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मॉब लिंचिंग का डर या पब्लिसिटी स्टंट!, ये अधिकारी बदलना चाहता है अपना नाम

मॉब लिंचिंग का डर या पब्लिसिटी स्टंट!, ये अधिकारी बदलना चाहता है अपना नाम

मॉब लिंचिंग का डर या पब्लिसिटी स्टंट!, ये अधिकारी बदलना चाहता है अपना नाम

नियाज खान का कहना है कि वे अल्पसंख्यक हैं इसलिए उन्हें अपने इस नाम से डर लगता है और वो इसे बदलना चाहते हैं. उन्हें इसके लिए किसी सरकार या किसी प्रशासन पर विश्वास नहीं है.

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मध्य प्रदेश में मॉब लिंचिंग की घटना को लेकर एक तरफ जहां प्रदेश सरकार ने सख्त कानून बनाने की बात कही है, तो वहीं राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी नियाज खान मॉब लिंचिंग से बचने के लिए अपना नाम बदलना चाहते हैं. बता दें कि एमपी ऐसा पहला राज्य है, जहां मॉब लिंचिंग को लेकर कानून बनाया गया है. बावजूद इसके यहां के सरकारी अफसर ही खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

अल्पसंख्यक हूं इसलिए अपने इस नाम से डर लगता है

बात नियाज खान की हो रही है, जो पहले भी अपने धर्म और अपने नाम को लेकर बयान दे चुके हैं. नियाज खान का कहना है कि वे अल्पसंख्यक हैं इसलिए उन्हें अपने इस नाम से डर लगता है और वो इसे बदलना चाहते हैं. उन्हें इसके लिए किसी सरकार या किसी प्रशासन पर विश्वास नहीं है.



बहरहाल, नियाज ने अपने ट्वीट में अपने खान सर्नेम को अपने डर की वजह बताई है. उन्होंने कहा है कि मॉब लिंचिंग से बचने के लिए वो अपना नाम बदलना चाहतें हैं. उन्होंने कहा कि वे एक लेखक भी हैं. उनकी आने वाली किताब में भी उन्होंने इस मुद्दों को एक जगह दी है. हालांकि उस किताब का थीम कुछ और है. सिस्टम ने उनके अंदर के विश्वास को खत्म कर दिया है, जिस कारण उन्होंने अपनी किताब और अपना नाम बदलने का निर्णय लिया है.

नियाज का मानना है कि उनके इस ट्वीट से लोगों में कोई गलत संदेश नहीं जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब किसी इंसान के साथा गलत होता है तब ही बोलता है, नहीं तो वो क्यों बोलेगा. नियाज ने कहा कि उन्होंने 'freedom of expression' के तहत अपनी भावनाओं को रखा है.



नियाज ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में भी मुस्लिम समुदाय के बहुत से बॉलीवुड सितारों ने अपने नाम बदले हैं. इसलिए नाम बदलना कोई नई चीज नहीं है. ये पहले भी लोगों ने किया है और मैं कोई नई चीज नहीं करने जा रहा. उन्हें ये भी लगता है कि शायद नाम बदलने से उनकी किताब चल जाए.



वहीं कांग्रेस ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया है, तो बीजेपी ने इसे निराशावाद करार दिया है. बहरहाल, एक खास समुदाय के होने के नाते खुद को असुरक्षित बताने वाले नियाज ही जानते हैं कि वो ये सब अपनी किताब की लोकप्रियता के लिए कर रहे हैं या फिर उनका मकसद सिर्फ वही है जो वो कह रहे हैं.



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