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MP: विधायकों को अभी से सताने लगा 2023 का टेंशन, विधानसभा सीट बचाने कर रहे ये काम

सांकेतिक फोटो.
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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में अगले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने में अभी 3 साल का समय बाकी है. अगले विधानसभा चुनाव 2023 में होंगे, लेकिन चुनाव का टेंशन अभी से विधायकों (MLA) पर छा गया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में अगले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने में अभी 3 साल का समय बाकी है. अगले विधानसभा चुनाव 2023 में होंगे, लेकिन चुनाव का टेंशन अभी से विधायकों (MLA) पर छा गया है. 28 विधानसभा सीट के उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के लिए अप्रत्याशित रहे नतीजे विधायकों के टेंशन का बड़ा कारण बन गए हैं. बीजेपी और कांग्रेस के साथ ही मौजूदा विधायकों ने अपनी सीट को बचाने के लिए अभी से चक्रव्यू रचना शुरू कर दिया है. ताकि सीट को कोई दूसरा भेद ना पाए. बीजेपी कांग्रेस से लेकर निर्दलीय विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र में डेरा डाल वोटरों से संपर्क बढ़ाने में जुट गए हैं. विधायकों को अब अपने क्षेत्र की समस्याएं भी नजर आने लगी हैं.

बीजेपी विधायक सुरेंद्र पटवा ने अपने भोजपुर विधानसभा सीट पर अफसरों के साथ बैठक कर लंबित प्रस्तावों पर फीडबैक लेना शुरू कर दिया है. बीजेपी विधायक सुरेंद्र पटवा बताते हैं कि वह लगातार अपने विधानसभा के क्षेत्र की जनता से संपर्क में हैं और लगातार बैठक कर आम लोगों से जुड़े मुद्दों को समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बीजेपी एक चुनाव के बाद दूसरे चुनाव की तैयारी में जुट जाती है, लेकिन 2023 के चुनाव को लेकर अभी से विधानसभा में पकड़ को मजबूत करने की कोशिश हो रही है.

कांग्रेस ने भी शुरू की तैयारी
कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र पर फोकस करना शुरू कर दिया है. प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और मीडिया विभाग के प्रमुख होने के नाते अपनी जिम्मेदारियों को संभालने के साथ जीतू पटवारी अपने विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा फोकस कर रहे हैं. सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के विधायक कि नहीं निर्दलीय विधायक भी 2023 के चुनाव के टेंशन में हैं और निर्दलीय विधायकों ने भी चुनाव के 3 साल पहले अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा ने विधानसभा में अपनी पकड़ को मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर टीम तैयार करना शुरू कर दिया है. सुरेंद्र सिंह शेरा का कहना है कि उन्होंने अगले 3 साल का रोड मैप तैयार किया है. स्थानीय मुद्दों पर जनता की शिकायतों का समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं.
उपचुनाव के बाद मंथन


दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2020 में हुए 28 सीटों के उपचुनाव में बीजेपी कांग्रेस के साथ ही सपा, बसपा, निर्दलीय विधायकों को मंथन करने पर मजबूर कर दिया है. जिन सीटों पर बीजेपी को जीत की उम्मीद थी वहां उसको हार का सामना करना पड़ा है तो जिन सीटों पर कांग्रेस को जीत की उम्मीद थी वहां कांग्रेस पार्टी को शिकस्त मिली है और यही कारण है कि विधानसभा वार अप्रत्याशित नतीजों से परेशान माननीय ने अब जनता दरबार में अपनी हाजिरी देना अभी से शुरू कर दिया है.
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