िंदगी बचाने की चुनौती है. उनकी रातों की नींद उड़ गई है. अब उनके पास बस सोने का एक छोटा सा गहना बचा है. उसका सौदा भी उन्होंने तीन हजार रुपए में तय कर लिया है. उस पैसे की मदद से कौशल्या अपनी बेटी की शादी आर्य समाज मंदिर में करेंगी. भरे गले से कौशल्या कहती हैं कि मेरे पास अब इतना राशन भी नहीं है कि बेटी की बारात घर पर बुलाकर उन्हें भोजन करा सकें. इसलिए अब आर्य समाज मंदिर से शादी कर अपनी बेटी को विदा करेंगी.

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