MP By-Election: कमलनाथ ने दी CM शिवराज सिंह को चुनौती, BJP बोली- भारी पड़ेगा

भाजपा और कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव बेहद अहम है.
भाजपा और कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव बेहद अहम है.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-Election) को लेकर छिड़ चुके महासंग्राम में नेता एक दूसरे को विकास के मुद्दे पर बहस की खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव (By-Election) को लेकर छिड़ चुके महासंग्राम में नेता एक दूसरे को विकास के मुद्दे पर बहस की खुली चुनौती देते नजर आ रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chauhan) को बहस की खुली चुनौती दी है. कमलनाथ ने चुनौती देते हुए कहा कि शिवराज सिंह चौहान 15 साल के शासन का हिसाब दें या फिर मुझसे 15 माह की सरकार के कार्यकाल पर बहस कर लें. कमलनाथ ने शिवराज को खुली चुनौती देते हुए कहा कि, जनता के सामने मेरे साढ़े 11 महीने का हिसाब जनता के सामने रख देता हूं और आप अपने 15 साल के शासनकाल का हिसाब जनता के सामने रख दीजिए. जनता खुद फैसला कर लेगी.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ बीते शनिवार को देवास के हाटपिपलिया में चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे थे. कमलनाथ ने एक बार फिर बीजेपी पर सौदेबाजी कर चुनी हुई सरकार को गिराने का आरोप लगाया. वहीं कमलनाथ के सीएम शिवराज को बहस की चुनौती देने पर बीजेपी भी भड़क उठी है. शिवराज सरकार के मंत्री व बीजेपी के वरिष्ठ विधायक अरविंद सिंह भदोरिया ने कमलनाथ को चुनौती देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से तो बाद में कमलनाथ पहले उनसे बहस में शामिल हो जाएं, तो उतने में ही कांग्रेस सरकार की विफलताओं को गिना दिया जाएगा.

कांग्रेस पर भारी पड़ेगा
मंत्री अरविंद सिंह भदोरिया के मुताबिक शिवराज सरकार के 5 महीने के फैसले ही कमलनाथ सरकार के 15 महीने पर भारी साबित होंगे. वहीं शिवराज सरकार के मंत्री की कमलनाथ को बहस की चुनौती देने पर कांग्रेस ने भी जवाबी हमला बोला और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने साफ कर दिया कि कमलनाथ ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनौती दी है. बहस बराबरी वालों में होती है और ऐसे में अरविंद सिंह भदोरिया का बीच में बहस की चुनौती देना कोई मायने नहीं रखता. कांग्रेस सरकार ने 15 महीने में जो बड़े फैसले किए हैं वह शिवराज सरकार के 15 साल के कार्यकाल पर भारी हैं और ऐसे में यदि शिवराज चुनौती स्वीकार पर हैं तो जनता तय कर देगी किसका कार्यकाल बेहतर रहा है.
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