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स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में एमपी का देश में तीसरा स्थान

स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में एमपी का देश में तीसरा स्थान

लड़कियों को छात्रवृत्ति के साथ ही मुफ्त किताबें, गणवेश और साइकिल देने के बावजूद वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश का स्थान स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में देश में तीसरा है. इस सूची में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और दूसरे क्रम पर राजस्थान राज्य हैं.

लड़कियों को छात्रवृत्ति के साथ ही मुफ्त किताबें, गणवेश और साइकिल देने के बावजूद वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश का स्थान स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में देश में तीसरा है. इस सूची में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और दूसरे क्रम पर राजस्थान राज्य हैं.

लड़कियों को छात्रवृत्ति के साथ ही मुफ्त किताबें, गणवेश और साइकिल देने के बावजूद वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश का स्थान स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में देश में तीसरा है. इस सूची में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और दूसरे क्रम पर राजस्थान राज्य हैं.

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    लड़कियों को छात्रवृत्ति के साथ ही मुफ्त किताबें, गणवेश और साइकिल देने के बावजूद वर्ष 2016 में मध्य प्रदेश का स्थान स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों की संख्या के मामले में देश में तीसरा है. इस सूची में पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश और दूसरे क्रम पर राजस्थान राज्य हैं.

    राज्यों में शिक्षा के स्तर के बारे में वर्ष 2016 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, ‘‘11 से 14 वर्ष के बीच की आयु की लड़कियों की संख्या देश के कुछ राज्यों में 8 प्रतिशत से भी अधिक है. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश 9.9 प्रतिशत तथा राजस्थान 9.7 प्रतिशत के साथ पहले व दूसरे स्थान पर हैं, जबकि मध्य प्रदेश इस सूची में तीसरे स्थान पर है यहां 8.5 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं.’’

    प्रथम एजुकेशन फांउडेशन द्वारा हाल ही में नई दिल्ली में इस रिपोर्ट को जारी किया गया है. फाउंडेशन के प्रदेश प्रमुख सज्जन सिंह शेखावत ने बताया, ‘‘मध्य प्रदेश में वर्ष 2014 के दौरान स्कूल नहीं जाने वाली लड़कियों का प्रतिशत 6.2 था, जबकि वर्ष 2016 में यह बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गया है.’’  मध्य प्रदेश में लगभग 1.22 लाख स्कूल हैं जिनमें से 83,962 प्राथमिक, 30,449 माध्यमिक, 3849 हायर सेंकेन्डरी तथा 4764 हाई स्कूल स्तर के हैं.

    रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के स्कूलों में बुनियादी एवं शैक्षणिक सुविधाएं कमजोर हैं. प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में 7 से 10 वर्ष के बीच आयु समूह की 2.9 प्रतिशत लड़कियां स्कूल नहीं जाती हैं, जबकि 15 से 16 वर्ष के बीच की आयु समूह की 29 प्रतिशत लड़कियां गत वर्ष स्कूल नहीं गईं.

    रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया कि प्रदेश की कक्षा आठ के 2.9 प्रतिशत विद्यार्थी अक्षर तक नहीं पढ़ सकते हैं, जबकि 13.5 प्रतिशत विद्यार्थी केवल पहली कक्षा का ही पाठ पढ़ सकते हैं. इसके अलावा कक्षा आठ की 64.3 प्रतिशत विद्यार्थी केवल कक्षा दो में पढ़ाने जाने वाले अक्षरों को ही पढ़ सके इससे उपर की कक्षा के नहीं.

    रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कक्षा पांच के 6.7 प्रतिशत और कक्षा आठ के 1.6 प्रतिशत विद्यार्थी एक से नौ तक अंक पहचानने में भी असमर्थ रहे. इसी प्रकार कक्षा आठ के 8.1 प्रतिशत विद्यार्थी अंग्रेजी के केपीटल अक्षर पढ़ने में असमर्थ रहे. पांचवी कक्षा के विद्यार्थियों में यह प्रतिशत 18.4 था.

    प्रदेश के स्कूली शिक्षा राज्य मंत्री दीपक जोशी ने कहा कि वह यह रिपोर्ट देखेगें. उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश में सभी बच्चों के स्कूल में दाखिले के लिये हम ‘स्कूल चलें अभियान’ चला रहे हैं. सरकारी स्कूलों में लड़कियों के दाखिले के लिये हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं.’’

    प्रथम फाउंडेशन की रिपोर्ट से भी यह तथ्य सामने आता है कि प्रदेश में स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों (6 से 14 उम्र के) की संख्या वर्ष 2014 से 2016 के बीच बढ़ी है. मध्यप्रदेश में यह 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 4.4 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 2 प्रतिशत से बढ़कर 2.8 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 4.9 प्रतिशत से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हुई है.

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