एक दिन के सत्र में 'माननीयों' के लिए होगी कोरोना प्रूफ व्यवस्था, विधान सभा में ये होंगे बदलाव

MP विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा
MP विधानसभा सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा

कोरोना (Corona) के कारण विधान सभा में (Assembly) बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया है. दीर्घाएं बंद रहेंगी. विधायकों के सुरक्षाकर्मी और निज सहायक के आने पर रोक रहेगी.

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भोपाल. 21 सितंबर को मध्य प्रदेश विधानसभा (MP Assembly) का एक दिन का सत्र है. कोरोना काल में हो रहा ये सत्र कई मायनों में खास होगा. कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में बुलाए जा रहे इस सत्र को लेकर तैयारी का सिलसिला चल रहा है. इसी सिलसिले में  प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने विधानसभा और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की. इसमें यह तय किया गया कि सत्र के दौरान आखिरकार कौन कौन सी सावधानियां बरती जाएंगी और कोरोना की गाइड लाइन का कैसे पालन किया जाएगा.

बैठक में तय किए गए नियमो के मुताबिक भोपाल में सभी विधायकों के घर पर सेनेटाइजर, मास्‍क और फेस-शील्‍ड की व्यवस्था की जाएगी. इसके साथ ही विधान सभा में रैपिड कोरोना टेस्‍ट की व्‍यवस्‍था होगी. सत्र के दिन दर्शक दीर्घा में प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा. यहां तक कि विधायकों के निज सहायक, सुरक्षाकर्मी के भी विधानसभा में आने पर प्रतिबंध रहेगा. दीर्घाओं में विधायकों के बैठने की व्‍यवस्‍था होगी. विधायकों के अलावा किसी और को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. विधानसभा में सिटिंग अरेंजमेंट इस तरह से किया जाएगा ताकि सोशल डिस्टेंस यानि दो विधायकों के बीच 6 फीट की दूरी बनी रहे.

3 से एक दिन का हुआ सत्र
मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र अब तीन के बजाय सिर्फ 1 दिन का होगा. बीते मंगलवार को विधानसभा में हुई सर्वदलीय बैठक में इस पर सहमति बन गई थी. कोरोना को देखते हुए सर्वदलीय बैठक में यह फैसला लिया गया कि सत्र में प्रश्नकाल नहीं होगा. लेकिन विधायकों के जो सवाल पटल पर आएंगे उनका जवाब दिया जाएगा.
बजट पेश होगा


21 सितंबर से मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र शुरू होने जा रहा है. यह सत्र 21 स से 23 सितंबर तक होना था. सत्र को लेकर हुई सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ भी शामिल हुए थे. उसमें यह तय किया गया था कि सत्र सिर्फ 1 दिन होगा जिसमें सरकार अपना सबसे महत्वपूर्ण काम बजट पेश करेगी. कांग्रेस ने इस पर अपनी सहमति भी दे दी है .बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने कहा था कि सबकी प्राथमिकता सभी की सुरक्षा है. इसलिए यह तय किया गया कि सत्र वर्चुअल और एक्चुअल दोनों तरीके से हो सके. हालांकि सत्र एक दिन का होने की वजह से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव टलना भी तय है.

सत्र बुलाना जरूरी है
मध्यप्रदेश विधानसभा का सत्र 24 सितंबर से पहले बुलाया जाना संवैधानिक तौर पर ज़रूरी है. इससे पहले विधानसभा का सत्र 24 मार्च को बुलाया गया था. उसके बाद कोरोना की वजह से सत्र नहीं हो पाया. संवैधानिक नियमों के मुताबिक विधानसभा के दो सत्रों के बीच 6 महीने से ज्यादा का अंतराल नहीं हो सकता .यही वजह है कि 24 सितंबर से पहले विधानसभा का ये सत्र बुलाया जा रहा है.
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