72 की उम्र में रोजाना 40 Km. चलकर, 18 घंटे प्रचार करने वाले दिग्विजय सिंह के साथ एक दिन
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भोपाल लोकसभा सीट पर पूरे देश की नजर है. बीजेपी के इस अजेय किले को भेदने के लिए दिग्विजय सिंह पूरा जोर लगा रहे हैं. कांग्रेस के लिए ये सीट अब प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है.

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भोपाल लोकसभा सीट पर पूरे देश की नजर है. बीजेपी के इस अजेय किले को भेदने के लिए दिग्विजय सिंह पूरा जोर लगा रहे हैं. कांग्रेस  के लिए ये सीट अब प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गई है. प्रचार के अंतिम चरण में दिग्विजय सिंह ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश कांग्रेस के धाकड़ नेता दिग्विजय सिंह के साथ चुनाव प्रचार के दौरान पूरा एक दिन बिताने का मौका मिला न्यूज 18 संवाददाता शिफाली को.

इस दौरान भोपाल की तंग गलियों में घूम-घूमकर दिग्विजय सिंह ने अपने पक्ष में वोट मांगा. रमजान के महीने में अमूमन सूनी रहने वाली गलियां भी इन दिनों बीजेपी-कांग्रेस के चुनाव प्रचार से गुलजार है. इसी क्रम में कड़ी धूप और गर्मी की चिंता किए बगैर कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह 72 साल की उम्र में भी पूरा भोपाल पैदल-पैदल नाप रहे हैं.

बीजेपी की आंधी में भी कांग्रेस के हाथ का साथ नहीं छोड़ने वाली ये उत्तर भोपाल सीट का इलाका कांग्रेस की बेहद भरोसेमंद सीट है. दिग्विजय सिंह यहां प्रचार के लिए आखिरी दिनों में आए हैं. जिन तंग गलियों में शाम ढले सियासी महफिलें सजती हैं, वहां का नजारा बदला हुआ है. कांग्रेस के झंडे, बैनर, बैंड-बाजे के साथ दिग्विजय का प्रचार संपन्न हुआ.



दिग्विजय के नाम के लग रहे नारे
बरसते फूलों के बीच से गुजरते दिग्विजय सिंह का प्रचार कुछ इस अंदाज में हुआ "गली-गली से नाता है सरकार चलाना आता है." जिस 10 साल के शासनकाल को बीजेपी बंटाधार कहती है, कांग्रेस के कार्यकर्ता उन्हीं 10 सालों का वास्ता देते हैं. साथ ही कहते हैं कि एमपी और भोपाल की तरक्की की नींव तो दिग्विजय राज में ही रखी गई थी. इसमें खास जिक्र उनके पैदल प्रचार को लेकर होता है. इसके बाद पीर गेट भवानी चौक से शुरू हुआ दिग्विजय सिंह का पैदल रोड शो बढ़ता चला गया.

पुरानी गलियों में निकल आती है 20-25 साल पुरानी दोस्ती
दिग्विजय सिंह कोशिश करते हैं कि गली में मुस्कुरा कर हाथ जोड़े खड़े हर वोटर का अभिवादन कर सकें. इस दौरान कहीं 20-25 साल पुरानी दोस्ती भी निकल आती है. बता दें कि उत्तर भोपाल में आरिफ अकील की निगरानी में दिग्गी का रोड शो होता है. पूरे रास्ते दिग्विजय पर फूल बरसाए जाते हैं.

मालूम हो कि भोपाल जिस गंगा-जमुनी तहज़ीब के लिए जाना जाता है, वो तहज़ीब इन्हीं पुराने भोपाल के इलाके में परवान चढ़ी है. धर्म युद्ध के साथ भोपाल में वोटों के ध्रुवीकरण का प्रयोग कितना सफल होगा, ये खास उत्तर और मध्य सीट पर ही दिखाई देगा. दिग्विजय सिंह भी यहां जान फूंक रहे हैं. वहीं इस दौरान इतवारा में दिग्विजय सिंह टी ब्रेक के लिए रुके और लोगों से उनकी दिक्कतों के बारे में पूछा.

हिंदुत्व भोपाल इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा
यूं तो रमजान के दिनों में लोग घर से बाहर कम ही निकलते हैं, लेकिन निकलते हैं तो मजमा लग जाता है. हिंदुत्व के मुद्दे पर लड़े जा रहे भोपाल के चुनाव का असर मुस्लिम बहुल इलाके इतवारा में अक्सर दिखाई देता है. यहां मंच पर दिग्विजय सिंह के साथ एक तरफ क्षेत्र के विधायक आरिफ मसूद, तो दूसरी तरफ एक साधू मौजूद थे, जो दिग्विजय सिंह को विजय श्री का आर्शीवाद देने आए थे.

प्रचार के दौरान दिग्विजय की तस्वीरों के साथ शंकरदयाल शर्मा की तस्वीरों वाली कमीज भी देखने मिली. शंकरदयाल शर्मा कांग्रेस के टिकट पर भोपाल से चुनाव जीते थे और संसद में गए थे. उन्हीं गलियों से गुजर रहे थे तो दिग्विजय दादा भाई यानि शंकरदयाल शर्मा के पुश्तैनी घर में जाना भी नहीं भूले. हिंदुत्व भोपाल के इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा है.

हनुमान मंदिर में ढोक देना नहीं भूलते दिग्गी
पदयात्रा के दौरान दिग्गी हनुमान मंदिर में ढोक देना नहीं भूलते. बाकी मस्जिदों की अज़ान के अदब में सजदा तो है ही. आग उगलते सूरज की गर्मी में उम्मीदवार को इतना आत्मविश्वास तो दे ही देते हैं कि उन्हें इम्तिहान मुश्किल नहीं लगता. इस दौरान पन्ना से आए एक जनाब दिग्विजय सिंह को युग पुरुष बताया, तो वहीं खड़े दूसरे जनाब ने आईना दिखाते हुए कहा कि कांग्रेस ने इतने सालों में क्या काम किया. इस दौरान मोदी समर्थकों ने भी पूरी आस्था और विश्वास के साथ मोदी-मोदी के नारे लगाए.

23 मार्च से भोपाल के चुनाव मैदान में उतरे दिग्विजय सिंह दिन के 16-18 घंटे चुनाव प्रचार में गुजार रहे हैं. समर्थक बताते हैं कि दिग्विजय हर दिन प्रचार के लिए 40 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं.

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