एमपी के नगरों को पवित्र घोषित कर भूली सरकार, कागजी साबित हुए एलान

मध्य प्रदेश सरकार प्रदेश के 17 नगरों को पवित्र घोषित कर भूल गई है और इन शहरों में बेरोक टोक मांस-मदिरा का कारोबार जारी है. सरकार भी शराब बिक्री को बढ़ावा देने में जुट गई है.

Pooja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 27, 2019, 5:26 PM IST
Pooja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 27, 2019, 5:26 PM IST
कांग्रेस ने अपने वचन- पत्र में धार्मिक स्थलों को पवित्र बनाने का वादा किया था. उसके उलट कांग्रेस की नीति शहर दर शहर शराब को बढ़ावा देने वाली बनती जा रही है. शिवराज सरकार में घोषित धार्मिक नगर अब कांग्रेस सरकार में हाशिए पर पहुंच गए हैं. कमलनाथ सरकार के पास फिलहाल पवित्र नगरों के विकास का कोई रोड मैप नही है और बीजेपी धार्मिक नगरों के विकास के बहाने कांग्रेस सरकार को घेरने का प्लान बनाने में जुटी है.  बीजेपी, कांग्रेस को अधर्मियों की सरकार बता रही है.

धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के नगर घोषित हुए थे पवित्र शहर
डेढ़ दशक पहले मध्य प्रदेश में सरकार ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के नगरों को पवित्र शहर घोषित किया था लेकिन यह मात्र एक घोषणा बनकर रह गया. यह महज कागजी साबित हुआ क्योंकि निगरानी की पुख्ता व्यवस्था नहीं हो पाई. पवित्र नगर घोषित किए गए धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व के 17 नगरों की व्यवस्था में कोई बदलाव नजर नहीं आया. पवित्र नगर के मायने और मापदंड क्या हैं इस बात का कोई खयाल भी नहीं रखा गया. ओंकारेश्वर हो, प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल उज्जैन या फिर पन्ना या दतिया, सभी जगह अंडा समेत मांस-मदिरा की खरीद-फरोख्त जारी है.

डेढ़ दशक बाद भी नहीं हुई कोई व्यवस्था

प्रदेश में डेढ़ दशक पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने महेश्वर में हुई अपनी कैबिनेट की बैठक में महेश्वर, अमरकंटक और उज्जैन को पवित्र शहर घोषित किया था. उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर और शिवराज सिंह चौहान ने कई नगरों को पवित्र घोषित किया और इनकी संख्या 17 हो गई. 15 साल बाद कांग्रेस सरकार की इंट्री हुई जिन्होंने धर्म को अपने वचन पत्र में शामिल कर विकास को बढावा देने की बात कही थी लेकिन धार्मिक शहरों की स्थिति सरकार बदलने के बाद भी विकास की डगर पर नहीं चल पाई. बीजेपी की मानें तो कॉग्रेस सरकार अधर्मियों की सरकार है जिन्हें धर्म से कोई वास्ता नहीं.

जानें प्रदेश में कब-किसे मिला पवित्र नगर का दर्जा
उज्जैन, अमरकंटक एवं महेश्वर (3 फरवरी 2004)
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ओरछा एवं ओंकारेश्वर (फरवरी 2004)
मंडला एवं मुलताई ( 21 जनवरी 2008)
दतिया(27 अगस्त 2008)
जबलपुर (आस्था नगरी 8 जनवरी 2008)
चित्रकूट, मैहर एवं सलकनपुर(20 फरवरी 2009)
मंडलेश्वर (15 अक्टूबर 2010)
पशुपतिनाथ मंदिर मंदसौर (9 नवंबर 2011)
ग्वारीघाट जबलपुर एवं बरमान(22 अप्रैल 2013)

सियासी फायदे के लिए भुनाई जाती रही आस्था
दरअसल, इन स्थलों के प्रति लोगों की आस्था को सियासी फायदे के लिए भुनाया जाता रहा है. एक पवित्र नगर का एलान तो उपचुनाव के ठीक पहले किया गया, अन्य घोषणाओं में भी राजनीतिक निहितार्थ मौजूद रहे. बाद में नगरपालिका, ग्राम पंचायत या नगर पंचायत को निर्धारित मापदंड पालन कराने के लिए अलग से राशि देने का इंतजाम नहीं हुआ जिसके कारण ये एलान मात्र एक घोषणा बनकर रह गई.

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First published: June 27, 2019, 5:26 PM IST
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