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भोपाल में दिग्विजय सिंह और प्रज्ञा ठाकुर के बीच ऐतिहासिक मुकाबला

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 11, 2019, 3:22 PM IST
भोपाल में दिग्विजय सिंह और प्रज्ञा ठाकुर के बीच ऐतिहासिक मुकाबला
file photo

1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव वो आखिरी चुनाव हैं जब कांग्रेस ने भोपाल सीट पर विजय पताका फहराई थी.

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1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए लोकसभा चुनाव वह आखिरी चुनाव था, जब कांग्रेस ने भोपाल सीट पर विजय पताका फहराया था. कांग्रेसी नेता और सामाजिक कार्यकर्ता रहे केएन प्रधान यहां जीतकर संसद पहुंचे थे. उसके बाद 1989 के चुनावों से आजतक भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर अबाध कब्जा बनाए रखा है.

इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बहुत बड़ा दांव खेला है. पार्टी ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को इस सीट पर सूखा समाप्त किया जा सके. दिग्विजय सिंह राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. माना जाता है कि आज भी मध्य प्रदेश की राजनीति में दिग्विजय सिंह की दखल काफी ज्यादा है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान जब ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच ताकत की जोर-आज़माइश चल रही थी तो वह दिग्विजय सिंह ही थे जिन्होंने दोनों के बीच सामन्जस्य बनाने का काम किया.

साधवी प्रज्ञा की एंट्री
पिछले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के नेता आलोक संजर ने जीत हासिल की थी, लेकिन पार्टी ने इस बार उनका टिकट काट दिया है. इस सीट से बीजेपी ने मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी प्रज्ञा ठाकुर को चुनावी मैदान में उतारा है. कहा जा रहा है कि प्रज्ञा ठाकुर बीजेपी को सिर्फ भोपाल सीट पर नहीं, बल्कि आस-पास की कई सीटों पर अपना प्रभाव दिखाएंगे. प्रज्ञा ठाकुर ने आते ही दिग्विजय सिंह पर आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं. वह पहले भी उन्हें निशाने पर लेती रही हैं. उम्मीदवारी घोषित होने के बाद से प्रज्ञा ठाकुर ने कई साक्षात्कार दिए हैं जिसमें उन्होंने हिंदु आतंकवाद के तमगे को नकारा है.

भोपाल में चुनाव प्रचार के दौरान प्रज्ञा ठाकुर


हालांकि दिग्विजय सिंह की तरफ से प्रज्ञा को लेकर कोई बयान नहीं दिया गया है. दिग्विजय सिंह इस बात को लेकर सतर्क दिख रहे हैं कि उनकी तरफ से प्रज्ञा ठाकुर पर की गई कोई भी बयानबाजी का असर राज्य से बाहर भी नकारात्मक तौर पर पड़ सकता है.

क्या हैं चुनावी समीकरणभोपाल संसदीय सीट पर अब तक हुए 16 चुनाव में कांग्रेस को छह बार जीत हासिल हुई है. यहां साढ़े 19 लाख मतदाता हैं. इनमें 4 लाख मुस्लिम, 3.5 लाख ब्राह्मण, 4.5 पिछड़ा वर्ग, 2 लाख कायस्थ, 1.5 क्षत्रिय हैं. इस सीट में आठ विधानसभा सीटें आती हैं. हाल में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 5 सीटें जीती थीं, जबकि कांग्रेस के हिस्से सिर्फ तीन सीटें आई थीं.

चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो 1989 से 99 के बीच हुए चार चुनावों में बीजेपी के सुशील चंद्र वर्मा ने जीत हासिल की थी. 1999 में यहां से बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती जीती थीं. 2004 और 2009 में बीजेपी के कैलाश जोशी ने जीत हासिल की थी. 2014 में आलोक संजर जीते थे. ऐसे में इस सीट पर कांग्रेसी दिग्गज दिग्विजय के लिए सिर्फ प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ना ही चुनौती नहीं है, उन्हें आंकड़ों से भी लड़ाई लड़नी होगी जो उनकी तरफ अभी नहीं दिखाई दे रहे हैं.

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First published: April 22, 2019, 12:35 PM IST
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