भोपाल के माउंटेनियर ने राम मंदिर ट्रस्ट को दान दी 10 लाख की मशीन, जानें क्या है खासियत
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भोपाल के माउंटेनियर ने राम मंदिर ट्रस्ट को दान दी 10 लाख की मशीन, जानें क्या है खासियत
शोभित ने खुद ये मशीन तैयार की है.

शोभित नाथ ने बताया, मशीन की खासियत यह है कि इसके सभी कलपुर्जे भारत में ही बने हैं. यह मशीन पूर्णता मेड इन इंडिया (Made in India) है, जबकि इस तरीके की कीमत विदेशों में 40 लाख रुपए के करीब है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के पर्वतारोही (Mountaineer) शोभित नाथ शर्मा ने अयोध्या के श्री राम मंदिर ट्रस्ट को कोकोनट रीसाइक्लिंग मशीन दान की है. इस मशीन का निर्माण खुद शोभित ने किया है. इसकी कीमत बाहर से बुलाने में 40 लाख के करीब आती है, लेकिन शोभित ने इसे महज 10 लाख रुपए में तैयार किया है. शोभित नाथ ने बताया, मशीन की खासियत यह है कि इसके सभी कलपुर्जे भारत में ही बने हैं. यह मशीन पूर्णता मेड इन इंडिया है, जबकि विदेशों में इस तरीके के मशीन की कीमत 40 लाख रुपए के करीब है. लेकिन मेड इन इंडिया होने के कारण मशीन की लागत सिर्फ 10 लाख रुपए आई.



मशीन ऐसे करेगी काम




शोभित का कहना है कि मंदिर में प्रसाद के लिए चढ़ाए जाने वाले नारियल का अंदरूनी हिस्सा तो काम में आ जाता है लेकिन उसका बाहरी खोल इधर-उधर फेंक दिया जाता है. इसे नष्ट होने में 5 से 7 साल का समय लग जाता है. इस बेकार खोल से एक तो खाली जमीन खराब होती है. साथ ही साथ बारिशों में खोल में इकट्ठा हुआ पानी से मलेरिया के मच्छर और बदबू उत्पन्न होती है. इसकी वजह से आसपास रहने वाले लोगों को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है. इस समस्या से निजात पाने के लिए यह मशीन बहुत कारगर है.


इस काम में आती नारियल की खोल


इस मशीन द्वारा बचे हुए खोल को प्रोसेस किया जाता है जिससे कोकोपीट पाउडर नारियल के रेशे और खोल की टुकड़े मिलते हैं. कोकोपीट पाउडर का इस्तेमाल पेड़ों में होता है जिससे कोकोपीट पाउडर की पानी सोक लेने की प्रवृत्ति से काफी देर तक पेड़ की जड़ों में नमी बरकरार रहती है. पेड़ को पर्याप्त पोषक तत्व मिलता है जिससे पानी की खपत भी कम होती है. जहां सामान्य रूप से पेड़ों में दिन में दो बार पानी डालने का चलन है, वहीं इसके इस्तेमाल करने से 2 दिन में एक ही बार पेड़ों में पानी डालने की आवश्यकता होगी. इससे काफी समय और पैसों की बचत की जा सकती है. समय बीतने पर यही कोको पीट पाउडर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का भी काम करता है और पेड़ को बढ़ने में मदद करता है. नारियल के रेशे गद्दा बुनने के काम आते है. खोल से एक्टीवेटेड कार्बन प्राप्त होता है जो कि दवाइयों की कंपनियां अपने दवाइयों में इस्तेमाल करती हैं.






रोजगार के अवसर मिलेंगे


शोभित नाथ शर्मा ने बताया कि जो नारियल श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया जाएगा उसका वेस्ट मैनेजमेंट इस मशीन द्वारा किया जाएगा. साथ ही साथ युवाओं को रोजगार पाने का अवसर भी मिलेगा. इस मशीन द्वारा बनाया हुआ कोकोपीट पाउडर श्री राम मंदिर में ही स्थित पौधों में इस्तेमाल होगा जिससे प्राकृतिक सुंदरता के साथ पानी की बचत भी की जा सकेगी.







शोभित ने खुद तैयार की मशीन


शोभित नाथ शर्मा ने खुद इस मशीन को अपने हाथों से अयोध्या में बन रहे श्री राम मंदिर के लिए तैयार किया है. उन्होंने कहा कि मैंने इस मशीन को दान में दी है. मेरी यह इच्छा है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट इस भेंट को स्वीकार करें और मैं यह संकल्प लेता हूं कि पूरी जिंदगी इस मशीन का रखरखाव और संचालन पूर्ण सेवा भाव से निशुल्क करूंगा.



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