MP: खस्ता हाल बिजली कंपनियों के पास सैलरी देने के पैसे नहीं, इन पर ठीकरा फोड़ा

एमपी का बिजली विभाग आर्थिक संकट में है. बिजली कंपनियों (Power Companies) के आपसी पत्रव्यवहार में इस बात का खुलासा है कि उन्हें तनख्वाह (Salary) के लिए भी पैसे जुटाने को कहा गया है.

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 5:09 PM IST
MP: खस्ता हाल बिजली कंपनियों के पास सैलरी देने के पैसे नहीं, इन पर ठीकरा फोड़ा
मध्य प्रदेश में बिजली विभाग आर्थिक संकट से जूझ रहा है
Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 5:09 PM IST
प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत बेहद खराब हो गई है. विद्युत वितरण कंपनियों के बीच हुए पत्राचार मे इस बात का खुलासा हुआ है. पत्र में बिगड़ी हुई आर्थिक स्थिति के लिए पूर्ववर्ती सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को ज़िम्मेदार बताया गया है. प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ने भी इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा छोड़े गए घाटे को ही ज़िम्मेदार बताया.

बिजली कंपनियों की माली हालत खराब
प्रदेश की विद्युत वितरण कंपनियों की माली हालत कैसी है इसकी बानगी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का पत्र है. कंपनियों के पास कर्मचारियों को पूरी सैलरी देने के लिए पैसे तक नहीं बचे हैं. पत्र में लिखे शब्दों को समझें तो साफ तौर पर विद्युत वितरण कंपनियों को खुद फंड के इंतज़ाम करने को कह दिया गया है. वहीं राजस्व की वसूली के लिए भी सख्त हिदायत दी गई है. पत्र में इस स्थिति के लिए संबल, मुख्यमंत्री सरल बिजल बिल और सौभाग्य जैसी योजनाओं को ज़िम्मेदार माना गया है.

News - बिजली कंपनियों के आपसी पत्र व्यवहार में हुआ खुलासा
बिजली कंपनियों के आपसी पत्र व्यवहार में हुआ खुलासा


वेतन के लिए फंड जुटाने कहा गया 
दरअसल पूरा मामला मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से जुड़ा हुआ है जिसमे जुलाई माह के वेतन के लिए आई राशि मांग से कम मिली. इसे लेकर जब पीएमसी याने पॉवर मैनेजमेंट कंपनी से बात की गई तो उसने साफ तौर पर अपने हाथ खड़े कर लिए. कंपनी ने 77.62 करोड़ रूपए के मांग पत्र के एवज़ मे सिर्फ 50 करोड़ ही दिए और बाकि बची हुई वेतन की राशि को स्वयं के फंड से इंतज़ाम करने की बात कही. वहीं मध्य क्षेत्र पर बकाया 8411 करोड़ रूपए वसूलने के लिए भी सख्त निर्देश दिए गए हैं.

News - बिजली कंपनियों को फंड जुटाने कहा गया
बिजली कंपनियों को फंड जुटाने कहा गया

Loading...

पूरे मामले को लेकर अब राजनीति भी शुरू हो रही है. भाजपा इसे कांग्रेस सरकार का मैनेजमेंट फेलियर बता रही है जबकि कांग्रेस भाजपा पर ही इसका ठीकरा फोड़ती है. कांग्रस के मुताबिक पिछली सरकार पहले ही प्रदेश को वित्तीय घाटा सौंपकर गई थी.

47 हजार करोड़ का घाटा विरासत में मिला
पूरे मामले को लेकर उर्जा मंत्री प्रियवत सिंह भी भाजपा शासन में हुए हज़ारों करोड़ के घाटे को ज़िम्मेदार मानते हैं. उनका कहना है कि 47 हज़ार करोड़ का घाटा भाजपा विद्युत वितरण कंपनियों पर छोड़कर गई थी, जिससे उबरने का प्रयास किया जा रहा है. जहां तक योजनाओं का सवाल है तो उसके लिए भी पूर्व भाजपा सरकार ने कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किए थे.

ये भी पढ़ें -
INX केस: SC ने कहा- चिदंबरम नहीं भेजे जाएंगे तिहाड़ जेल, जमानत खारिज हुई तो बढ़ेगी रिमांड
VIDEO: विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान ने मिग-21 में एयर चीफ मार्शल को बिठाकर भरी उड़ान

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए भोपाल से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 2, 2019, 3:55 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...