एमपी चुनाव: परिणाम से पहले कांग्रेस-बीजेपी हाईकमान ने मांगी प्रत्याशियों की रिपोर्ट

Makarand Kale | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 4, 2018, 6:16 PM IST
एमपी चुनाव: परिणाम से पहले कांग्रेस-बीजेपी हाईकमान ने मांगी प्रत्याशियों की रिपोर्ट
सांकेतिक तस्वीर

Madhya Pradesh Election: खास बात ये है कि इस रिपोर्ट में कई बड़े नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की शिकायत भी है. ये वो नाम हैं जिन्होंने पार्टी में रहकर या तो प्रत्याशी का समर्थन नहीं किया या फिर विरोधी गुट को फायदा पहुंचाया

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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणामों का इंतज़ार दोनों पार्टियां कर रही हैं इस बीच दोनों दलों के प्रत्याशियों ने हाईकमान को अपनी अपनी रिपोर्ट सौंपना शुरु कर दिया है. खास बात ये है कि इस रिपोर्ट में कई बड़े नेताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं की शिकायत भी है. ये वो नाम हैं जिन्होंने पार्टी में रहकर या तो प्रत्याशी का समर्थन नहीं किया या फिर विरोधी गुट को फायदा पहुंचाया. अब दोनों पार्टियां इन नेताओं कि फेहरिस्त तैयार कर रही है जिसपर कार्रवाई की तैयारी है.

दरअसल, चुनावों में सरकार चाहे जिसकी बने लेकिन पूरे चुनावों में बागियों और विभीषणों से दोनों पार्टियां जूझती दिखीं. मतदान के खत्म होने के बाद भी सियासत लगातार जारी है. हाईकमान को दी गई रिपोर्ट में स्थानीय प्रत्याशियों ने बागियों और विभीषणों की शिकायत की है. (इसे पढ़ें- दिल्ली पहुंची EVM की शिकायत, मुख्य चुनाव आयुक्त से मिले कमलनाथ)

बीजेपी और कांग्रेस दोनों की ओर से दी गई. शिकायतों में बड़े मंत्रियों सांसदों के भी नाम है. खास बात ये है कि बीजेपी में इस तरह की शिकायतों की संख्या कांग्रेस के मुकाबले ज़्यादा है. बीजेपी में करीब 60 सीटों पर इस तरह से असहयोग और भीतरघात की शिकायतें सामने आई हैं.

1- जानकारी के मुताबिक नंद कुमार चौहान, अर्चना चिटनिस, सूर्यप्रकाश मीणा, कुसुम मेहदेले के नाम शिकायत में दर्ज हैं

2- बीजेपी की ओर से श्योपुर, सुमावली, सुरखी, शहपुरा, विजयराघोगढ़, वारासिवनी, होशंगाबाद समेत 60 सीटों पर शिकायत हुई है
3- कांग्रेस की ओर भोपाल, जबलपुर, पन्ना समेत कुछ विधानसभाओं में शिकायत की गई है

मामले में बीजेपी का कहना है कि अगर कोई भितरघात करता है औऱ अगर बागी के साथ खड़ा है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई किया जाना ज़रूरी है. वहीं कांग्रेस का भी यही मानना है कि पार्टी ने बागियों पर कार्रवाई तो कर दी है, बचे भितरघातियों के खिलाफ भी पार्टी कार्रवाई का मन बना सकती है.
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टेंशन दोनों तरफ है क्योंकि मेहनत दोनों ओर से की गई है. अब अगर हार भितरघात के चलते हो जाए तो गुस्सा आना तो लाज़मी है. हाईकमान भी मतगणना के इंतज़ार में है, उम्मीद है बड़े फैसले उसके बाद लिए जाएंगे.

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First published: December 4, 2018, 6:16 PM IST
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