MP में मंत्रालय कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लामबंद, नाजुक वित्तीय स्थिति के कारण सरकार ने साधी 'चुप्‍पी'

कर्मचारी संगठनों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा.

MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लामबंद होने लगे हैं. इस बीच आज यानी मंगलवार को मंत्रालय के ठीक बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. जिस समय मंत्रालय कर्मचारी संघ के नेता एक जुलूस निकाल रहे थे उस समय कैबिनेट की मीटिंग चल रही थी, जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) समेत सभी मंत्री मौजूद थे.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लामबंद होने लगे हैं. इस बीच मंगलवार को मध्य प्रदेश मंत्रालय कर्मचारी संघ (MP Ministry Employees Union) ने मंत्रालय के ठीक बाहर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. खास बात यह थी कि जिस वक्त मंत्रालय कर्मचारी संघ अपना विरोध प्रदर्शन कर रहा था, ठीक उसी वक्त मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक चल रही थी, जिसमें सीएम शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) समेत सभी मंत्री मौजूद थे.

मंत्रालय कर्मचारी संघ के नेता एक जुलूस के तौर पर वल्लभ भवन की इमारत से बाहर आए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे. मंत्रालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने आरोप लगाते हुए कहा कि अपनी मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने सरकार और अधिकारियों के सामने बात रखी थी, लेकिन जब उनका समाधान नहीं हुआ तो फिर मजबूरन उन्हें प्रदर्शन करना पड़ा. वहीं, कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी जाती हैं, तो फिर आने वाले दिनों में यह प्रदर्शन और तेज किया जाएगा.

क्या हैं प्रमुख मांगें ?
>> 1 जुलाई 2020 और 1 जुलाई 2021 को देय वेतन वृद्धि एरियर सहित तत्काल दी जाए.
>>महंगाई भत्ते में केंद्र समान के अनुरूप वृद्धि की जाए.
>> भारतीय प्रशासनिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा और कोषालय सेवा की तरह मंत्रालय कर्मचारियों को भी हर 8 साल में उच्च पद पर क्रमोन्नति देने संबंधी प्रावधान किए जाएं.
>>मुख्यमंत्री कर्मचारी बीमा योजना को तत्काल लागू किया जाए.
>> सरकारी सेवा में सीधी भर्ती से तृतीय और चतुर्थ श्रेणी पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए परिवीक्षा अवधि में स्टाइपेंड के रूप में वेतनमान के न्यूनतम का प्रथम वर्ष में 70 फीसदी, दूसरे वर्ष में 80 फीसदी और तीसरे वर्ष में 90 फीसदी दिये जाने संबंधी व्यवस्था को खत्म कर पहले की तरह नियुक्ति पर पूर्ण वेतनमान दिए जाने और 3 साल की परिवीक्षा अवधि को संशोधित कर पहले की तरह 2 वर्ष किया जाए.

क्यों पकड़ी आंदोलन की राह ?
दरअसल 2019 में तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने कर्मचारियों का महंगाई भत्ता पांच फीसदी से बढ़ाकर 17 फीसदी किया था, जिसका भुगतान मार्च 2020 से किया जाना था, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते सरकार ने अप्रैल 2020 में इस आदेश को निरस्त कर दिया था. हाल ही में जब केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों का डीए बढ़ाया तो राज्य कर्मचारियों की ओर से भी महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग उठने लगी. केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में राज्य सरकार के कर्मचारियों को अभी 16 फीसदी कम महंगाई भत्ता मिल रहा है, जिससे कर्मचारी संगठन नाराज हैं.

वित्तीय स्थिति नाजुक ?
केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता बढ़ाए जाने के बाद अब यह 28 फीसदी तक हो गया है जो 1 जुलाई से मान्य होगा. वहीं, मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2019 की स्थिति में 12 फीसदी महंगाई भत्ता मिल रहा है. कर्मचारियों का डीए ना बढ़ने की वजह से वेतन में वृद्धि नहीं हुई है. वित्त विभाग की मानें तो राज्य सरकार को केंद्र के बराबर डीए देने पर हर महीने 720 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा, जो कि साल भर के हिसाब से करीब 8640 करोड़ रुपये होगा.

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