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'कमलनाथ कांग्रेस नेता नहीं, मेरे तीसरे बेटे हैं'

'कमलनाथ कांग्रेस नेता नहीं, मेरे तीसरे बेटे हैं'

कमलनाथ और राजीव गांधी
(फोटो क्रेडिट- कमलनाथ के ट्विटर हैंडल से)

कमलनाथ और राजीव गांधी (फोटो क्रेडिट- कमलनाथ के ट्विटर हैंडल से)

Political Journey of Kamalnath: पहली बार जब कमलनाथ चुनाव लड़ रहे थे तो इंदिरा गांधी उनके लिए प्रचार करने छिंदवाड़ा पहुंची थीं. कमलनाथ को तीसरा बेटा इंदिरा गांधी ने यूं ही नहीं कह दिया था..

    यह वो दौर था जब देश 'इंडिया इज इंदिरा और इंदिरा इज इंडिया' के नारे सुन चुका था', आपातकाल का वह दौर भी निकल चुका था जिसमें देश बदलती हुई राजनीति का गवाह बना था. वो इंदिरा गांधी सत्ता से बाहर हो चुकी थीं जो गांधी-नेहरु विरासत की ध्वज पताका देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में लहरा चुकी थीं.

    तारीख थी 13 दिसंबर 1980, नारा बदल चुका था, 'इंदिरा लाओ देश बचाओ' के नारे के साथ कांग्रेस फिर से धूल झाड़कर खड़ी होने की कोशिश में थी. केंद्र में जनता पार्टी की सरकार थी. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में एक मंच सजा हुआ था, माइक पर कांग्रेस की अध्यक्ष इंदिरा गांधी मंच पर ही बैठे एक युवा उद्यमी की तरफ इशारा करते हुए कहती हैं, 'ये सिर्फ कांग्रेस नेता नहीं हैं, राजीव और संजय के बाद मेरे तीसरे बेटे हैं!'

    दरअसल, पहली बार जब कमलनाथ चुनाव लड़ रहे थे तो इंदिरा गांधी उनके लिए प्रचार करने छिंदवाड़ा पहुंची थीं. कमलनाथ को तीसरा बेटा इंदिरा गांधी ने यूं ही नहीं कह दिया था. कमलनाथ उसी छिंदवाड़ा से पहली बार सांसद बने, तबसे लागातर 2018 में नौवीं बार छिंदवाड़ा से ही सांसद बनते रहे. और ताउम्र इंदिरा गांधी को वे 'मां' ही कहते रहे. इंदिरा के बाद संजय गांधी और राजीव गांधी के करीबी रहे. उसके बाद सोनिया गांधी के विश्वासपात्र बने रहे.

    गांधी परिवार से नजदीकी
    कमलनाथ तब दून कॉलेज में पढ़ते थे जब उनकी दोस्ती संजय गांधी से हुई थी. राजनीति में आने से पहले उन्होंने सेंट जेवियर कॉलेज कोलकाता से स्नातक किया. संजय गांधी उन्हें राजनीति में लेकर आए. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उनकी दोस्ती खूब जमी. कभी वे गांधी परिवार की कार चलाते दिखते तो कहीं किसी सभा में संजय गांधी के साथ दिखते. आपातकाल के दौर में वे गांधी परिवार के साये के रूप में बने रहे. यहां तक कि नारे भी लगे, 'इंदिरा के दो हाथ, संजय गांधी और कमलनाथ'

    संजय गांधी के साथ कमलनाथ (फोटो क्रेडिट- फेसबुक से साभार)


    संजय गांधी के लिए जज से लड़ गए और जेल गए!
    एक किस्सा तब का भी मशहूर है जब वे संजय गांधी के लिए जानबूझकर जेल चले गए. 1979 में जनता पार्टी की सरकार के दौरान संजय गांधी को एक मामले में कोर्ट ने तिहाड़ जेल भेज दिया. तब इंदिरा संजय की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित थीं. कहा जाता है कि तब कमलनाथ जानबूझकर एक जज से लड़े. जज ने उन्हें भी अवमानना के चलते सात दिन के लिए तिहाड़ भेज दिया, जहां वे संजय गांधी के साथ रहे.

    साल बदला, समय बदला, तारीख वही 13 दिसंबर! राहुल गांधी के हाथ में हाथ डालकर कमलनाथ भावुक होकर कहते हैं कि आज ही की तारीख के दिन इंदिरा गांधी ने मुझे अपना बेटा कहा था. और उसी तारीख पर राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री के रूप में कमलनाथ के नाम पर मुहर लगा दी.

