चिट्ठी की सियासत: दिग्विजय सिंह के बचाव में आए बेटे जयवर्द्धन, वन मंत्री उमंग सिंहार को दिया ये जवाब

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 6:34 PM IST
चिट्ठी की सियासत: दिग्विजय सिंह के बचाव में आए बेटे जयवर्द्धन, वन मंत्री उमंग सिंहार को दिया ये जवाब
दिग्विजय सिंह को मिला बेटे का साथ.

मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने पर्दे के पीछे से सरकार चलाने के आरोपों पर भी उमंग सिंहार को जवाब दिया है. सिंह की मानें तो सरकार के मुखिया सीएम कमलनाथ हैं और उनके मंत्रिमंडल के मंत्री उनके साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.

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मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister Digvijay Singh) पर खड़े किए जा रहे सवालों के बीच उनके बेटे और कमलनाथ सरकार (Kamal Nath) में नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्द्धन सिंह (Jaivardhan Singh) उनके बचाव में उतर आए हैं. सिंह के खिलाफ सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) को लिखी वन मंत्री उमंग सिंहार (Umang Singhar) की चिट्ठी पर जवाब देते हुए जयवर्द्धन ने कहा कि चिट्ठी में सिंहस्थ घोटाले की जांच को लेकर लिखी गई बात सही नहीं है. सिंहस्थ घोटाले की ईओडब्ल्यू से जांच के लिए उन्होंने खुद खत लिखा है.

इतना ही नहीं, जयवर्द्धन सिंह ने पर्दे के पीछे से सरकार चलाने के आरोपों पर भी उमंग सिंहार को जवाब दिया है. नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्द्धन सिंह की मानें तो सरकार के मुखिया सीएम कमलनाथ हैं और उनके मंत्रिमंडल के मंत्री उनके साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं. जहां तक बात मुलाकात के लिए मंत्रियों को लिखी गई चिट्ठी की है तो दिग्विजय सिंह सांसद हैं लिहाजा वो ऐसा कर सकते हैं.

क्या है पूरा मामला ?
उमंग सिंहार और दिग्विजय सिंह के बीच विवाद का दौर उस बयान से शुरु हुआ जिसमें उमंग सिंहार ने कहा था कि दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं. इसके एक दिन बाद ही उमंग सिंहार ने सोनिया गांधी को एक चिट्ठी लिख दी. इस चिट्ठी में दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा गया है कि वो खुद को पावर सेंटर बनाने में जुटे हैं.

अपने पिता दिग्विजय सिंह के साथ जयवर्द्धन.


सीन में क्यों आए जयवर्द्धन?
सोनिया गांधी को लिखी गई उमंग सिंघार की चिट्ठी में लिखा गया है कि सिंहस्थ को छोड़कर सभी घोटालों के मुद्दे इसलिए उठाते हैं क्योंकि सिंहस्थ से जुड़ा हुआ डिपार्टमेंट उनके बेटे जयवर्द्धन सिंह के पास है. इसी मुद्दे पर जयवर्द्धन सिंह ने उमंग सिंघार को जवाब दिया है.
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क्या है चिट्ठी का मजमून?
प्रति,
माननीया श्रीमती सोनिया गांधी जी,
राष्ट्रीय अध्यक्ष
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी
नई दिल्ली

विषयः- स्वयं को पॉवर सेंटर बनाने में जुटे है दिग्विजय सिंह

माननीया,
बड़े ही दुःख के साथ आपको यह अवगत कराना पड़ रहा है कि म.प्र. में कमलनाथ सरकार को पार्टी के ही कद्दावर नेता एवं सांसद दिग्विजय सिंह अस्थिर कर स्वंय को म.प्र. पॉवर सेंटर के रूप में स्थापित करने में जुटे हैं. वे लगातार मुख्यमंत्री कमलनाथ एवं उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को पत्र लिखकर और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं. इन पत्रों को मजबूत विपक्ष दलों के लिए एक मुद्दा बन जाता है. दिग्विजय सिंह के पक्ष को लेकर विपक्ष आए दिन मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनकी सरकार को घेरने के असफल प्रयास में लगा रहता है.

इसी कड़ी में गत शुक्रवार को राज्यसभा सदस्य की दिग्विजय सिंह ने सभी मंत्रियो को एक पत्र लिखा और उसे सोशल मीडिया पर वायरल भी कर दिया. इस पत्र के जरिए दिग्विजय सिंह खबरों की सुर्खियों में छा गए पर प्रदेश के राजनीतिक में नई बहस छिड़ गई कि क्या पर्दे के पीछे कमलनाथ सरकार को दिग्विजय सिंह चला रहे है. इसके पहले भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव लगातार यह आरोप लगाते आ रहे है कि प्रदेश में सरकार कमलनाथ नही चला रहे है, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे सरकार चला रहे है। गत शुक्रवार को दिग्विजय सिंह द्वारा मंत्रियो को लिखे पत्र से विपक्ष के आरोपों को और बल मिला है.

माननीया, आपको यह भी अवगत कराना उचित होगा कि, व्यापम घोटाला, ई-टेडरिंग घोटाला, वृक्षारोपण घोटालो को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखे किंतु वे सिंहस्थ घोटाले को लेकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाते है, क्यों? दरअसल सिंहस्थ घोटाले से संबंधित विभाग दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन सिंह के पास है. उनके पुत्र एवं नगरीय प्रशासन मंत्री जयवर्धन सिंह ने विधानसभा में कांग्रेस विधायक के सिंहस्थ घोटाले से संबंधित सवाल के उत्तर में कहा कि सिंहस्थ घोटाला नहीं हुआ. जबकि विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने सिंहस्थ घोटाले को बड़ा मुद्दा बनाया था.

माननीया, मंत्री अपने मुख्यमंत्री के प्रति उत्तरदायित्व होता है. दिग्विजय सिंह एक राज्य सभा सदस्य हैं. वे पत्र लिखकर मंत्रियों से ट्रांसफर-पोस्टिंग का हिसाब ले रहे है, जो अनुचित है. ऐसे में तो अन्य सांसद, राज्यसभा सदस्य और नेतागण भी मंत्रियों को लिखे पत्रों का हिसाब-किताब लेना शुरू कर देंगे. यदि यह परम्परा पड़ गयी तो मंत्री सरकारी कामकाज और जनहितैषी योजनाओं को क्रियान्वयन कैसे कर पाएंगे. (उमंग सिंघार)

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First published: September 2, 2019, 6:19 PM IST
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