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MP में आवारा कुत्तों की नसबंदी पर 5 साल में खर्च हो गए 17 करोड़ रुपये, फिर भी बढ़ता जा रहा है कुनबा

कुत्तों की नसबंदी पर सबसे ज़्यादा पैसा इंदौर में खर्च किया गया.

कुत्तों की नसबंदी पर सबसे ज़्यादा पैसा इंदौर में खर्च किया गया.

Bhopal-सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जब प्रदेश के बड़े शहरों में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी की जा रही है तो उसके बाद भी उनकी संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है.

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भोपाल.मध्य प्रदेश की सड़कों पर आवारा कुत्तों (Street dogs) की आबादी और आतंक बढ़ता जा रहा है.ये मामला विधानसभा तक पहुंच गया.कुत्तों की आबादी कंट्रोल करने के लिए सरकार ने विधानसभा में जो जवाब दिया उसे सुनकर सदस्य मुस्कुराए बिना नहीं रह पाए.सरकार का कहना है कुत्तों की नसबंदी पर वो 5 साल में 17 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है.

पूरे देश की तरह मध्य प्रदेश में भी सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है.हर गली मोहल्ले में ये घूम रहे हैं.कहीं ये बच्चों को काट रहे हैं.कहीं बड़े भी इनसे परेशान हैं.स्ट्रीट डॉग्स का आतंक इतना बढ़ गया है कि मंगलवार को विधानसभा में भी ये मुद्दा गूंजा.एक माननीय सदस्य ने सदन में सवाल किया कि आवारा कुत्तों से निजात दिलाने के लिए सरकार क्या कर रही है.इसका जवाब चौंकाने वाला आया. सरकार का कहना है कि प्रदेश के 5 बड़े शहरों में पिछले पांच साल में कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी पर 5 साल में 17 करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके हैं.

5 शहर 17 करोड़
विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक प्रदेश के 5 बड़े शहरों इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन और ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग की नसबंदी पर ये ₹17 करोड़ की राशि खर्च की गयी. इसमें सबसे ज्यादा 7 करोड़ रुपये इंदौर में खर्च किये गए. जबकि भोपाल में छह करोड़ 76 लाख रुपए खर्च किए गए.बावजूद इसके शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या और लोगों पर हमले की संख्या भी बढ़ रही है.
नसबंदी के दौरान 326 कुत्तों की मौत


विधानसभा में बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसौदिया के सवाल पर नगरीय प्रशासन विभाग ने जवाव दिया.जो जानकारी सरकार ने दी है उसके तहत इंदौर में 1 लाख 6000 कुत्तों की नसबंदी पर 7 करोड़ 46 लाख रुपये, भोपाल में 1 लाख 4 हजार कुत्तों की नसबंदी पर छह करोड़ 76 लाख रुपये, जबलपुर में 31 हजार 385 कुत्तों पर एक करोड़ 70 लाख रुपये, उज्जैन में 9000 कुत्तों पर 50 लाख रुपये और ग्वालियर में 13277 कुत्तों की नसबंदी पर 53 लाख रुपए खर्च किए गए हैं. सरकार ने ये जानकारी भी दी है कि नसबंदी के दौरान 326 कुत्तों की मौत हो गई.

नसबंदी के बाद क्यों बढ़ रहा है कुनबा
सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि जब प्रदेश के बड़े शहरों में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी की जा रही है तो उसके बाद भी उनकी संख्या में लगातार इजाफा क्यों हो रहा है.सिर्फ संख्या में बढ़ोतरी ही नहीं बल्कि बढ़ती संख्या के कारण स्ट्रीट डॉग का व्यवहार भी बदल रहा है. वह लोगों पर हमला कर रहे हैं.

4 NGO करा रहे हैं नसबंदी
बीजेपी विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया ने कहा नसबंदी की जिम्मेदारी चार एनजीओ को दी गई है.जो सवालों के घेरे में है. सिसौदिया के मुताबिक इनमें से दो एनजीओ हैदराबाद और दो एनजीओ भोपाल के हैं.लेकिन इसके बाद भी नसबंदी का अभियान कहीं चलता नजर नहीं आता है.ऐसे में करोड़ों रुपये खर्च होने पर सवाल उठ रहे हैं. इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
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