बेसहारा बच्चों को ऐसे हुनरमंद बना रही है मध्य प्रदेश पुलिस

मध्य प्रदेश पुलिस दूसरे विभागों के सहयोग से विशेष अभियान चलाकर मजदूरी करने वाले और भीख मांगने वाले बच्चों को हुनरमंद बनाकर रोजगार देने का काम कर रही है. इस अभियान की शुरूआत भोपाल से ही की जा रही है.

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 6, 2018, 6:26 PM IST
बेसहारा बच्चों को ऐसे हुनरमंद बना रही है मध्य प्रदेश पुलिस
सांकेतिक तस्वीर
Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 6, 2018, 6:26 PM IST
मध्य प्रदेश पुलिस बेसहारा बच्चों का सहारा बन रही है. अभी तक पुलिस दूसरे विभागों के साथ मिलकर मजदूरी करने वाले, भीख मांगने वाले बच्चों को ढूंढकर बाल कल्याण व परिजनों तक पहुंचाने का काम करती थी, लकिन अब पुलिस बच्चों को हुनरमंद बनाकर नौकरी दिलाने का भी काम कर रही है.

मध्य प्रदेश पुलिस दूसरे विभागों के सहयोग से विशेष अभियान चलाकर मजदूरी करने वाले और भीख मांगने वाले बच्चों को हुनरमंद बनाकर रोजगार देने का काम कर रही है. इस अभियान की शुरूआत भोपाल से ही की जा रही है. एएसपी दिनेश कौशल के नेतृत्व में टीम बनाई गई है, जिसमें थाना स्तर पर पुलिस अधिकारी, बाल कल्याण अधिकारी, महिला बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, किशोर न्याय बोर्ड, चाइल्ड लाइन, जिला विधिक सेवा प्रधिकरण, सामाजिक न्याय विभाग और गैर सरकारी संगठन भी शामिल है.

एएसपी दिनेश कौशल ने बताया कि पहले चरण में दूसरे विभागों की सहायता से बच्चों को चिन्हित किया जा रहा है, जिसके बाद दूसरे चरण में बच्चों को रेस्क्यू कर उनकी 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं तक की पढ़ाई की पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी सुनिश्चित की जाएगी. अभियान के तीसरे चरण में 10वीं पास बच्चों को आईआईटी या फिर उनकी रूचि के आधार पर रोजगार परक ट्रेनिंग दिलाई जाएगी. इसके साथ ही बालिग होने के साथ ही इन बच्चों को प्राइवेस सेक्टर में नौकरी दिलाने की भी व्यवस्था की गई है.

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एएसपी कौशल ने बताया कि विशेष किशोर पुलिस इकाई के सदस्य, बाल कल्याण समिति के सदस्य, चाइल्ड लाइन और बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की टीम उन बच्चों को चिन्हित कर रही है जो भिक्षावृति व बाल श्रम में लिप्त हैं. इन बच्चों को चिन्हित कर उनके पुनर्वास की पूरी प्लानिंग की गई है. पुलिस की यह एक अच्छी पहल है. यदि एक साल के अंदर इस अभियान के सकारात्मक परिणा सामने आते हैं तो प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसे लागू किया जाएगा. इसके साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अभियान की लगातार मॉनिटरिंग होती रहे, ताकि अभियान बीच में दम न तोड़ पाए.

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