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'CM शिवराज सिंह ने चुनौती दी थी- कौन है माई का लाल.., हमने बता दिया हम हैं...'

'CM शिवराज सिंह ने चुनौती दी थी- कौन है माई का लाल.., हमने बता दिया हम हैं...'

SC/ST एक्ट का विरोध

SC/ST एक्ट का विरोध

चुरहट सीधी में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के रथ पर हुआ पथराव, चप्पल फेंकने की घटना हो या सांसदों, मंत्रियों का घेराव प्रदर्शन, तार सपाक्स आंदोलन से जुड़ रहे हैं.

    मध्य प्रदेश में एससी एसटी एक्ट के विरोध आंदोलन को धार देने वाले सपाक्स, सामान्य पिछड़ा अल्पसंख्यक कल्याण समाज के संरक्षक हीरालाल त्रिवेदी रिटायर्ड आईएएस अफसर और सूचना आयुक्त रहे हैं. सवर्ण समाज के 131 अलग-अलग संगठनों को सपाक्स से जोड़ कर उन्होंने आंदोलन को एक किस्म से आक्रामक रुख़ दे दिया है. चुरहट सीधी में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रथ पर हुआ पथराव, चप्पल फेंकने की घटना हो या सांसदों, मंत्रियों का घेराव प्रदर्शन, तार सपाक्स आंदोलन से जुड़ रहे हैं.

    6 सितंबर के देशव्यापी बंद को देखते हुए मध्य प्रदेश के 8 जिलों में पुलिस अलर्ट के साथ धारा 144 लगा दी गई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ओबीसी सांसदों, मंत्रियों की बैठक लेकर शांति बहाली के प्रयास शुरू कर दिए हैं. इन्हीं हालातों और मुद्दों पर न्यूज़-18 ने हीरालाल त्रिवेदी से बात की.

    1 - यह आंदोलन क्यों? मध्यप्रदेश में चुनाव को देखते हुए सपाक्स ने मैदान पकड़ा है ?
    जवाब- यह 78 प्रतिशत आबादी का सवाल है. जिन पर एससी एसटी एक्ट लागू है. 2016 में इस एक्ट में जो संशोधन हुआ है, उसने राह चलते हुए विवाद में भी इस 78 प्रतिशत आबादी को घोर अपराधी बनाने का इंतजाम कर दिया है. करीब 22 शब्द इसमें जोड़े गए हैं. जो सामान्य विवाद में कोई भी उपयोग कर सकता है. कई बार राह चलते उसे पता भी नहीं होता कि वह जिससे विवाद कर रहा है वह एससी एसटी वर्ग का है. लेकिन सीधी रिर्पोट दर्ज हो रही है. कई लोगों के लिए ब्लैकमेलिंग का खेल हो गया है. हाल ही में हमारे पास बरखेड़ी, शाजापुर के केस आए हैं. जहां टीचर्स, कोई होटल वाला अग्रिम जमानत के लिए परेशान हो रहा है. किसी का भीम सेना के साथ विवाद हुआ है तो कि किसी ने खाने का बिल नहीं चुकाया है. रहा सवाल चुनाव का तो हमने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. क्योंकि अधिकारों को लेकर अब हमें भाजपा या कांग्रेस दोनों पर भरोसा नहीं रहा. चुनाव आयोग में राजनीतिक दल के बतौर मान्यता के लिए आवेदन दिया है.

    2- यह आंदोलन की कौन सी राह है ? मुख्यमंत्री, सांसद, मंत्री को सीधा निशाना बनाया गया और उन्हें सुरक्षा इंतज़ाम करने पड़े?
    जवाब- हम उग्र आंदोलन नहीं कर रहे. यह तो वहां की जनता है, जो अपने गुस्से का इज़हार कर रही है. सब को दिख रहा है कि हमारे अधिकारों को बेवजह कुचला जा रहा है. मुख्यमंत्री के रथ पर पत्थर फेंकने वाले कांग्रेसी नहीं हैं. ये उन्हीं के समर्थित हिंदुवाहिनी के लोग हैं. ऐसा नहीं है कि हम सीधे मैदान में आए हैं. जब संसद में अध्यादेश लाने की तैयारी हो रही थी, तभी हमने हर सांसद को जगाया था. और कहा था कि 78 प्रतिशत आबादी के अधिकारों का भी ध्यान रखें.

