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MLA प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाल, नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात के बाद स्पीकर ने जारी किया आदेश

Sharad Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 9, 2019, 10:47 PM IST
MLA प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाल, नेता प्रतिपक्ष से मुलाकात के बाद स्पीकर ने जारी किया आदेश
विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाल

बीजेपी विधायक प्रह्लाद लोधी (Prahlad Lodhi) की सदस्यता को आखिरकार बहाल कर दिया गया. सोमवार को नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव (Gopal Bhargav) ने नरसिंहपुर के गोटेगांव में स्पीकर एन पी प्रजापति से मुलाकात कर उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया, जिसके बाद स्पीकर ने उनकी सदस्यता को बहाल करने का आदेश जारी कर दिया.

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भोपाल. नरसिंहपुर के गोटेगांव में स्पीकर एन पी प्रजापति (Speaker NP Prajapati) से मुलाकात के दौरान गोपाल भार्गव ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया. जिसके बाद स्पीकर एन पी प्रजापति ने बयान जारी करते हुए कहा कि प्रहलाद लोधी की सदस्यता को बहाल करने के साथ ही उनके सभी अधिकार वापस किए जा रहे हैं. प्रहलाद लोधी की सदस्यता बहाली का विधिवत नोटिफिकेशन विधानसभा सचिवालय की ओर से अब जारी कर दिया जाएगा. इससे पहले ये माना जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से आदेश की कॉपी विधिवत तरीके से विधानसभा सचिवालय पहुंचने के बाद विधानसभा स्पीकर सदस्यता को लेकर फैसला लेंगे, लेकिन उससे पहले ही नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने स्पीकर से मुलाकात कर आदेश की कॉपी सौंपकर सदस्यता बहाली की राह आसान कर दी.

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा
आपको बता दें कि प्रह्लाद लोधी की सजा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने प्रहलाद लोधी को 7 जनवरी तक विशेष कोर्ट से मिली सजा पर स्टे दिया था. इससे पहले विशेष कोर्ट से दो साल की सजा मिलने के बाद स्पीकर एन पी प्रजापति ने पवई से बीजेपी विधायक प्रहलाद लोधी की सदस्यता को शून्य कर दिया था. बीजेपी ने स्पीकर के इस फैसले पर सवाल उठाए थे. बाद में प्रहलाद लोधी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए और वहां से उन्हें सजा पर स्टे मिल गया. इसके बाद सरकार ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिस पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा.

विधानसभा सचिवालय ब्लॉक कर चुका था लोधी का अकाउंट

पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट से प्रहलाद लोधी को राहत मिलने के बाद बीजेपी उनको विधानसभा सत्र में ले जाने के लिए अड़ गई थी, हालांकि 17 दिसंबर से शुरु हो रहे शीतकालीन सत्र से पहले विधानसभा सचिवालय ने लोधी को सत्र से दूर करने की पूरी तैयारी कर ली थी. विधानसभा सचिवालय की ओर से लोधी का अकाउंट ब्लॉक किया जा चुका था. न तो उन्हें शीतकालीन सत्र की अधिकृत सूचना विधिवत भेजी गई थी और न हीं उन्हें सवाल पूछने का अधिकार दिया गया था. अब लोधी की सदस्यता बहाल होने के बाद उनके सभी अधिकार वापस कर दिए गए हैं.

प्रह्लाद लोधी का मामला एक नज़र में
>> प्रहलाद लोधी पर रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाले रैपुरा तहसीलदार के साथ मारपीट का आरोप था. सांसद-विधायकों के मामले देखने वाली विशेष अदालत ने उन्हें 2 साल की सजा सुनाई थी.>> इस आदेश की कॉपी विधानसभा पहुंचते ही स्पीकर एनपी प्रजापति ने आनन फानन में 'दि रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपुल एक्ट' के तहत एक्शन लेते हुए प्रहलाद लोधी की सदस्यता खत्म कर दी थी.

>> 'दि रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपुल एक्ट' 1951 की धारा 8 (3) में साफ किया गया है कि अगर किसी जनप्रतिनिधि को 2 साल या इससे अधिक सजा होती है तो वह अयोग्य हो जाएगा. इससे कम सजा मिलने पर सुनवाई और फैसला होने तक सदस्यता बरकरार रह सकती है. इसका प्रावधान 8(4) में है. इसमें 60 दिन का समय अपील के लिए मिलता है.

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First published: December 9, 2019, 10:10 PM IST
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