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...तो इस वजह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बदला अपना Twitter स्टेटस, निशाने पर हैं ये बड़े नेता

Ranjeeta Jha | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 27, 2019, 3:14 PM IST
...तो इस वजह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बदला अपना Twitter स्टेटस, निशाने पर हैं ये बड़े नेता
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीते दिनों टि्वटर पर अपना स्टेटस बदला तो एमपी की सियासत गर्मा गई. (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के दिग्गज कांग्रेस (Congress) नेता और पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने पिछले दिनों Twitter पर अपना स्टेटस बदल सबको चौंका दिया. मप्र के सियासी जानकार सिंधिया के इस कदम को उनका कांग्रेस और दिग्विजय सिंह पर निशाना साधने से जोड़ रहे हैं.

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भोपाल. अपने Twitter प्रोफाइल से 'कांग्रेस' हटाने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) फिर सुर्खियों में आ गए हैं. हालांकि इसको लेकर सिंधिया ने सफाई भी दे दी है, लेकिन जानकार इसे सिंधिया की दबाव की राजनीति का हिस्सा कह रहे हैं. सूत्रों का मानना है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की नज़र इस बार कुछ महीनों में खाली होने वाली राज्यसभा सीट (Rajya Sabha Election) पर है. मध्य प्रदेश में सीएम पद के फैसले के समय जो दबाव की राजनीति ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खेली थी, वो खेल सिंधिया बीच-बीच में फिर से खेलते नज़र आ जाते हैं. हालिया विवाद उनके Twitter पर प्रोफाइल से कांग्रेस (Congress) हटाने के बाद शुरू हुआ, जिसको विवाद बनाकर न देखने की बात सिंधिया की तरफ से कही गई, लेकिन सिंधिया की राजनीति को समझने वाले लोग इसे दूसरा खेल बता रहे हैं.

राज्यसभा की 3 सीटों पर नजर
ज्योतिरादित्य सिंधिया की नजर साल 2020 में खाली होने वाली राज्यसभा सीट पर है. मध्य प्रदेश में 3 सीटें राज्यसभा से होंगी, जिसमें एक-एक सीट बीजेपी-कांग्रेस के पास जाएगी और अगर कांग्रेस कोशिश करे तो दूसरी सीट भी पार्टी के पास आ सकती है. इसमें से एक सीट मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की है. सिंधिया की नजर उसी सीट पर है. सूत्रों का मानना है कि इसी कारण सिंधिया फिर दबाव की राजनीति कर रहे हैं. सिंधिया की आलाकमान से ये शर्त है कि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का पद दिया जाए या राज्यसभा का सांसद बनाकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय भूमिका मिले.

नया नहीं सिंधिया का ये दांव

आपको बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस तरह की राजनीति कई बार की है. मध्यप्रदेश में सीएम पद पर फैसला लिए जाने के समय भी सिंधिया ने राहुल गांधी के सामने मुख्यमंत्री बनाने को लेकर बहुत लॉबिंग की थी. इसके बाद कई दौर की बैठक और मान-मनौव्वल के बाद कमलनाथ के नाम पर उन्होंने सहमति दी. सरकार बनने के बाद भी अपने करीबियों को मंत्रिमंडल में ज्यादा संख्या मिले, इसकी कोशिश उनकी तरफ से लगातार की गई. मध्यप्रदेश में अध्यक्ष पद के लिए भी प्रदेश से लेकर दिल्ली तक उन्होंने अपने समर्थकों के जरिए दबाव बनाने की कोशिश जारी रखी. सिंधिया को प्रदेश से दूर रखने के लिए प्रियंका गांधी के साथ पश्चिमी उत्तरप्रदेश का महासचिव भी बनाया गया, लेकिन लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने इस पद से इस्तीफ़ा दे दिया. सिंधिया ने अब भी अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने का ध्येय छोड़ा नहीं है. बहरहाल, देखना होगा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया की राजनीति कितनी चल पाती है?

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First published: November 27, 2019, 3:14 PM IST
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