    3- यह एक्ट पुराना है इसमें अब ‌विवाद क्या? यह बदल नहीं सकता इतने साल से इस एक्ट के बावजूद माहौल सौहार्दपूर्ण रहा अब एकदम से ऐसा क्या हुआ?

    जवाब- 2016 में इसे लेकर जो संशोधन हुए हैं, उसमें 78 प्रतिशत आबादी का पूरा पक्का ही इंतज़ाम कर दिया गया है. एक तो 22 नाम जोड़े गए, जिसमें जाति सूचक आदि आदि हैं..ऊपर से अग्रिम ज़मानत जैसे प्रावधान ख़त्म कर दिए. सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर जो गाइडलाइन दी थी. उसमें व्यावहारिक दिक्कतों पर विधिवेत्ताओं और समाज के प्रतिनिधियों से सरकार को बात करनी थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. उल्टा और कड़े कानूनों से इसे लाद दिया गया. यह एक्ट नहीं हथियार है.

    4- मध्यप्रदेश में सपाक्स सीधे सीधे शिवराज सिंह को क्यों निशाने पर ले रही है? मामला तो केंद्र का है.
    जवाब- मुख्यमंत्री ने भी अजा-जजा वर्ग के लिए 78 प्रतिशत लोगों के साथ नाइंसाफी की हद पार कर दी. पदोन्नति में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट ने इसे निरस्त कर दिया. जिसे लेकर अजा–जजा वर्ग के संगठन अजाक्स ने बड़ा सम्मेलन किया. इसमें मुख्यमंत्री को ना बुलाकर अजा वर्ग के सांसदों मंत्रियों को बुलाया. शिवराज सिंह बिना बुलाए इस सम्मेलन में गए. और उन्होंने दम ठोककर कहा कि देखता हूं कौन माई का लाल आरक्षण ख़त्म करता है. यानि हाईकोर्ट सहित बची हुई 78 प्रतिशत आबादी की माताओं को चुनौती दी. इतना ही नहीं अजाक्स को 4 करोड़ रुपये देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा कर दी. इसके बाद हमने सपाक्स को जो कि अधिकारियों – कर्मचारियों का संगठन था उसे मज़बूत किया और मैदान पकड़ने की तैयारी की. हमारा तो स्लोगन ही है- हम हैं माई के लाल.

    5- आज कितने मेंबर हैं सपाक्स में ?
    जवाब- मूल इकाई में तो ढ़ाई लाख हैं. जिसमें कई रिटायर्ड आईएएस, आईपीएएस अफसर और कर्मचारी हैं.

    6- जनता कहा हैं? सपाक्स के साथ?

    जवाब- जनता का प्रतिनिधित्व करने वाले समाज के संगठन हैं. जैसे करणी सेना, परशुराम सेना, वैश्य समाज, कायस्थ समाज जैसे सैकड़ों संगठन हमसे जुड़े हैं. हमारे साथ संघ से जुड़े पुराने लोग हैं. जो शिवराज सिंह के खिलाफ हैं. कांग्रेस के भी कुछ लोग हमारे साथ हैं.

    7- आगे की रणनीति क्या ? इसी तरह के तनाव का माहौल बना रहेगा ? और दोनों वर्ग आमने – सामने होते दिखाई देंगे.
    जवाब- नहीं, हम एससी एसटी वर्ग के साथ कोई वैमनस्यता नहीं चाहते. वे हमारे साथ हैं. हमारे भाई हैं. लेकिन जो सरकार ने एक्ट के नाम पर हथियार खड़ा कर दिया है. उससे अपने को बचाना चाहते हैं. अगर सरकार अभी नहीं चेती तो 2018 और 2019 सामने हैं. अभी तो हमने जगह-जगह पोस्टर लगाए हैं कि हमसे कोई वोट ना मांगे. आगे देखिए और क्या-क्या होता है.

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    Tags: Madhya pradesh news

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