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MP LOK SABHA ELECTION RESULT 2019 : 'भगवा' अपनाना और मिर्ची यज्ञ करवाना भी 'दिग्गी राजा' के काम न आया

MP LOK SABHA ELECTION RESULT 2019 : 'भगवा' अपनाना और मिर्ची यज्ञ करवाना भी 'दिग्गी राजा' के काम न आया

दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)

कांग्रेस की ओर से दिग्विजय सिंह के पक्ष में कोई बड़ा नेता भोपाल नहीं आया. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पूरे प्रदेश में घूमे, लेकिन भोपाल में चुनाव प्रचार नहीं किया.

    भोपाल लोकसभा सीट चुनाव की बिसात बिछने के दिन से लगातार चर्चा में है. बीजेपी के इस गढ़ में कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह को चुनाव मैदान में उतार कर पहले ही इसे सुर्खियों में ला दिया था. उसके बाद बीजेपी की ओर से बहुत देर और सोच-विचार कर उतारी गईं बीजेपी प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर के बयानों के कारण भी भोपाल संसदीय सीट सुर्ख़ियों में बनी रही.

    10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह एक बड़ा चैलेंज मानकर, लेकिन बेमन से चुनाव मैदान में उतरे थे. वह अपनी परंपरागत सीट राजगढ़ से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन सीएम कमलनाथ ने ये कहकर उन्हें भोपाल की ओर भेज दिया कि पार्टी के बड़े नेताओं को कठिन सीट से चुनाव लड़ना चाहिए. दिग्विजय सिंह ने इस चैलेंज को स्वीकार किया और चुनाव अभियान पर निकल पड़े. वो मार्च महीने के आख़िरी दिन थे.

    संघ ने दिया था दखल
    बीजेपी ऊपरी तौर पर भले ही दिग्विजय सिंह को तवज्जो न देती हो, लेकिन उनके चुनाव मैदान में उतरने से अंदरखाने खलबली सी मची रही. कई नाम उछले औऱ उछाले गए. कई दिग्गजों को आगे किया गया, लेकिन बात नहीं बनी. आखिर में संघ की पसंद से आनन-फानन में प्रज्ञा ठाकुर को बीजेपी की सदस्यता दिलाई गई और उन्‍हें भोपाल से टिकट दिया गया. दिग्विजय सिंह को बड़ी चुनौती मानते हुए पार्टी ने अच्छे रिपोर्ट कार्ड के बावजूद अपने मौजूदा सांसद आलोक संजर का टिकट काट दिया.

    दिग्विजय सिंह ने डेढ़ महीना से कुछ ज़्यादा वक्त तक दिन-रात एक कर दिया. बेहद प्लानिंग के साथ चुनाव प्रचार का खाका तैयार किया गया. करीब आधा दर्जन समर्थक मंत्री और विधायक भोपाल में उनका प्रचार अभियान संभाले रहे. खुद मंत्री पुत्र जयवर्धन और विधायक भाई लक्ष्मण सिंह भी मैनेजमेंट देखते रहे. पूरे लोकसभा क्षेत्र की दिग्विजय सिंह ने पदयात्रा की. चिलचिलाती धूप और गर्मी में वह पैदल एक-एक इलाके में जनसंपर्क करने निकले.

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    भोपाल के दो विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बहुल हैं. भोपाल मध्य और उत्तर. इन दोनों में तो कांग्रेस को लीड मिली लेकिन बाक़ी 6 में दिग्विजय सिंह पिछड़े रहे. इसकी कई वजह दिखती हैं. भोपाल बीजेपी का गढ़ है. यहां लगातार 30 साल से ज्यादा वक़्त से बीजेपी का कब्ज़ा है. यहां प्रत्याशी नहीं सिर्फ पार्टी मायने रखती है.

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    एक दूसरी बड़ी वजह सरकारी कर्मचारी भी हैं. दिग्विजय सिंह 10 साल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. उनका इस शहर और लोगों से लगातार जीवंत संपर्क तो बना रहा लेकिन कर्मचारी विरोधी उनके फैसलों को याद किया जाता रहा. हालांकि चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने दो बार सरकारी कर्मचारियों से मुलाक़ात कर उनसे माफ़ी भी मांगी. दिग्विजय सिंह ने अपने शासन में दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की सेवा ख़त्म कर दी थी. उस वक्त करीब 40 हज़ार कर्मचारी उससे प्रभावित हुए थे. उस एक फैसले का असर उनके परिवार और कई पीढ़ी प्रभावित हुए थे वो पीढ़ी अब भी भोपाल में है. सरकारी कर्मचारियों का डीए और कई विभाग खत्म कर उन्हें मर्ज करने का फैसला भी दिग्विजय सिंह ने किया था. लगता है जनता ने अब उस पर अपना फैसला सुनाया.

    मोदी को लेकर अंडर करंट रहा. प्रज्ञा ठाकुर भले ही आपत्ति जनक बयान देकर विवाद खड़े करती रहीं, लेकिन लगता है जनता ने उन बातों को नज़रअंदाज़ कर मोदी और विकास के नाम पर वोट दिया. दिग्विजय सिंह लगातार संघ को अपने निशाने पर रखते हैं. भगवा आतंकवाद, हिंदुत्व जैसे मुद्दे लगातार उठते रहे. भोपाल में मुस्लिम मतदाता करीब 5 लाख और हिंदू 12 लाख हैं. वोटों को ध्रुवीकरण हुआ.
    हालांकि दिग्विजय सिंह ने मंदिर-मजार, गुरुद्वारा और सभी धर्मों के घर्म गुरुओं से मिलकर अपने सर्व धर्म

    समभाव होने का मैसेज जनता को दिया लेकिन. अपने पूरे प्रचार के दौरान उन्होंने हिंदू-मुस्लिम-सिख ईसाई के नारे लगाए. साथ ही हिंदू मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर-मंदिर जाकर हिंदुत्व होने का संदेश भी दिया. बार-बार नर्मदा हर का नारा लगाया. उनके समर्थन में साधु-संतों की फौज उतरी. कम्प्यूटर बाबा ने कमान संभाली. लेकिन भगवा पहने साध्वी प्रज्ञा के सामने ये मैसेज मतदाता ने स्वीकार नहीं किया.

    कांग्रेस की ओर से उनके पक्ष में कोई बड़ा नेता या प्रचारक नहीं आया. पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पूरे प्रदेश में घूमे लेकिन भोपाल नहीं आए. प्रियंका का रोड-शो भी मालवा में कराया गया लेकिन भोपाल से दूरी बनी रही. जबकि प्रज्ञा ठाकुर के पक्ष में खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भोपाल में रोड-शो कर माहौल बनाया.
    दिग्विजय सिंह ने भोपाल के विकास के लिए विजन डॉक्यूमेंट जारी किया. लेकिन हिंदुत्व, राष्ट्रवाद की आंधी में वो ठहर नहीं सका. बीजेपी का मज़बूत संगठन और सुनियोजित रणनीति उसकी रीढ़ है. कांग्रेस उसके आगे टिक नहीं पायी.

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    Tags: Chambal Madhya Pradesh Lok Sabha Elections 2019, Digvijay singh, Lok Sabha Election Result 2019, Sadhvi Pragya

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