    इंदिरा गांधी की मौत के बाद कमलनाथ (फोटो क्रेडिट- कमलनाथ के ट्विटर हैंडल से)


    जब मुख्यमंत्री बनते बनते रह गए थे
    साल था 1993. कमलनाथ के मुख्यमंत्री बनने की चर्चा जोरों पर थी. लेकिन ऐन मौके पर कांग्रेस के दिग्गज अर्जुन सिंह ने दिग्विजय सिंह का नाम आगे कर दिया था. और कमलनाथ मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे. 1996 में कमलनाथ पर हवाला कांड के आरोप भी लगे थे. उस वक्त पार्टी ने उनकी पत्नी को टिकट दिया, वे चुनाव जीत तो गईं लेकिन अगले साल उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद 1997 के उपचुनाव में कमलनाथ फिर चुनाव लड़े लेकिन सुंदरलाल पटवा ने उन्हें हरा दिया था. यही एक चुनाव था जब कमलनाथ हारे थे.

    संगठन में भी रहे सक्रिय
    1968 में युवक कांग्रेस में प्रवेश के बाद कमलनाथ कांग्रेस संगठन में भी कई पदों पर रहे. 1970 से 1981 तक अखिल भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय परिषद के सदस्य रहे. 1979 में युवक कांग्रेस की ओर से महाराष्ट्र के पर्यवेक्षक, 2,000 2018 तक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और वर्तमान में मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं.

    केंद्र में कई बार मंत्री भी रहे
    कमलनाथ पहली बार 1991 में केंद्र में मंत्री बने. 1991 से 1994 तक केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री रहे. 1995 से 1996 केंद्रीय कपड़ा मंत्री, 2004 से 2008 तक केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, 2009 से 2011 तक केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री, 2012 से शहरी विकास मंत्री और 2014 तक संसदीय कार्य मंत्री रहे.

    चुनावी प्रबंधन मास्टर और सफल उद्यमी
    कमलनाथ के बारे में यह भी कहा जाता है कि वे चुनावी प्रबंधन मास्टर तो हैं ही एक सफल उद्यमी भी हैं. देश के बड़े-बड़े उद्योग घरानों से उनके नजदीकी संबंध हैं. उन्होंने करीब 600 से अधिक विदेश यात्राएं की हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ की साधारण सभा से लेकर अंतर्राष्ट्रीय संसदीय सम्मेलनों में सम्मिलित होते रहे हैं.

    2014 में आमचुनाव के दौरान कमलनाथ ने जो हलफनामा चुनाव आयोग को दिया था उसके मुताबिक उनके पास लगभग 207 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति है. कमलनाथ और उनके परिवार के स्वामित्व में 23 कंपनियां भी हैं. कमलनाथ देश के पांच सबसे अमीर सांसदों में शामिल हैं. छिंदवाड़ा में कमलनाथ की अलीशान कोठी करीब 10 एकड़ में फैली हुई है. हालांकि उनका सारा कारोबार दोनों बेटे बकुलनाथ और नकुलनाथ संभालते हैं.

    इस साल 26 अप्रैल को जब कमलनाथ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया तो कहा गया कि वे जननेता नहीं हैं, चुनाव में विजय कैसे मिलेगी. लेकिन कमलनाथ ने कांग्रेस के सब गुटों को एकजुट कर जो चुनावी प्रबंधन दिखाया वो उनके राजनीतिक कैरियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई.

    मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद दिल्ली से लौटे भोपाल एयरपोर्ट पर (Photo- News18)


    और फिर वही 13 दिसंबर की रात
    दिल्ली में मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान के बाद 13 दिसंबर की रात जब वे राहुल गांधी से मिलकर सिंधिया के साथ भोपाल पहुंचे तो एयरपोर्ट पर उनके समर्थकों का ऐसा हुजूम था कि मानों वो एयरपोर्ट पर कोई चुनावी सभा करने जा रहे हों. वहां से निकलकर कमलनाथ सीधा कांग्रेस दफ्तर पहुंचे जहां कांग्रेस विधायक दल की बैठक में उनके नाम पर औपचारिक मुहर लगी. विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उन्होंने कहा, 'यह पद मेरे लिए मील का पत्थर है. मेरा समर्थन के लिए सभी का धन्यवाद, हम अपना वचन पूरा करेंगे.'

    इसे भी पढ़ें- नौ बार सांसद रह चुके हैं कमलनाथ, ऐसा है राजनीतिक सफर

    Tags: Assembly Election 2018, Assembly elections, Indira Gandhi, Kamal nath, Madhya Pradesh Assembly Election 2018, Madhya pradesh elections, Madhya pradesh news, Rahul gandhi, Rajiv Gandhi, Sanjay gandhi, Sonia Gandhi

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