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महाराष्ट्र की नई सरकार ने बदल दी MP की सियासी तस्वीर, 5 पार्टियों के झंडे अब एक साथ

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 28, 2019, 11:01 PM IST
महाराष्ट्र की नई सरकार ने बदल दी MP की सियासी तस्वीर, 5 पार्टियों के झंडे अब एक साथ
सियासी मंथन से निकली महाराष्ट्र की नई सरकार ने मध्य प्रदेश की सियासी तस्वीर भी बदल दी है (File Photo)

महाराष्ट्र (Maharashtra) के सियासी मंथन से निकली नई सरकार ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की सियासी तस्वीर भी बदल दी है.

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भोपाल. शिवसेना (Shivsena), एनसीपी (NCP) और कांग्रेस (Congress) के कार्यकर्ता भोपाल (Bhopal) के लिंक रोड पर इकट्ठा हुए और जमकर जश्न मनाया. इस दौरान कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाई और जमकर आतिशबाजी की. ढोल नगाड़ों के साथ कार्यकर्ता थिरकते नजर आए. खास बात ये रही कि तीनों पार्टियों के नेता एक साथ अपने झंडे लेकर एक ही जगह जश्न मना रहे थे. बता दें, मध्य प्रदेश में इस वक्त कांग्रेस (Congress) की सरकार है और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ (CM Kamalnath) महाराष्ट्र में सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे हैं.

एमपी में अब 5 पार्टियों के झंडे एक साथ
मध्य प्रदेश में वैसे तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी है और सत्ता पर काबिज है लेकिन सरकार चलाने के लिए उसने समाजवादी पार्टी और बीएसपी के साथ गठबंधन किया है. एमपी में बीएसपी के 2 और एसपी का एक विधायक है, जो कमलनाथ सरकार को समर्थन दे रहे हैं. लेकिन महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ कांग्रेस का गठबंधन होने से सियासी तस्वीर बदल गई है. गुरुवार को जब भोपाल में महाराष्ट्र में सरकार बनने का जश्न मनाया गया तो कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के झंडे एक साथ एक जगह दिखाई दिए. इस लिहाज से अब कांग्रेस के साथ एमपी में बीएसपी, एसपी, शिवसेना और एनसीपी सहयोगी हो गए हैं. हालांकि मध्य प्रदेश में शिवसेना और एनसीपी का जनाधार न के बराबर ही है.

News - महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनने पर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक साथ मनाया जश्न
महाराष्ट्र में गठबंधन सरकार बनने पर कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने एक साथ मनाया जश्न


एमपी में भी होती रही है सियासी उठापटक
महाराष्ट्र में सरकार बनने से पहले बहुमत की जो लड़ाई हुई, उसका अक्स मध्य प्रदेश में भी दिखाई देता है. बीजेपी के नेता सरकार को अल्पमत में होने का डर दिखाते रहे हैं लेकिन कांग्रेस ने अब तक सरकार के कमजोर होने की संभावनाओं को निराधार ही साबित किया है. सियासी उठापटक की वजह दरअसल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे रहे, जिसमें मध्य प्रदेश में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. कांग्रेस 114 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई थी. जबकि 109 विधायकों के साथ बीजेपी दूसरे नंबर पर रही. सरकार बनाने के लिए 116 सीटों के बहुमत को पूरा करने के लिए तब कांग्रेस ने 4 निर्दलीय, 2 बीएसपी और एक एसपी विधायक के समर्थन से सरकार बनाई थी. बाद में झाबुआ में हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने एक और सीट पर जीत दर्ज कर ली और उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 115 हो गई.

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First published: November 28, 2019, 7:30 PM IST
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