शिवराज के मंत्रिमंडल विस्तार में घटा महाकौशल का कद, ग्वालियर-चंबल का बढ़ा दबदबा
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शिवराज के मंत्रिमंडल विस्तार में घटा महाकौशल का कद, ग्वालियर-चंबल का बढ़ा दबदबा
प्रदेश में बीजेपी सरकार बनने के 99 दिन बाद मंत्रिमंडल का बड़ा विस्तार हुआ.

मंत्रिमंडल विस्तार (Madhya Pradesh Cabinet Expansion) के बाद प्रदेश का सियासी ढांचा कुछ ऐसा हो गया है कि झुकाव अब महाकौशल से उठकर ग्वालियर, चंबल अंचल में ही पहुंच गया है जो ज्योतिरादित्य सिंधिया के वर्चस्व को दर्शा रहा है. कांग्रेस सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहे लखन घनघोरिया ने कहा 'आज जो मंत्रिमंडल बना वह मजबूर मंत्रिमंडल है'.

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जबलपुर. 6 माह पूर्व राजनीतिक दबदबे से भरे मध्य प्रदेश के महाकौशल अंचल (Mahakaushal Anchal) का कद शिवराज मंत्रिमंडल (Madhya Pradesh Govt Cabinet Expansion) के विस्तार के बाद अब छोटा हो गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि जिस अंचल से मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा उपाध्यक्ष समेत 4 कैबिनेट मंत्री आते हों. उस अंचल से अब सिर्फ एक मंत्री का आना कहीं न कहीं राजनीतिक उदासीनता की ओर इशारा करता है. बहरहाल उपचुनाव लुभावना मंत्रिमंडल विस्तार कई मायनों में जहां खास है तो वहीं बीजेपी (BJP) की चिंता को भी बढ़ा रहा है. कद्दावर नेताओं से भरे महाकौशल अंचल में कई बड़े चेहरे शिवराज मंत्रिमंडल (Shivraj Cabinet) में जगह नहीं बना पाए. इनमें संजय पाठक, अजय विश्नोई, पूर्व कृषि मंत्री रहे गौरी शंकर बिसेन, पूर्व मंत्री रहे जालम सिंह जैसे दिग्गजों के नाम शामिल हैं.

मंत्रीमंडल गठन बेहद निराशाजनक: पूर्व वित्त मंत्री
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार में जगह न पाने वाले इन दिग्गजों को फिलहाल वेट एंड वॉच की सलाह पार्टी आलाकमान से दी गई है. महाकौशल के एपिसेंटर कहे जाने वाले जबलपुर से मंत्रिमंडल गठन के पूर्व कई नेताओं ने कड़ी मशक्कत की. लेकिन प्रदेश का सियासी ढांचा कुछ ऐसा हो गया है कि झुकाव अब महाकौशल से उठकर ग्वालियर, चंबल अंचल में ही पहुंच गया है. कमलनाथ (Kamalnath) सरकार में जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के समर्थक 6 विधायक मंत्री थे, वहीं अब सिंधिया खेमे के 12 विधायक शिवराज सरकार में मंत्री हैं.

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बहरहाल, इस मंत्रिमंडल गठन को लेकर सियासी सुर भी तेज हैं. कांग्रेस ने जहां मंत्रिमंडल गठन को भाजपा के वरिष्ठ नेताओ के साथ कुठाराघात बताया तो वहीं महाकौशल की उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया. पूर्व वित्त मंत्री तरूण भनोत ने News 18 से खास बातचीत में इसे निराशाजनक बताया. वहीं कांग्रेस विधायक विनय सक्सेना ने भी महाकौशल समेत भाजपा नेताओं के साथ इसे गलत व्यवहार करार दिया.



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मजबूर मंत्रिमंडल का हुआ गठन: पूर्व मंत्री घनघोरिया
कांग्रेस सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहे लखन घनघोरिया ने मंत्रिमंडल गठन पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा है कि पहली बार किसी सरकार ने महाकौशल और विंध्य को पूरी तरह से उपेक्षित किया है. इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब कोई सरकार 100 दिन तक अपने मंत्रिमंडल का गठन नहीं कर पाई. पांच मंत्री जो थे वे भी अल्प मंत्री थे जो वैधानिक रूप से उचित नहीं था. उन्होंने कहा संतोष-असंतोष सभी पार्टियों में होता है लेकिन सबको साधने की चतुराई शीर्ष नेतृत्व की होती है. आज जो मंत्रिमंडल बना वह मजबूर मंत्रिमंडल है.
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